अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन को और अधिक पेशेवर बनाने के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक बड़ा कदम उठाया है. राम मंदिर के इतिहास में पहली बार एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की जा रही है.
अक्सर लोगों को लगता है कि धार्मिक ट्रस्टों में ऐसे बड़े पद मानद (अनपेड या सेवा भाव वाले) होते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. यह एक फुल-टाइम कॉर्पोरेट स्टाइल जॉब है. राम मंदिर के पहले CEO को मिलने वाली सैलरी, आलीशान आवास (बंगला) और गाड़ियों के पूरे पैकेज की डिटेल नीचे दी गई है.
क्या होगी जिम्मेदारी?
राम मंदिर के पहले CEO कोई आम प्रशासनिक अधिकारी नहीं होंगे, बल्कि उन पर पूरे परिसर के मैनेजमेंट की जिम्मेदारी होगी.
प्रतिदिन आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और दर्शन की व्यवस्था.
मंदिर ट्रस्ट के फंड, चढ़ावे और वित्तीय लेन-देन का ऑडिट.
मंदिर परिसर में चल रहे अन्य विकास कार्यों की मॉनिटरिंग.
सैलरी, बंगला और गाड़ियां: क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी?
चूंकि यह एक बेहद जिम्मेदारी भरा और फुल-टाइम पद है, इसलिए ट्रस्ट ने इसके लिए एक आकर्षक और वीआईपी (VIP) सुविधाओं वाला पैकेज तैयार किया है, जिसका पूरा खर्च सीधे ट्रस्ट फंड से दिया जाएगा:
आकर्षक सैलरी पैकेज: CEO को मिलने वाला वेतन किसी बड़े सरकारी विभाग के शीर्ष अधिकारी (जैसे कैबिनेट सचिव या प्रमुख सचिव) या किसी बड़ी कंपनी के टॉप एग्जीक्यूटिव के समकक्ष होगा. सूत्रों के मुताबिक, यह एक निश्चित और सम्मानजनक मासिक वेतन होगा.
अयोध्या में आलीशान आवास (बंगला): CEO को अयोध्या के पॉश इलाके में रहने के लिए एक सर्वसुविधायुक्त सरकारी या ट्रस्ट-स्वामित्व वाला बंगला दिया जाएगा. इसमें कैंप ऑफिस और सुरक्षाकर्मियों के रहने की व्यवस्था भी होगी.
आधिकारिक गाड़ियां और सुरक्षा: सुचारू रूप से काम करने और अयोध्या के वीआईपी मूवमेंट को देखते हुए CEO को लग्जरी आधिकारिक गाड़ियां (एसयूवी) और ड्राइवर की सुविधा मिलेगी. इसके साथ ही उनकी सुरक्षा के लिए विशेष गार्ड्स भी तैनात रहेंगे.
अन्य भत्ते (पर्क): मेडिकल इंश्योरेंस, ट्रैवल अलाउंस और फोन-इंटरनेट जैसी सभी जरूरी सुविधाएं भी इस पैकेज का हिस्सा होंगी.
कौन बन सकता है राम मंदिर का CEO?
ट्रस्ट इस पद के लिए किसी नौसिखिए को नहीं, बल्कि एक बेहद अनुभवी चेहरे को तलाश रहा है. इसके लिए योग्यता के कुछ कड़े मापदंड तय किए गए हैं:
योग्यता की शर्तें
उम्मीदवार को प्रशासन का लंबा अनुभव हो.
वो हिंदू धर्म का अनुयायी हो.
उम्मीदवार का ट्रैक रिकॉर्ड पूरी तरह से साफ और निष्कलंक होना अनिवार्य है.
कहां से आएगा पैसा?
इस पूरे पैकेज और सुविधाओं पर होने वाला खर्च उत्तर प्रदेश सरकार या केंद्र सरकार की जेब से नहीं जाएगा. यह पूरा खर्च श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के फंड से वहन किया जाएगा. राम मंदिर ट्रस्ट के पास देश-दुनिया से आए दान के रूप में एक बड़ा फंड मौजूद है, जिससे इस पेशेवर प्रबंधन की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाया जाएगा.
यह कदम दर्शाता है कि राम मंदिर ट्रस्ट अब पूरी तरह से आधुनिक और प्रोफेशनल मैनेजमेंट की ओर बढ़ रहा है, ताकि अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं मिल सकें.