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1 करोड़ जोड़े और 45 की एज में छोड़ दी कॉर्पोरेट जॉब! जान‍िए- कैसे इस शख्स ने क‍िया सब प्लान? 

भारत के मेट्रो शहरों में काम करने वाले युवाओं के बीच 40 की उम्र में रिटायरमेंट लेने का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है. बिजनेस टुडे की एक खास रिपोर्ट के मुताबिक, यह सिर्फ काम छोड़ने का ट्रेंड नहीं है, बल्कि अपनी जिंदगी और समय पर खुद का हक वापस मांगने की एक जंग है.

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40 की उम्र में रिटायरमेंट... आजादी, सपना या कोई तगड़ी प्लानिंग?
40 की उम्र में रिटायरमेंट... आजादी, सपना या कोई तगड़ी प्लानिंग?

'40 की उम्र में नौकरी छोड़ दो, किसी सुकून वाली जगह शिफ्ट हो जाओ और आराम से जिंदगी जियो...' सुनने में ये किसी सपने जैसा लगता है, है ना? लेकिन क्या 40 या 45 की उम्र में कॉरपोरेट लाइफ को अलविदा कहना वाकई इतना आसान है?

इसी साल विप्रो और कॉग्निजेंट के पूर्व एचआर एग्जीक्यूटिव अमित चिल्का की कहानी इंटरनेट पर खूब वायरल हुई थी. अमित ने 45 साल की उम्र में पुणे का भागदौड़ भरा कॉरपोरेट करियर छोड़कर करीब एक करोड़ रुपये के कॉर्पस के साथ देहरादून जाने का फैसला किया. उन्होंने अपना मासिक खर्च 1.5 लाख रुपये से घटाकर 50 हजार रुपये कर लिया और कंसल्टिंग व कोचिंग के जरिए कमाई जारी रखी. कुछ लोगों ने इसे 'फाइनेंशियल फ्रीडम' कहा तो कुछ ने 'बेवकूफी'.

लेकिन सवाल सिर्फ अमित चिल्का का नहीं है. भारत के मेट्रो शहरों में काम करने वाले युवाओं के बीच 40 की उम्र में रिटायरमेंट लेने का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है. बिजनेस टुडे की एक खास रिपोर्ट के मुताबिक, यह सिर्फ काम छोड़ने का ट्रेंड नहीं है, बल्कि अपनी जिंदगी और समय पर खुद का हक वापस मांगने की एक जंग है.

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बर्नआउट, 'क्वाइट क्विटिंग' और बदलती सोच
आखिर युवा इतनी जल्दी रिटायरमेंट क्यों चाहते हैं? BT से बातचीत में मर्सर इंडिया की करियर लीडर मानसी सिंघल बताती हैं कि महामारी के बाद से काम को लेकर लोगों की सोच पूरी तरह बदल गई है. मर्सर की 'ग्लोबल टैलेंट ट्रेंड्स 2026' रिपोर्ट के मुताबिक, केवल 44% कर्मचारी ही आज अपने काम से संतुष्ट या खुश महसूस कर रहे हैं, जो 2024 में 66% था.

मानसी सिंघल का कहना है कि युवा काम करना बंद नहीं करना चाहते, बल्कि वे उस 'मजबूरी' से बाहर निकलना चाहते हैं जो उन्हें दिन-रात एक घिसे-पिटे ढर्रे में बांधकर रखती है. भारत में 45% लोग अब इस बात को तवज्जो दे रहे हैं कि उन्हें कब और कहां से काम करना है, इसकी आजादी मिले.

40 की उम्र में रिटायर होने के लिए कितना पैसा चाहिए?
इमोशनली 40 में रिटायर होना जितना आकर्षक लगता है, इसका आर्थिक गणित उतना ही कठोर है. मशहूर फाइनेंशियल एजुकेटर मोनिका हालन का मानना है कि लोग अक्सर रिटायरमेंट के लिए जरूरी फंड का सही अंदाजा नहीं लगा पाते. उनके मुताबिक, रिटायरमेंट के बाद आने वाली महंगाई और मेडिकल खर्च इंसान की पूरी जमापूंजी खत्म कर सकते हैं.

तो फिर आखिर कितना फंड काफी है? ट्रस्ट म्यूचुअल फंड के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर (CIO) मिहिर वोरा ने इसका एक आसान फॉर्मूला समझाया है. 

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400X फॉर्मूला: मिहिर वोरा के मुताबिक, अगर हम 8% का रिटर्न और 6-7% की महंगाई दर मानकर चलें, तो आपके पास आपके मासिक खर्च का कम से कम 400 गुना (400X) कॉर्पस होना चाहिए.

उदाहरण से समझें कि जैसे अगर आपका महीने का खर्च 1 लाख रुपये है, तो 40 की उम्र में रिटायर होने के लिए आपके पास कम से कम 4 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड होना अनिवार्य है.

600X की जरूरत कब?: अगर महंगाई 10% के आसपास पहुंचती है या लाइफस्टाइल खर्च बढ़ते हैं, तो यह गणित 400X से बढ़कर 600X (यानी 6 करोड़ रुपये) तक पहुंच सकता है.

अतिरिक्त इमरजेंसी फंड: इस 4 करोड़ या 6 करोड़ में बच्चों की पढ़ाई, शादी, कार बदलना, घर की मरम्मत और माता-पिता के अचानक आने वाले मेडिकल खर्च शामिल नहीं हैं. उनके लिए अलग से बफर फंड होना चाहिए.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
मीडिया एग्जीक्यूटिव और 'अंतर वेलनेस' के फाउंडर अंकित वेंगुरलेकर का कहना है कि कॉरपोरेट जॉब छोड़ना सिर्फ पैसों का फैसला नहीं है, बल्कि यह मानसिक रूप से तैयार होने का खेल है. वे सलाह देते हैं कि फुल-टाइम जॉब छोड़ने से पहले आपके पास कम से कम 12 से 24 महीने का इमरजेंसी फंड होना चाहिए ताकि अगले महीने के बिलों का खौफ न रहे.

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वहीं 'हैबिल्ड' के फाउंडर और फिटनेस गुरु सौरभ बोथरा का मानना है कि असली समस्या काम से नहीं, बल्कि हमारे दिमाग के तनाव से है. उनका कहना है, 'अगर आपका दिमाग शांत है, तो आप लंबे समय तक काम कर सकते हैं. फाइनेंशियल स्टेबिलिटी के बिना मिली आजादी बहुत जल्द बड़े तनाव में बदल जाती है.' 

सच कहा जाए तो 40 की उम्र में रिटायरमेंट का मतलब घर बैठकर टीवी देखना या छुट्टियां मनाना नहीं है. इसका असली मतलब है 'फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस' यानी इतनी आर्थिक मजबूती हासिल कर लेना कि आपको मजबूरी में कोई ऐसा काम न करना पड़े जो आपकी मानसिक शांति छीन रहा हो. इसलिए अगर आप भी 40 में रिटायर होने का सपना देख रहे हैं, तो पहले अपनी बैलेंस शीट दुरुस्त कीजिए, फिर कदम बढ़ाइए!

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