काबा इस्लाम की सबसे पवित्र जगहों में शामिल है और दुनियाभर के मुसलमानों के लिए आस्था का केंद्र माना जाता है. काबा पर जो काला रेशमी कपड़ा चढ़ाया जाता है, उसे किस्वा या गिलाफ-ए-काबा कहा जाता है. हर साल इसे उतारकर नया किस्वा चढ़ाया जाता है. लेकिन हाल में सामने आई एपस्टीन फाइल्स में किस्वा को लेकर आया खुलासा वैश्विक स्तर पर विवाद का कारण बन गया है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्ष 2017 में किस्वा के कुछ टुकड़े अमेरिका भेजे गए थे और उनकी डिलीवरी सीधे अपराधी जेफरी एप्सटीन तक पहुंची. यह दावा सामने आते ही मुस्लिम समुदाय सहित दुनिया भर में धार्मिक भावनाओं, सुरक्षा व्यवस्था और नैतिक मूल्यों को लेकर कई गंभीर सवाल उठने लगे हैं.
क्या है किस्वा और क्यों है यह इतना पवित्र?
काबा पर चढ़ाया जाने वाला किस्वा काले रंग का रेशमी कपड़ा होता है जिसमें सोने और चांदी से कुरान की आयतें कढ़ी जाती हैं. इसे इस्लामी दुनिया का सबसे पवित्र कपड़ा माना जाता है.
अरब न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, किस्वा की खासियतें ये है कि पूरी तरह प्राकृतिक रेशम से तैयार होता है. 21 कैरेट गोल्ड-प्लेटेड और चांदी के धागों से कढ़ाई होती है.वजन 850 किग्रा से 1415 किग्रा तक होता है.इसकी लागत लागत 17–25 मिलियन सऊदी रियाल (करीब 4–6 करोड़ रुपये) होती है.
किस दिन बदला जाता है किस्वा? परंपरा में बड़ा बदलाव
पहले किस्वा जिलहिज्जा की 9वीं तारीख (यौम-ए-अराफात) को हज के दौरान बदला जाता था. लेकिन 2022 में सऊदी सरकार ने यह नियम बदल दिया.गल्फ न्यूज के मुताबिक,किस्वा हर साल 1 मुहर्रम (इस्लामी नए साल के पहले दिन) को बदला जाता है.यह प्रक्रिया तड़के सुबह या रात में होती है.
कहां और कैसे बनता है किस्वा?
किस्वा का निर्माण King Abdulaziz Complex for Holy Kaaba Kiswah में होता है. यह मक्का के उम अल-जौद इलाके में स्थित एक प्रतिष्ठित सरकारी परिसर है.पूरा निर्माण 7 जटिल चरणों में पूरा होता है.रेशम की धुलाई और शुद्धिकरण होना.जैक्वार्ड मशीन से बुनाई .सिल्कस्क्रीन प्रिंटिंग.कुरानी आयतों की कढ़ाई.सोने-चांदी के धागों का काम.अंतिम असेंबली और निरीक्षण.करीब 150–220 विशेषज्ञ सऊदी कारीगर 11 महीनों तक इस प्रक्रिया में लगे रहते हैं.
पुरानी किस्वा का क्या होता है?
काबा से उतारा गया पुराना किस्वा अत्यंत सावधानी से हटाया जाता है.सोने-चांदी के धागे अलग किए जाते हैं फिर इसे लगभग 56 छोटे टुकड़ों में काटा जाता है.ये टुकड़े विदेशी मेहमानों,इस्लामी संस्थाओं,राजदूतों म्यूजियमों को उपहार के रूप में दिए जाते हैं. कुछ हिस्से सरकारी गोदामों में सुरक्षित स्टोर किए जाते हैं. इन्हें अत्यंत मूल्यवान माना जाता है क्योंकि लाखों मुसलमानों ने इन्हें छुआ होता है.
एपस्टीन फाइल्स का विवाद: धार्मिक और नैतिक सवाल
एपस्टीन फाइल्स में दावा किया गया कि किस्वा के कुछ टुकड़े 2017 में अमेरिका भेजे गए और उनकी डिलीवरी सीधे जेफरी एपस्टीन तक पहुंची.यह खुलासा दो बड़े सवाल खड़े करता है.दुनिया के सबसे पवित्र कपड़े का किसी अपराधी तक पहुंचना मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है.एपस्टीन फाइल्स से जुड़ा यह दावा भले अभी पूरी तरह प्रमाणित न हो, लेकिन इससे धार्मिक समुदाय में बेचैनी बढ़ी है और दुनिया भर में सुरक्षा व नैतिकता पर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं.