भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में ऑफिसर बनने का सफर आसान नहीं होता है. छात्रों को पहले परीक्षा पास करनी होती है और फिर 3 साल के लिए नेशनल डिफेंस एकेडमी और इंडियन मिलिट्री एकेडमी में ट्रेनिंग करनी होती. लेकिन बता दें कि असली परीक्षा केवल पेपर पास नहीं इंटरव्यू है. अक्सर लोगों को ऐसा लगता है कि सैन्य अकादमियों में केवल कड़ी ट्रेनिंग और पढ़ाई ही होती है पर ऐसा नहीं है. कैडेट्स जब अपनी ट्रेनिंग ले रहे होते हैं, तब भी सरकार उन्हें हर महीने बेहतरीन सैलरी यानी स्टाइपेंड देती है?
ट्रेनिंग के दौरान मिलता है इतना स्टाइपेंड
बता दें कि 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक, सेना के कैडेट्स को हर महीने निश्चित मासिक स्टाइपेंड दिया जाता है. जब कोई कैडेट 3 साल की इस ट्रेनिंग के आखिरी साल में होता है, तो उसे हर महीने 56,100 रुपये का स्टाइपेंड मिलता है. यह पे-मैट्रिक्स के लेवल 10 के आधार पर तय की जाती है.
स्टाइपेंड से भी होती है कटौती
भले ही उम्मीदवारों को हर महीने 56,100 रुपये का स्पाइपेंड मिलता है लेकिन पूरे पैसे उनके हाथ में नहीं जाते हैं. इसमें से कुछ कटौतियां भी होती हैं.
आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड (AGIF)- उम्मीदवारों की सुरक्षा के लिए एक अनिवार्य बीमा कवर होता है जिसका प्रीमियम 7 से 8 हजार रुपये होता है, जो स्पाइपेंड से ही काटा जाता है.
अकादमी के खर्च- इसमें उम्मीदवारों की ग्रूमिंग, हेयरकट, लॉन्ड्री समेत अन्य जरूरतों के लिए कटौती की जाती है.
खाना और रहना होता है मुफ्त
सभी कटौतियों के बाद कैडेट्स को उनके पर्सनल खर्चों के लिए करीब 10 से 15 हजार रुपये ही मिलते हैं. लेकिन बता दें कि उम्मीदवारों का रहना, खाना, वर्दी और इलाज सरकार की ही जिम्मेदारी होती है.
ट्रेनिंग के बाद मिलते हैं अच्छे पैसे
जैसे ही उम्मीदवारों की ट्रेनिंग खत्म हो जाती है और वो पोस्टिंग के बाद ऑफिसर बनते हैं, तो उन्हें सैलरी मिलनी शुरू हो जाती है. 56,100 रुपये से ये आंकड़ा 1 लाख रुपये प्रति माह तक पहुंच जाता है.