रूस के रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को घोषणा की कि उसने यूक्रेन पर अपनी नई इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) ओरेश्निक (Oreshnik) का इस्तेमाल किया है. यह मिसाइल का युद्ध में दूसरी बार उपयोग है. पहली बार नवंबर 2024 में डिनप्रो शहर पर हमला किया गया था.
इस बार हमला यूक्रेन के पश्चिमी ल्विव क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अंडरग्राउंड गैस स्टोरेज फैसिलिटी पर हुआ, जिससे क्षेत्र में गैस सप्लाई प्रभावित हुई. रूस ने इसे बदले की कार्रवाई बताया, जबकि यूक्रेन और अमेरिका ने रूसी दावों को खारिज किया.
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यहां नीचे देखें हमले का वीडियो
हमला कब और क्यों हुआ?
रूस के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह हमला पिछले महीने (दिसंबर 2025) यूक्रेन द्वारा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निवास स्थान पर ड्रोन हमले का बदला था. रूस ने दावा किया कि यूक्रेन ने पुतिन के नवगोरोड क्षेत्र वाले घर पर हमला करने की कोशिश की थी. लेकिन यूक्रेन ने इसे पूरी तरह नकार दिया है, और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा कि ऐसा कोई हमला नहीं हुआ.
हमले का समय: 8-9 जनवरी 2026 की रात को बड़ा हमला हुआ, जिसमें 242 ड्रोन और 36 मिसाइलें शामिल थीं. इनमें ओरेश्निक मिसाइल भी थी.
टारगेट: रूस ने कहा कि क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर (महत्वपूर्ण ढांचा) को निशाना बनाया. लोकल मीडिया और रूसी ब्लॉगर्स के अनुसार स्ट्राई (Stryi) शहर के पास अंडरग्राउंड गैस स्टोरेज फैसिलिटी हिट हुई. यह यूक्रेन की सबसे बड़ी गैस स्टोरेज साइट्स में से एक है, जो ल्विव शहर से 66 किमी और पोलैंड बॉर्डर से 75 किमी दूर है.
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असर: हमले के बाद ल्विव ओब्लास्ट में गैस प्रेशर गिर गया. कई इलाकों में गैस सप्लाई लगभग बंद हो गई. यूक्रेन की एयर फोर्स ने पुष्टि की कि मिसाइल बैलिस्टिक अपनी ट्रैजेक्टरी पर 13000 किमी/घंटा की स्पीड से उड़ी. यह हमला ठंड के मौसम में यूक्रेन की एनर्जी सप्लाई को नुकसान पहुंचाने की रणनीति का हिस्सा लगता है.
ओरेश्निक मिसाइल की विशेषताएं
ओरेश्निक (रूसी में हेजल ट्री) रूस की सबसे आधुनिक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल है. यह RS-26 रुबेज या यार्स ICBM की तकनीक पर आधारित है. मुख्य विशेषताएं...
यह मिसाइल रूस की नई पीढ़ी की हथियार है, जो पश्चिमी देशों को चेतावनी देने के लिए बनाई गई है.

हमले का प्रभाव और चिंताएं
ओरेश्निक का इस्तेमाल रूस की तकनीकी ताकत दिखाने और यूक्रेन की एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को कमजोर करने की कोशिश है. लेकिन यह युद्ध को और खतरनाक बना सकता है. आने वाले दिनों में और हमलों की आशंका है.