सफलता के पीछे केवल एक ऑफर लेटर नहीं होता है बल्कि सालों की मेहनत, सीखने की जिद और खुद को बेहतर बनाने के जनून भी शामिल होता है. रांची से शुरू हुआ कुशाग्र सहाय का सफर भी कुछ ऐसा ही है. बीआईटी मेसरा से पढ़ाई करने वाले कुशाग्र को लिंक्डइन से 1.4 करोड़ रुपये का ऑफर मिला है, लेकिन उनके लिए यह उपलब्धि सिर्फ एक बड़े पैकेज की कहानी नहीं, बल्कि लगातार मेहनत, शानदार प्रोजेक्ट्स और कंप्यूटर साइंस की गहरी समझ का परिणाम है. हालांकि, अपने सफलता से वह सुर्खियां बटोर रहे हैं लेकिन उनके लिए सफलता की परिभाषा कुछ और ही है. उनके हिसाब से केवल पैकेज के पीछे भागना ही सफलता नहीं है बल्कि नए अवसरों के लिए स्किल सीखना ज्यादा अहम है.
कुशाग्र कहते हैं कि अच्छी समझ, समस्या हल करने की क्षमता, अच्छे प्रोजेक्ट्स पर काम और लगातार सीखते रहना ही सफलता की असली कुंजी है. उनके मुताबिक, सिर्फ कोर्स पूरा करना लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि खुद को लगातार बेहतर बनाना जरूरी है.
एडमिशन लेने के बाद इन बातों पर कुशाग्र ने इन बातों पर दिया ध्यान
कुशाग्र ने जब बीआईटी मेसरा में एडमिशन लिया, तो उन्होंने बड़ी टेक कंपनियों में काम कर रहे सीनियर्स से सलाह ली. सभी ने उन्हें एक ही बात बताई अच्छा सीजीपीए बनाए रखें, डेटा स्ट्रक्चर और एल्गोरिदम (डीएसए) की अच्छी समझ विकसित करें, कंप्यूटर साइंस के बेसिक्स मजबूत करें और अच्छे प्रोजेक्ट्स पर काम करें. इस सलाह का पालन कुशाग्र ने मेहनत के साथ किया. उन्होंने कोडिंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया, जूनियर छात्रों की मदद की और सिर्फ कक्षा के असाइनमेंट तक सीमित रहने के बजाय ऐसे सॉफ्टवेयर बनाए, जिनका इस्तेमाल असली यूजर्स कर सकें.
कई प्रोजेक्ट्स पर किया काम
कुशाग्र ने कॉलेज के दौरान कई उपयोगी प्रोजेक्ट्स पर काम किया है. इनमें उनकी आवासीय सोसायटी के लिए बनाया गया हाउसिंग मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म और बीआईटी मेसरा के कंप्यूटर साइंस विभाग के लिए तैयार किया गया एक शैक्षणिक प्रबंधन प्लेटफॉर्म शामिल था.
वह बताते हैं कि इंटरव्यू के दौरान उनसे इन प्रोजेक्ट्स को बनाने के पीछे की सोच, डेटाबेस की कार्यप्रणाली और एप्लिकेशन को बड़े स्तर पर कैसे चलाया जा सकता है समेत कई सवाल किए गए हैं.
सफलता के पहले के रिजेक्शन
कुशाग्र का ये सफर केवल मेहनत ही नहीं रिजेक्शन ने भी भरा हुआ है. वह गूगल के इंटर्नशिप इंटरव्यू के आखिरी दौर तक पहुंचे, लेकिन उन्हें ऑफर नहीं मिल पाया. कुशाग्र बताते हैं कि यह अनुभव निराशाजनक था और उस समय उन्हें सेल्फ डाउट भी होने लगा. हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी तैयारी जारी रखी. इसके बाद उन्होंने एक और इंटर्नशिप की और बाद में लिंक्डइन में इंटर्नशिप का मौका मिला, जो आगे चलकर प्री-प्लेसमेंट ऑफर में बदल गया.
कैसा रहा लिंक्डइन का इंटरव्यू?
लेकिन फिर जब बात लिंक्डइन पर आई तो, उन्होंने बताया कि यहां पर हायरिंग प्रोसेस में ऑनलाइन कोडिंग टेस्ट, डेटा स्ट्रक्चर और एल्गोरिदम (डीएसए) से जुड़े इंटरव्यू और प्रोजेक्ट्स, कंप्यूटर साइंस के बेसिक्स और व्यवहार से जुड़े सवालों वाला मैनेजरियल राउंड शामिल था. कुशाग्र के मुताबिक, सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा अपने प्रोजेक्ट्स के पीछे लिए गए इंजीनियरिंग फैसलों को बताना था. एक इंटरव्यू के दौरान एक इंटरव्यूअर ने उनके बनाए एप्लिकेशन को फोन पर खोलकर इस्तेमाल किया और फिर उसके बैकएंड आर्किटेक्चर, स्केलेबिलिटी और डेटाबेस डिजाइन से जुड़े सवाल पूछे.
उनका कहना है कि इस अनुभव से उन्होंने सीखा कि उम्मीदवारों को अपने रिज्यूमे में लिखे हर प्रोजेक्ट की पूरी समझ होनी चाहिए.
इंजीनियरिंग छात्रों को उनकी सलाह
हालांकि, 1.4 करोड़ का पैकेज चर्चा का विषय बन गया है लेकिन कुशाग्र का कहना है कि छात्रों को केवल आंकड़ों के पीछे नहीं भागना चाहिए. उनके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के सीटीसी (CTC) को अक्सर लोग गलत समझ लेते हैं क्योंकि यह सिर्फ सालाना मिलने वाली सैलरी नहीं होती, बल्कि इसमें कई तरह के लाभ शामिल होते हैं.
उन्होंने आगे कहा कि पैकेज के पीछे मत भागिए, अपनी काबिलियत और लगातार सीखने की आदत पर ध्यान दीजिए.
इन क्षेत्रों में काम करने की सलाह
प्रोग्रामिंग: नई तकनीक सीखने से पहले प्रोग्रामिंग की बुनियादी समझ अहम है.
डीएसए: डेटा स्ट्रक्चर और एल्गोरिदम का नियमित अभ्यास करें.
कोर कंप्यूटर साइंस: ऑपरेटिंग सिस्टम, डीबीएमएस, कंप्यूटर नेटवर्क और ओओपी जैसे विषयों पर अच्छी पकड़ रखें.
प्रोजेक्ट्स: ऐसे प्रोजेक्ट बनाएं जो सच में परेशानियों को हल करने में मदद करें.
एआई: एआई का इस्तेमाल सीखने को आसान बनाने के लिए करें, अपनी सोच को उस पर निर्भर न बनाएं.
पढ़ाई और स्किल : अच्छा सीजीपीए बनाए रखें और साथ में व्यावहारिक स्किल भी विकसित करें.
मार्गदर्शन: सीनियर्स और प्रोफेसर्स से सीखें क्योंकि उनका अनुभव गलतियों से बचने में मदद कर सकता है.
साथियों का साथ: ऐसे लोगों के साथ रहें जो मेहनती, जिज्ञासु और सहयोगी हों.
कम्युनिकेशन: अपने विचार और काम को स्पष्ट तरीके से समझाना सीखें, क्योंकि इंटरव्यू में यह भी महत्वपूर्ण होता है.
करते रहे मेहनत: तैयारी सिर्फ प्लेसमेंट के समय नहीं बल्कि पूरे कॉलेज सफर में करते रहें.
असफलताओं से सीख: असफलताओं को सुधार का मौका मानें और आगे बढ़ते रहें.