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CBSE की 'टूल-क‍िट' लीक! क्या OSM पर डैमेज कंट्रोल के ल‍िए स्कूलों को मिली सोशल-मीड‍िया की स्क्रिप्ट?

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के कक्षा 12वीं ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) विवाद ने नया मोड़ लिया है. जहां छात्रों ने गलत मूल्यांकन, धुंधली स्कैनिंग और पोर्टल क्रैश की शिकायतें करते हुए न्याय की मांग की है, वहीं बोर्ड पर सोशल मीडिया प्रोपेगैंडा के तहत प्रिंसिपलों को निर्देशित करने का आरोप लगा है. कई स्कूलों ने इंस्टाग्राम रील्स के जरिए बोर्ड के पक्ष में माहौल बनाया.

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CBSE OSM Controversy
CBSE OSM Controversy

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) का कक्षा 12वीं का ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) विवाद अब एक नए और बेहद चौंकाने वाले मोड़ पर आ खड़ा हुआ है. एक तरफ जहां देश के लाखों छात्र कॉपियों के गलत मूल्यांकन, धुंधली स्कैनिंग और पोर्टल क्रैश होने के कारण सड़कों से लेकर कोर्ट तक न्याय की गुहार लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बोर्ड पर इस गंभीर मुद्दे को दबाने के लिए 'सोशल मीडिया प्रोपेगैंडा' और 'डैमेज कंट्रोल' का सहारा लेने का गंभीर आरोप लगा है.

एक र‍िपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सीबीएसई के क्षेत्रीय कार्यालयों ने इस हफ्ते स्कूल प्रिंसिपलों को एक खास 'सोशल मीडिया टूलकिट' सर्कुलेट की है. इस टूलकिट के जरिए स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे सोशल मीडिया पर बोर्ड के विवादित ओएसएम (OSM) सिस्टम का खुलकर बचाव करें. इसके बाद देश भर के सैकड़ों सरकारी और निजी स्कूलों, जिनमें केंद्रीय विद्यालय (KV) और जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) शामिल हैं, सभी ने इंस्टाग्राम पर 'रील्स' और वीडियो पोस्ट करके बोर्ड के पक्ष में माहौल बनाना शुरू कर दिया है.

लीक हुए दस्तावेज में क्या है 'स्क्रिप्ट'?
कुछ सोशल मीड‍िया हैंडल्स ने “Material for Principals” नाम के एक आधिकारिक दस्तावेज की पड़ताल की है, जिसमें साफ तौर पर वह स्क्रिप्ट लिखी हुई है, जिसे प्रिंसिपलों को कैमरे के सामने हूबहू पढ़ना था.

इस लीक स्क्रिप्ट में कड़े निर्देश और कुछ खास बातें इस प्रकार हैं:

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तारीफों के पुल: प्रिंसिपलों से कहा गया कि वे सीबीएसई को इन शुरुआती तकनीकी दिक्कतों के प्रति बेहद सक्रिय, सहानुभूति रखने वाला और संवाद करने वाला (Highly proactive, empathetic, and communicative) बताएं.

पैनिक न होने की रट: स्क्रिप्ट में साफ लिखा है कि वे छात्रों से कहें कि इतने बड़े पैमाने पर तकनीक लागू करने पर कुछ शुरुआती रुकावटें (Bumps) आना स्वाभाविक है... कृपया घबराएं नहीं. मैं हर छात्र को आश्वस्त करना चाहता हूं कि किसी भी बच्चे को तकनीकी खराबी का नुकसान नहीं भुगतने दिया जाएगा.

री-इवैल्यूएशन का रास्ता: अगर डिजिटल शीट और वास्तविक प्रदर्शन में अंतर है, तो छात्र री-इवैल्यूएशन की आधिकारिक प्रक्रिया का इस्तेमाल करें.

