आप इंजीनियर के नाम और काम दोनों से वाकिफ होंगे. ये भी लगता होगा कि इनकी दुनिया केवल कोडिंग, बिल्डिंग या मशीनें बनाने तक ही सीमित है. लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. अगर आपको खेल और टेक्नोलॉजी में इंटरेस्ट है तो आपको स्पोर्ट्स इंजीनियर के बारे में जरूर जानते होंगे. वह ऐसे व्यक्ति होते हैं जो विराट कोहली के बल्ले से लेकर रोहित शर्मा के जूते तक डिजाइन करते हैं. ये टेक्नोलॉजी का यूज करके अच्छे उपकरण बनाते हैं जिससे न केवल खिलाड़ियों की परफॉर्मेंस अच्छी हो बल्कि दिखने में भी क्लासी लगे. भारत में स्पोर्ट्स इंजीनियर की बहुत कमी है. पहले लोग इस करियर के बारे में जानते नहीं थे लेकिन अब उन्हें इसके बारे में मालूम चल रहा है जिससे उनमें इस फील्ड के बारे में जानने की उत्सुकता बढ़ गई है.
ऐसे में अगर आप भी इसके बारे में जानना चाहते हैं, तो चलिए जानते हैं इस बढ़ते करियर के बारे में.
क्या है स्पोर्ट्स इंजीनियरिंग?
स्पोर्ट्स इंजीनियरिंग ऐसी फील्ड है जहां थ्योरीज को खेल में लागू किया जाता है. इसका उद्देश्य खेल के उपकरणों जैसे बल्ला, रैकेट, गेंद के साथ ही खिलाड़ियों के कपड़ों, जूतों और यहां तक कि स्टेडियम के वातावरण को इस तरह डिजाइन करना है कि खिलाड़ी का प्रदर्शन बेहतर हो और चोट लगने का खतरा कम हो जाए.
क्या है करियर स्कोप?
स्पोर्ट्स इंजीनियर बनने के लिए केवल पढ़ाई नहीं बल्कि स्किल की भी जरूरत होती है. इसमें करियर बनाने के लिए आपको यह समझना होगा कि बैट, बॉल या खिलाड़ियों से जुड़े उपकरण कैसे काम करते हैं. इसके साथ ही डिजाइन से जुड़ी चीजें सीखनी पड़ती है. इसमें CAD (कंप्यूटर एडेड डिजाइन) सॉफ्टवेयर की मदद से उपकरणों का डिजाइन बनाया जाता है. स्पोर्ट्स इंजीनियर बनने के लिए 12वीं साइंस स्ट्रीम से पास होना अनिवार्य है. इसके बाद मैकेनिकल इंजीनियरिंग, स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी या बायोमैकेनिक्स जैसे कोर्स के साथ ग्रेजुएशन किया जा सकता है. कई यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स इंजीनियरिंग से जुड़े स्पेशल कोर्स भी कराती है.
कहां मिलेगी नौकरी?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस कोर्स को करने के बाद नौकरी कहां मिलेगी. तो बता दें कि स्पोर्ट्स इंजीनियर को खेल कंपनियों, इंटरनेशनल ब्रांड के साथ प्रोफेशनल टीमें हायर करती हैं.
मिलेगी इतनी सैलरी
इसमें न केवल आपको सीखने का मौका मिलेगा बल्कि कई अन्य फायदे भी मिलेंगे. जो लोग इस फील्ड में करियर बनाते हैं उन्हें शुरुआती पैकेज लगभग 8 से 12 लाख रुपये सालाना हो सकता है. वहीं, अगर आप बड़े ब्रांड के साथ काम करते हैं, तो ये आंकड़ा 25 से 40 लाख रुपये सालाना तक पहुंच सकता है.