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जब सेना के ट्रक राजभवन के बाहर पहुंचे और बढ़ गया भारत का एक राज्य, चीखता रह गया चीन

1975 की वह ऐतिहासिक सुबह जब भारतीय सेना के ट्रक गंगटोक के राजभवन पहुंचे. ब्रिगेडियर देपिंदर सिंह के नेतृत्व में सेना ने चोग्याल पैलेस घेर लिया. सिक्किम गार्ड्स को निहत्था कर दिया. चीन-नेपाल की आपत्ति के बावजूद 14 अप्रैल को रेफरेंडम हुआ जिसमें 97.55% लोगों ने भारत में विलय को मंजूरी दी. 16 मई 1975 को सिक्किम भारत का 22वां राज्य बन गया.

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सिक्किम के राजा पालन थोंडुप नामग्याल ने अमेरिकी होप कुक से शादी की. ये तस्वीर उनकी शादी के समारोह की है. होप पहली अमेरिकी नागरिक थी जिन्होंने एशियाई राजा से शादी की थी. (File Photo: Getty)
सिक्किम के राजा पालन थोंडुप नामग्याल ने अमेरिकी होप कुक से शादी की. ये तस्वीर उनकी शादी के समारोह की है. होप पहली अमेरिकी नागरिक थी जिन्होंने एशियाई राजा से शादी की थी. (File Photo: Getty)

1975 की वह ऐतिहासिक सुबह सिक्किम के लिए बदलाव की शुरुआत थी. गंगटोक शहर में सुबह-सुबह भारतीय सेना के ट्रक और जिप्सियां तेजी से राजभवन की ओर बढ़ रही थीं. सिक्किम के राजा पैलेस की खिड़की से बाहर देख रहे थे. कुछ ही देर में भारतीय थल सेना ने राजभवन की सुरक्षा अपने हाथ में ले ली.

सिक्किम गार्ड्स को निहत्था कर दिया गया. इस कार्रवाई के बाद कुछ ही हफ्तों में सिक्किम भारत का 22वां राज्य बन गया. चीन और नेपाल ने इस पर आपत्ति जताई लेकिन भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों और लोकतांत्रिक इच्छा को आगे बढ़ाया. आज सिक्किम भारत का अभिन्न अंग है. यह घटना भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है.

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सिक्किम का पुराना इतिहास और भारत से संबंध

सिक्किम एक छोटा हिमालयी राज्य था जो 17वीं शताब्दी से चोग्याल वंश द्वारा शासित था. ब्रिटिश काल में यह भारत का संरक्षित राज्य (प्रोटेक्टोरेट) बना. 1947 में भारत आजाद होने के बाद 1950 में सिक्किम को विशेष दर्जा मिला. भारत सिक्किम की रक्षा, विदेश नीति और संचार की जिम्मेदारी लेता था. 

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Sikkim Merger 1975
सिक्किम के राजा पालन थोंडुप नामग्याल और उनकी पत्नी होप कुक. (Photo: Getty)

सिक्किम के राजा पालन थोंडुप नामग्याल ज्यादा स्वतंत्रता चाहते थे. सिक्किम में नेपाली मूल के लोगों की संख्या बढ़ रही थी जो लोकतंत्र और भारत के साथ पूर्ण विलय चाहते थे. राजा मुख्य रूप से भूटिया-लेप्चा समुदाय पर निर्भर थे. 1970 के दशक में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी. 1973 में बड़े प्रदर्शन हुए जिसमें लोगों ने राजशाही खत्म करने और भारत के साथ मजबूत संबंध की मांग की.

1973-74 का राजनीतिक संकट और भारतीय हस्तक्षेप

1973 में सिक्किम में जन आंदोलन तेज हो गया. मुख्यमंत्री काजी ल्हेंदुप दोर्जी की पार्टी सिक्किम नेशनल कांग्रेस ने लोकतंत्र की मांग की. राजा ने विरोध किया. हिंसा बढ़ी और गंगटोक में गोलीबारी हुई. काजी ल्हेंदुप दोर्जी ने भारत से मदद मांगी. भारत सरकार ने स्थिति संभालने के लिए कदम उठाए.

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1974 में सिक्किम को एसोसिएट स्टेट का दर्जा दिया गया. सिक्किम असेंबली में 32 में से 31 सीटें काजी की पार्टी ने जीतीं. असेंबली ने भारत के साथ और मजबूत संबंध और लोकतांत्रिक सुधारों की प्रस्ताव पास किया. चोग्याल इससे नाखुश थे और कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि वे चीन की तरफ झुकाव रख रहे थे. भारत को डर था कि सिक्किम अगर अलग रहा तो चीन की तरफ से खतरा बढ़ सकता है क्योंकि सिक्किम चीन की सीमा से लगा हुआ है.

