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कॉलेज में फेल, फिर भी करोड़ों का पैकेज! इस टेक प्रोफेशनल ने झटके META, माइक्रोसॉफ्ट-उबर के ऑफर

Success Story: कॉलेज में एक अहम विषय में 'बैकलॉग' लगने के बाद भी हार नहीं मानी. अपनी बुनियादी समझ को मजबूत किया और आज गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा जैसी दुनिया की दिग्गज कंपनियों से जॉब ऑफर हासिल कर एक मिसाल पेश की है.

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कार्तिक मोदी की प्रेरक कहानी, जो हर इंजीनियरिंग छात्र को पढ़नी चाहिए (Image: Instagram/karrrtiiikkk)
कार्तिक मोदी की प्रेरक कहानी, जो हर इंजीनियरिंग छात्र को पढ़नी चाहिए (Image: Instagram/karrrtiiikkk)

एक भारतीय टेक प्रोफेशनल की कहानी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है. उनकी यात्रा साबित करती है कि कॉलेज के दौरान आई अकादमिक रुकावटें आपके करियर के सपनों को खत्म नहीं कर सकतीं. निरंतर मेहनत और बेसिक चीजों को दोबारा सुधार कर, उन्होंने शुरुआती असफलताओं को गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, उबर, एटलेश‍ियन और अमेजन UK जैसी शीर्ष ग्लोबल कंपनियों के ऑफर्स में बदल दिया.

कौन हैं ये टेक प्रोफेशनल, जिसने क्रैक किए FAANG ऑफर्स?
सॉफ्टवेयर इंजीनियर कार्तिक मोदी ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर अपनी प्रेरक यात्रा साझा की है. उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने टेक इंडस्ट्री की सबसे बड़ी कंपनियों में जगह बनाई. आज भले ही उनके पास कई बड़े ऑफर हैं, लेकिन उनके कॉलेज के दिन संघर्षों से भरे थे.

कार्तिक ने खुलासा किया कि कॉलेज के दौरान उनका 'डाटा स्ट्रक्चर्स' जैसे महत्वपूर्ण विषय में 'बैकलॉग' लग गया था. यह विषय टेक्निकल इंटरव्यू की जान माना जाता है. इस असफलता ने उनके आत्मविश्वास को झकझोर दिया था.

कार्तिक ने उस समय को याद करते हुए कहा कि DSA टेक इंटरव्यू का मुख्य विषय है. उसमें फेल होने का मतलब था मेरे माथे पर एक ठप्पा लग जाना कि मैं इस इंडस्ट्री के लिए काबिल नहीं हूं. 

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कहां से की पढ़ाई और क्या है वर्क एक्सपीरियंस?
कार्तिक मोदी ने साल 2021 में NIT कुरुक्षेत्र से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में बीटेक पूरा किया. स्नातक होने के बाद, उन्होंने उबर में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम किया, फिर वे माइक्रोसॉफ्ट गए और बाद में अमेजन से जुड़े, जहां वे वर्तमान में SDE-2 के रूप में कार्यरत हैं.

कॉलेज में क्या हुई थी चूक?
कार्तिक के अनुसार, कोडिंग इंटरव्यू में DSA की अहमियत के कारण इसमें फेल होना एक बड़ा झटका था. सहपाठियों को FAANG कंपनियों की तैयारी करते देख उनमें हीन भावना आने लगी थी. लेकिन, उन्होंने इस झटके को बहाना बनाने के बजाय अपनी रणनीति बदलने के मौके के रूप में लिया. उन्होंने कहा कि वह बैकलॉग हार मानने का बहाना हो सकता था, लेकिन इसके बजाय वह मेरी तैयारी के तरीके को बदलने का जरिया बना.

FAANG इंटरव्यू क्रैक करने की क्या थी रणनीति?
कार्तिक ने अपनी सफलता के लिए तीन प्रमुख बदलावों का जिक्र किया. उन्होंने अपनी शून्य से शुरुआत के बारे में बताते हुए कहा कि उन्होंने जल्दबाजी करने के बजाय हर टॉपिक को गहराई से समझा और बुनियादी कॉन्सेप्ट्स को दोबारा तैयार किया. उन्होंने मैराथन स्टडी के बजाय रोज़ाना एक या दो अच्छे कोडिंग सवालों को हल करने पर ध्यान दिया.

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इंटरव्यू में मिली हर असफलता को उन्होंने फीडबैक के रूप में लिया. उन्होंने अपनी कोडिंग स्पीड, कॉन्सेप्ट्स और बातचीत के तरीके (कम्यून‍िकेशन) की कमियों को पहचाना और सुधारा.

छात्रों के लिए क्यों प्रेरणादायक है यह कहानी?
कार्तिक की कहानी उन छात्रों के बीच बहुत लोकप्रिय हो रही है जो कम CGPA या बैकलॉग के कारण तनाव में रहते हैं. उनका संदेश साफ है कि कॉलेज की असफलताएं आपका भविष्य तय नहीं करतीं.

कम सीजीपीए या अकादमिक असफलताओं से परेशान छात्रों के लिए कार्तिक का एक ही मंत्र है कि अगर आप बैकलॉग या कम CGPA के साथ फंसे हैं और सोच रहे हैं कि खेल खत्म हो गया है, तो याद रखें कि पिक्चर अभी बाकी है.

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