तृणमूल कांग्रेस के उत्तराधिकारी और सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में वो केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को चार मई को कोलकाता आने का चैलेंज करते दिखाई पड़ रहे हैं. आइए, अचानक सुर्खियों में छाए अभिषेक बनर्जी के राजनीतिक जीवन के साथ-साथ उनकी एकेडमिक योग्यता के बारे में जानते हैं.
टीएमसी के युवराज कहे जाने वाले अभिषेक बनर्जी यूं तो अपनी पार्टी से निर्वाचित सांसद भी हैं. इस बार के विधानसभा चुनाव 2026 में उन्होंने पार्टी की कमान संभालते हुए कई सीटों पर जाकर सभाएं कीं. अभिषेक बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सगे भतीजे हैं और उन्हें राज्य की राजनीति में ममता बनर्जी का उत्तराधिकारी भी माना जाता है. वह ममता बनर्जी के भाई अमित बनर्जी के बेटे हैं.
वो वर्तमान में डायमंड हार्बर लोकसभा सीट से सांसद हैं और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अखिल भारतीय महासचिव के रूप में काम कर रहे हैं. अगर प्रोफेशनल बैकग्राउंड की बात करें तो राजनीति में आने से पहले उन्होंने मैनेजमेंट की पढ़ाई (BBA/MBA) की थी, जिसका विवरण उनके चुनावी हलफनामों में भी मिलता है. लेकिन अभिषेक बनर्जी का नाम केवल राजनीति के लिए ही नहीं, बल्कि उनकी डिग्री को लेकर हुए विवादों के कारण भी सुर्खियों में रहा है.
कोलकाता से स्कूली पढ़ाई, दिल्ली से यूजी-पीजी
बता दें कि उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा से लेकर एमबीए तक का सफर तय किया है. अभिषेक बनर्जी की शुरुआती पढ़ाई यानी स्कूली शिक्षा कोलकाता के प्रतिष्ठित नवा नालंदा हाई स्कूल से हुई. स्कूल के बाद वे मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए दिल्ली चले गए. यहां उन्होंने भारतीय योजना एवं प्रबंधन संस्थान (IIPM), नई दिल्ली से BBA की डिग्री हासिल की.
इसके बाद अभिषेक ने अपनी MBA की डिग्री भी IIPM नई दिल्ली से ही प्राप्त की. उनके चुनावी हलफनामे के अनुसार, उन्होंने साल 2009 में अपना एमबीए पूरा किया था. लेकिन अभिषेक बनर्जी की डिग्री को लेकर सबसे बड़ा विवाद IIPM संस्थान की मान्यता को लेकर रहा है.
हाईकोर्ट ने भी लगाई थी संस्थान की डिग्री पर रोक
इस संस्थान को भारतीय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने एक मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय नहीं माना था. इसी कारण साल 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान, विपक्ष ने उनकी डिग्री की सत्यता पर सवाल उठाए थे. हालांकि, अभिषेक ने हमेशा अपने हलफनामों में IIPM की डिग्री का स्पष्ट उल्लेख किया है.
दिल्ली उच्च न्यायालय ने साल 2014 में भारतीय योजना एवं प्रबंधन संस्थान (IIPM) और उसके डीन अरिंदम चौधरी को अपने द्वारा संचालित पाठ्यक्रमों को 'MBA, BBA, प्रबंधन पाठ्यक्रम, प्रबंधन स्कूल, बिजनेस स्कूल या B-स्कूल' के रूप में वर्णित करने से रोक दिया था. कोर्ट का तर्क था कि क्योंकि ये मान्यता प्राप्त नहीं हैं, इसलिए ऐसी इजाजत नहीं दी जा सकती.
न्यायालय ने IIPM पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था क्योंकि उसने न्यायालय को दिए गए अपने पूर्व वचन का उल्लंघन किया जिसमें उसने अपने द्वारा संचालित पाठ्यक्रमों के बारे में भ्रामक विज्ञापन या जानकारी न देने का वादा किया था.