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Sikkim Merger 1975
1967 में इंदिरा गांधी के साथ सिक्किम के राजा-रानी. (Photo: AFP)

1975 की सुबह: भारतीय सेना का राजभवन पर नियंत्रण

अप्रैल 1975 में स्थिति और बिगड़ी. 9 अप्रैल 1975 की सुबह भारतीय थल सेना के ट्रक गंगटोक की सड़कों पर दौड़े. ब्रिगेडियर देपिंदर सिंह के नेतृत्व में तीन बटालियन तैनात की गईं. भारतीय सेना ने राजभवन को घेर लिया. सिक्किम गार्ड्स की संख्या सिर्फ 200-400 के आसपास थी. भारतीय सेना ने उन्हें निहत्था करने का ऑपरेशन शुरू किया. एक सेंट्री ने विरोध किया तो गोली लगने से उसकी मौत हो गई.

पूरा ऑपरेशन बहुत तेज था - सिर्फ 20 मिनट में सिक्किम गार्ड्स बिना हथियार के कर दिया. राजभवन की सुरक्षा अब भारतीय सेना के हाथ में थी. राजा बहुत नाराज थे लेकिन वो कुछ नहीं कर सकते थे. भारतीय सेना ने गंगटोक शहर पर भी नियंत्रण स्थापित कर लिया. इस कार्रवाई का मकसद था कि कोई हिंसा न फैले और लोकतांत्रिक प्रक्रिया सुचारू रूप से चले.

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कैसे भारतीय सेना ने सिक्किम पर नियंत्रण लिया  

भारतीय सेना का ऑपरेशन बहुत प्लान्ड था. 17 माउंटेन डिवीजन के सैनिक पहले से सिक्किम में तैनात थे. जब मुख्यमंत्री ने भारतीय हस्तक्षेप की मांग की तो सेना को आदेश मिला. ट्रक और जिप्सियों से सैनिक राजभवन पहुंचे. पैलेस गार्ड्स को सरप्राइज अटैक में घेर लिया गया. हथियार छीन लिए गए. 

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Sikkim Merger 1975

एक गार्ड की मौत के अलावा ज्यादा हिंसा नहीं हुई. सेना ने पैलेस की सुरक्षा संभाल ली. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि उस समय सिक्किम में 20,000 से 40,000 भारतीय सैनिक मौजूद थे जबकि सिक्किम की आबादी सिर्फ 2 लाख के आसपास थी. इस नियंत्रण के बाद स्थिति शांत हुई. चोग्याल को घर में रखा गया लेकिन वे अब कोई फैसला नहीं ले सकते थे.

रेफरेंडम और सिक्किम का भारत में विलय

राजभवन पर नियंत्रण के कुछ दिन बाद 14 अप्रैल 1975 को जनमत संग्रह कराया गया. इसमें सिक्किम के लोगों से पूछा गया कि क्या वे राजशाही खत्म करके भारत के साथ पूर्ण विलय चाहते हैं. आधिकारिक नतीजों में 97.55% लोगों ने हां कहा. वोटिंग प्रतिशत करीब 63% था. भारत सरकार ने इसे लोकतांत्रिक फैसला माना. 

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10 अप्रैल को असेंबली ने प्रस्ताव पास किया कि राजा की संस्था खत्म हो और सिक्किम भारत का हिस्सा बने. भारतीय संसद ने 26 अप्रैल 1975 को 36वें संविधान संशोधन को मंजूरी दी. राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने 15 मई को इसे मंजूर किया. 16 मई 1975 को सिक्किम भारत का 22वां राज्य बन गया. पहला गवर्नर बी.बी. लाल नियुक्त किया गया.

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चीन और नेपाल की आपत्ति

चीन ने सिक्किम के विलय को अवैध कब्जा बताया. इसे मानने से इनकार कर दिया. चीन ने कहा कि यह जनता की इच्छा नहीं बल्कि भारतीय सेना का दबाव है. नेपाल ने भी चुप्पी साध ली या हल्की आपत्ति जताई लेकिन ज्यादा विरोध नहीं किया. राजा की पत्नी होप कुक और बेटे ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध किया. लेकिन भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कहा कि यह सिक्किम की जनता की इच्छा है. बाद के सालों में चीन ने भी व्यावहारिक रूप से सिक्किम को भारत का हिस्सा मान लिया.

आज सिक्किम भारत का गौरव

आज सिक्किम भारत का एक शांतिपूर्ण, सुंदर और प्रगतिशील राज्य है. लोकतंत्र यहां मजबूत है. शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन में अच्छी प्रगति हुई है. 1975 की घटना को कुछ लोग विलय कहते हैं तो कुछ कब्जा. इतिहासकारों के अनुसार यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और सिक्किम की जनता की लोकतांत्रिक आकांक्षा का मिला-जुला परिणाम था.

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