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IIT के एक और स्टूडेंट ने किया सुसाइड, हॉस्टल की छत से कूदकर दी जान

आईआईटी बॉम्बे के छात्र ने हॉस्टल की छत से कूदकर जान दे दी. सुसाइड करने वाला छात्र आईआईटी बॉम्बे में बीटेक के सेकेंड ईयर का स्टूडेंट था.

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पिछले कुछ महीनों में IIT के कई स्टूडेंट्स ने आत्महत्या की है. (Photo: IIT Bombay)
पिछले कुछ महीनों में IIT के कई स्टूडेंट्स ने आत्महत्या की है. (Photo: IIT Bombay)

देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी आईआईटी से एक और सुसाइड की खबर आई है. बताया जा रहा है कि इस बार बीटेक (सिविल इंजीनियरिंग) के छात्र ने आईआईटी बॉम्बे के हॉस्टल नंबर-4 की छत से कूदकर अपनी जान दे दी. शुरुआती जानकारी के अनुसार, सुसाइड करने वाले छात्र का नाम नमन अग्रवाल (21) है, जो राजस्थान के पिलानी का रहने वाला था. नमन आईआईटी में सेकेंड ईयर का स्टूडेंट था. अब मामले में जांच की जा रही है. 

आईआईटी में पिछले कुछ दिनों में सुसाइड की कई घटनाएं हुई हैं. दो हफ्ते पहले भी आईआईटी कानपुर में पीएचडी छात्र ने हॉस्टल की छठी मंजिलसे कूदकर आत्महत्या कर ली थी. छात्र अपनी पत्नी और बेटी के साथ हॉस्टल में रहता था. स्वरूप राजस्थान के चुरु का रहने वाला था और आईआईटी में डिपार्टमेंट आफ अर्थ साइंस से पीएचडी कर रहा था. इससे करीब 22 दिन पहले भी आईआईटी स्टूडेंट ने आत्महत्या की थी.

डराने वाले है आत्महत्या का आंकड़ा

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, साल 2019 में 10,335 छात्रों ने आत्महत्या की थी. यह संख्या 2020 में बढ़कर 12,526 हो गई. 2021 में भी यह आंकड़ा 13,000 के पार रहा. हालांकि 2022 में इसमें हल्की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन 2023 में छात्र आत्महत्याओं की संख्या बढ़कर 13,892 पहुंच गई, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है.

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डेटा के मुताबिक, आत्महत्या के मामले 18 साल से कम उम्र के छात्रों में सबसे ज्यादा दर्ज किए गए. 2019 में इस आयु वर्ग में 1,577 मामले सामने आए थे. 2020 और 2021 में इनमें गिरावट आई, लेकिन 2022 और 2023 में फिर से बढ़ोतरी दर्ज हुई और 2023 में यह संख्या 1,303 तक पहुंच गई.

IIT Graphic

क्या होती है आत्महत्या की वजह?

पढ़ाई के दबाव के अलावा बेरोजगारी भी आत्महत्या का एक बड़ा कारण रही है. NCRB के आंकड़ों के अनुसार, 2019 में बेरोजगारी से जुड़े आत्महत्या के 2,851 मामले दर्ज किए गए थे. 2020 में यह संख्या बढ़कर 3,548 हो गई, जो इस अवधि का सबसे ऊंचा आंकड़ा है. 2021 में भी लगभग इतने ही मामले (3,541) सामने आए. ये दोनों साल कोविड-19 महामारी के सबसे कठिन दौर के थे, जब लॉकडाउन और अन्य कारणों से बड़े पैमाने पर नौकरियां गईं. इसके बाद 2022 में यह संख्या घटकर 3,170 और 2023 में 3,063 रह गई.

(खबर अपडेट की जा रही है)

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