पाकिस्तान वायुसेना (PAF) ने 3 जनवरी को स्वदेशी रूप से विकसित तैमूर (Taimoor) एयर लॉन्च्ड क्रूज मिसाइल का सफल फ्लाइट टेस्ट किया. इंटर-सर्विसेस पब्लिक रिलेशंस (ISPR) ने इसे राष्ट्रीय एयरोस्पेस और रक्षा क्षमताओं में एक बड़ा मील का पत्थर बताया. यह मिसाइल दुश्मन के हवाई क्षेत्र में घुसे बिना गहरे अंदर लक्ष्यों पर सटीक हमला कर सकती है. हालांकि सोशल मीडिया पर खबरें चल रही हैं कि मिसाइल ने अपना टारगेट मिस कर दिया.
तैमूर मिसाइल की विशेषताएं
तैमूर एक आधुनिक सबसॉनिक क्रूज मिसाइल है, जो लड़ाकू विमान से लॉन्च की जाती है. इसकी मुख्य खूबियां...
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यह मिसाइल यूरोपीय स्टॉर्म शैडो/स्कैल्प (SCALP) की तरह है, जिसे भारत राफेल लड़ाकू विमानों पर इस्तेमाल करता है. तैमूर को भारत की इसी मिसाइल का मुकाबला करने के लिए देखा जा रहा है. परीक्षण में मिसाइल ने सफलतापूर्वक अलग हुई, इंजन स्टार्ट किया, उड़ान भरी और लक्ष्य को हिट किया. पर जो वीडियो सोशल मीडिया पर पड़े हैं, उसमें मिसाइल टारगेट मिस करती दिख रही है.
परीक्षण की डिटेल और प्रतिक्रियाएं
परीक्षण वरिष्ठ वायुसेना अधिकारियों, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की मौजूदगी में हुआ. एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्दू ने टीम की तारीफ की और कहा कि यह तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है.
राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बधाई दी. यह मिसाइल पाकिस्तान वायुसेना की कन्वेंशनल डिटरेंस (सामान्य युद्ध निरोध) और ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी को बढ़ाएगी.
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भारत की स्कैल्प मिसाइल से तुलना
उपयोगकर्ता ने भारत की स्कैल्प सिस्टम का जिक्र किया, जो फ्रांस की MBDA कंपनी की बनाई है. भारत ने राफेल सौदे में यह मिसाइल खरीदी (अरबों डॉलर खर्च). स्कैल्प भी 500-600 किमी रेंज वाली, लो-एल्टीट्यूड उड़ान करने वाली और स्टेल्थ फीचर्स वाली है. पाकिस्तान तैमूर को स्वदेशी विकसित करके कम लागत में समान क्षमता हासिल कर रहा है.
तैमूर को JF-17, J-10CE या मिराज जैसे विमानों पर इंटीग्रेट किया जाएगा. यह पाकिस्तान की लंबी दूरी की सटीक हमले की क्षमता को मजबूत करेगा. दक्षिण एशिया में रक्षा संतुलन पर इसका असर पड़ेगा, क्योंकि भारत भी अपनी मिसाइलें (जैसे ब्रह्मोस, प्रलय) विकसित कर रहा है.