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US-ईरान में सीजफायर... जान‍िए- युद्ध के बाद किस फील्ड में बढ़ती है वर्क फोर्स की मांग?

दुनिया में युद्ध कही भी हो उसका असर सिर्फ सीमाओं तक ही सीमित नहीं रहता बल्कि इसका सीधा प्रभाव अर्थव्यवस्था और रोजगार पर भी पड़ता है. दिलचस्प बात यह है कि जहां युद्ध के दौरान कई क्षेत्रों में नौकरियां घटती हैं वहीं, युद्ध खत्म होने के बाद कुछ सेक्टर में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होते हैं.

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युद्ध खत्म होने के बाद इन सेक्टरों में बढ़ती है नौकरी.(Photo: ITG)
युद्ध खत्म होने के बाद इन सेक्टरों में बढ़ती है नौकरी.(Photo: ITG)

दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ते युद्ध और खासकर ईरान में जारी युद्ध दुनिया भर में कई सवाल खड़े कर रहे हैं. हालांकि, सीजफायर का ऐलान कर दिया गया है. युद्ध के बाद सिर्फ देश की सीमाएं ही नहीं बदलती बल्कि रोजगार और अवसरों का नक्शा भी पूरी तरह से बदल जाता है. हाल ही में ईरान में जारी युद्ध ने यह सवाल एक बार फिर चर्चा में ला दिया है कि जब संघर्ष थमता है, तो कौन‑कौन से सेक्टर में सबसे ज्यादा नई नौकरियों की बाढ़ देखने को मिलती है. चाहे बुनियादी ढांचा हो या स्वास्थ्य सेवाएं, युद्ध के बाद रोजगार के नए अवसर खोलते हैं और अच्छे मौके भी मिलते हैं. 

क्यों युद्ध के बाद बढ़ती हैं नौकरियां?

युद्ध के कारण बुनियादी ढांचा, उद्योग, स्वास्थ्य सेवाएं और अर्थव्यवस्था पर कड़ा प्रहार होता है जिसके बाद वे प्रभावित होते हैं. ऐसे में युद्ध समाप्त होने के बाद पुनर्निर्माण और विकास कार्यों के चलते कई सेक्टर में तेजी से भर्ती शुरू होती है. 

इन फील्ड में आती है नौकरियों की बाढ़ 

इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन सेक्टर

युद्ध के दौरान सड़कों, पुलों, इमारतों और सरकारी ढांचे को भारी  नुकसान पहुंचता है. युद्ध खत्म होने के बाद बड़े स्तर पर रीबिल्डिंग प्रोजेक्ट्स शुरू होते हैं जिसमें इंजीनियर, मजदूर, आर्किटेक्ट और प्रोजेक्ट मैनेजर की मांग तेजी से बढ़ती है. 

हेल्थ सेक्टर 

युद्ध के दौरान या उसके बाद हजारों लोग घायल होते हैं जिन्हें इलाज की जरूरत होती है. इसके लिए डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की मांग बढ़ती है. साथ ही जब लोग युद्ध में फंसे होते हैं या देखते हैं तो उनके दिमाग पर गलत असर पड़ता है जिसके लिए उन्हें मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की भी जरूरत पड़ती है जिनकी डिमांड बढ़ जाती है. 

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लॉजिस्टिक और सप्लाई चेन 

युद्ध के बाद राहत सामग्री और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए सप्लाई चेन को मजबूत करना होता है ताकि सामान हर किसी तक पहुंच जाए जिसके लिए ट्रांसपोर्ट, वेयरहाउस और डिस्ट्रीब्यूशन में नौकरियां बढ़ती हैं. 

मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्री

युद्ध के दौरान देश में उत्पादन ठप हो जाता है और युद्ध खत्म होने के बाद इसे फिर से शुरू करना होता है जिसके लिए फैक्ट्रियों में कामगारों और तकनीकी स्टाफ की मांग बहुत तेजी से बढ़ती है. 

आईटी और कम्युनिकेशन सेक्टर

डिजिटल सिस्टम, नेटवर्क और कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को दोबारा से स्थापित करना पड़ता है जिसके लिए साइबर सिक्योरिटी, नेटवर्किंग और सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल्स की नौकरियां तेजी से बढ़ती है. 

बैंकिंग और फाइनेंस 

पुनर्निर्माण और निवेश के लिए फंडिंग जरूरी होती है जिसके लिए बैंकिंग, इंश्योरेंस और फाइनेंस सेक्टर में प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ती है. 

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