वायरल हुईं रील्स, हूबहू मैच हो रही है भाषा
दस्तावेज सर्कुलेट होने के बाद सोशल मीडिया (विशेषकर इंस्टाग्राम रील्स) पर ऐसी वीडियोज की बाढ़ आ गई है, जिनमें छात्र और प्रिंसिपल इसी लीक हुई स्क्रिप्ट की भाषा को दोहराते नजर आ रहे हैं:

केंद्रीय विद्यालय (गोरखपुर): केवी नंबर 1 एयरफोर्स स्टेशन गोरखपुर के एक वीडियो में कक्षा 12वीं की छात्रा कहती दिख रही है कि मैं अपने नंबरों से संतुष्ट हूं. छात्रों को होने वाली परेशानियां नई बात नहीं हैं, हर साल ऐसी दिक्कतें आती हैं. मुझे नहीं लगता कि ओएसएम (OSM) कोई समस्या है. हालांकि, स्कूल के प्रिंसिपल बैरिस्टर पांडेय ने HT से बातचीत में टूलकिट की बात से इनकार करते हुए इसे स्कूल स्टाफ और छात्रों का अपना फैसला बताया.

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जवाहर नवोदय विद्यालय (जाजपुर): यहां के प्रभारी प्रिंसिपल अभिमन्यु भट्ट ने वीडियो में सीधे तौर पर टूलकिट के पॉइंट्स को दोहराते हुए कहा कि ओएसएम एक बेहतरीन पहल है और शिक्षकों को कॉपियां जांचने का पूरा समय मिला.

निजी स्कूल भी लाइन में: दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) सिलीगुड़ी की प्रिंसिपल अनिशा शर्मा ने भी वीडियो में बिल्कुल दस्तावेज के शब्दों (fair, accurate, faster and transparent) का इस्तेमाल करते हुए सिस्टम को पारदर्शी बताया.

मैं बच्चों के खिलाफ झूठ नहीं बोल सकता
सीबीएसई के इस कड़े दबाव के आगे सभी प्रिंसिपलों ने घुटने नहीं टेके. दिल्ली के एक नामी प्राइवेट स्कूल के प्रिंसिपल ने नाम न छापने की शर्त पर HT को बताया कि यह सच है कि हमारे क्षेत्रीय कार्यालय के प्रमुख द्वारा मुझे भी 'मटेरियल फॉर प्रिंसिपल्स' वाला दस्तावेज भेजा गया था. मैंने देखा कि पूरा इंस्टाग्राम सीबीएसई के समर्थन में प्रिंसिपलों के वीडियो से पटा पड़ा है, जबकि वे सब जानते हैं कि इस सिस्टम ने छात्रों को कितनी तकलीफ दी है. मुझे लगता है कि हमें छात्रों के तनाव और दर्द की आवाज बनना चाहिए क्योंकि उनका करियर दांव पर है. इसलिए मैंने सीबीएसई के पक्ष में कोई वीडियो नहीं बनाया.

सीबीएसई का रुख: 'हमने किसी को मजबूर नहीं किया'
जब इस पूरे टूलकिट विवाद पर सीबीएसई के प्रवक्ता से आधिकारिक टिप्पणी मांगी गई तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. हालांकि, बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "हमने किसी को भी हमारे पक्ष में वीडियो पोस्ट करने का कोई निर्देश नहीं दिया है."

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आंकड़े खोल रहे हैं पोल: सीबीएसई भले ही इस डैमेज कंट्रोल के जरिए सब कुछ ठीक दिखाने की कोशिश करे, लेकिन आंकड़े कुछ और ही गवाही दे रहे हैं. 26 मई तक, 12वीं कक्षा के परीक्षा में बैठे 18 लाख छात्रों में से हर चार में से एक छात्र (लगभग 25%) ने अपनी आंसर-बुक की स्कैन कॉपी के लिए आवेदन किया है, जो पिछले साल की तुलना में 208% की भारी बढ़ोतरी है.

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