नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसमें ऐसे-ऐसे सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं जो देश के पूरे परीक्षा तंत्र पर सवालिया निशान खड़े करते हैं. इस पूरे घोटाले में अब जो नया मोड़ आया है, वह न सिर्फ हैरान करने वाला है, बल्कि यह भी दिखाता है कि पेपर लीक माफिया किस कदर बेखौफ था.
जांचकर्ताओं को पता चला है कि इस मामले की मुख्य आरोपी और स्कूल की हेडमिस्ट्रेस मनीषा हवलदार जो खुद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से जुड़ी हुई थीं, उन्होंने अपने मोबाइल फोन में एक आरोपी कोचिंग लेक्चरर का नंबर "God" (भगवान) नाम से सेव कर रखा था! मनीषा खुद फिजिक्स की एक्सपर्ट हैं और सीबीआई की कस्टडी में हैं.
लातूर और पुणे से दो नई गिरफ्तारियां, खुला कड़ियों का जाल
सीबीआई ने बुधवार को इस मामले में दो और बड़ी गिरफ्तारियां की हैं. इनमें एक हैं महाराष्ट्र के लातूर के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज शिरुरे और दूसरे पुणे के एक कोचिंग इंस्टीट्यूट के लेक्चरर तेजस शाह. इन दोनों के तार सीधे तौर पर मनीषा हवलदार से जुड़े हुए थे.
सीबीआई की जांच में लीक की जो क्रोनोलॉजी सामने आई है, उसके अनुसार मनीषा हवलदार एनटीए में फिजिक्स के सवालों को तैयार करने में मदद कर रही थीं. उन्होंने ये सवाल पुणे के अभंग प्रभु मेडिकल एकेडमी के लेक्चरर तेजस शाह को लिखाए, जिसने इन्हें एक नोटबुक में नोट कर लिया.
फिर तेजस शाह ने सवालों वाले उन पन्नों की तस्वीरें वापस मनीषा को भेजीं और मनीषा के पति के मोबाइल नंबर पर ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर किए. सीबीआई को 20,000 रुपये के ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के सबूत मिले हैं, हालांकि बड़े पैमाने पर कैश के लेनदेन का भी शक है. तेजस शाह से ये सवाल आरसीसी (RCC) कोचिंग इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर प्रोफेसर शिवराज मोटेगांवकर के पास पहुंचे और वहां से डॉ. मनोज शिरुरे के हाथ लगे.
अपनों के लिए लगी 'स्पेशल क्लास', 2 से 10 लाख में सौदा
इस लीक हुए "गेस पेपर" (जिसमें हूबहू नीट 2026 के ही सवाल थे) को लेकर डॉ. मनोज शिरुरे ने एक और आरोपी पीवी कुलकर्णी को 2 लाख से 10 लाख रुपये तक की भारी-भरकम रकम चुकाई. इसके बाद कुछ चुनिंदा छात्रों के लिए 'स्पेशल कोचिंग सेशन' आयोजित किए गए. इन सेशन्स में कोचिंग डायरेक्टर मोटेगांवकर का बेटा, डॉ. शिरुरे का भतीजा और भतीजी शामिल हुए, जहां उन्हें लीक हुए सवाल रटवाए और समझाए गए.
सीबीआई सूत्रों का कहना है कि इन रसूखदार आरोपियों के बच्चों को, जिन्हें स्पेशल क्लास में सवाल रटवाए गए थे, इस केस में सरकारी गवाह बनाया जा सकता है.
50 से ज़्यादा ठिकानों पर छापेमारी, कई और गिरफ्तारियां मुमकिन
सीबीआई की जांच का दायरा अब बढ़ता ही जा रहा है. इस हफ्ते की शुरुआत में नांदेड़ में दो जगहों पर तलाशी ली गई, जो उन माता-पिता के ठिकाने बताए जा रहे हैं जिन्होंने इस पूरे सिंडिकेट (हवलदार, कुलकर्णी, मंदहारे, वाघमारे, मोटेगांवकर और शिरुरे) से अपने बच्चों के लिए लीक पेपर खरीदे थे.
फिलहाल कोर्ट ने डॉ. मनोज शिरुरे और तेजस शाह को 1 जून तक के लिए सीबीआई की हिरासत में भेज दिया है. जांच एजेंसी पिछले कुछ दिनों में 50 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े चेहरों की गिरफ्तारी तय मानी जा रही है.