एक साल बाद इजरायल का माहौल पूरी तरह बदल चुका है. जून 2025 में 12 दिन चले ईरान-इजरायल युद्ध के दौरान ईरान ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं. फिर फरवरी 2026 में ऑपरेशन एपिक फ्यूरी और राइजिंग लायन में फिर से भारी लड़ाई हुई.
40 दिनों की जंग के बाद फिलहाल युद्धविराम है, लेकिन पूरे इजरायल में अनिश्चितता और चिंता का माहौल है. अमेरिका का कहना है कि ईरान के साथ शांति समझौते की बातचीत अच्छी चल रही है, लेकिन इजरायल सतर्क है और कह रहा है कि किसी भी खतरे के खिलाफ वह अपना रुख सुरक्षित रखता है.
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यरुशलम: इतिहास, धर्म और सुरक्षा का अनोखा शहर
मैंने अपनी रिपोर्टिंग यरुशलम से शुरू की, जो दुनिया का सबसे अनोखा शहर है जहां इतिहास, धर्म और सुरक्षा एक साथ जुड़े हुए हैं. शहर की पुरानी इमारतों पर सफेद पत्थरों की एक समान परत है, जिस वजह से इसे 'सुनहरे शहर' के नाम से भी जाना जाता है.

पुराने शहर में जाफा गेट से प्रवेश करते ही सदियों पुरानी दीवारें, संकरी गलियां और हर जगह सुरक्षा बल नजर आते हैं. अक्टूबर 2023 के हमास हमलों के बाद से यह शहर पश्चिम एशिया के संकट का केंद्र बना हुआ है. फिलहाल युद्धविराम है, लेकिन यहां का माहौल सतर्क और तनावपूर्ण है. आमतौर पर पर्यटकों से भरी रहने वाली गलियां अब अपेक्षाकृत सुनसान हैं.
युद्ध का पर्यटन और व्यवसायों पर असर
पुराने शहर के बाजार क्षेत्र में घूमते हुए साफ दिखता है कि युद्ध ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को गहरी चोट पहुंचाई है. एक बुजुर्ग दुकानदार ने बताया कि युद्ध से पहले शाम को यह गली लोगों से भरी रहती थी. अब कई घंटों तक इंतजार करना पड़ता है, फिर भी मुट्ठी भर पर्यटक ही आते हैं.
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एक कैफे मालिक ने कहा कि तीर्थयात्री और विदेशी पर्यटक कम आने से उनका कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है. लोग डरते हैं कि उड़ानें रुक सकती हैं या फिर हमले हो सकते हैं. पर्यटन यहां हमारी रोटी-रोटी का साधन है. सुरक्षा जांच कड़ी हो गई है. महत्वपूर्ण जगहों पर सशस्त्र जवान तैनात हैं. अनिश्चितता अब लोगों के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन गई है.
माउंट ऑफ ऑलिव्स: शहर का व्यापक नजारा
माउंट ऑफ ऑलिव्स से पूरा यरुशलम नजर आता है. यहां से अल-अक्सा मस्जिद का सुनहरा गुंबद, प्राचीन चर्च, यहूदी कब्रिस्तान और ऐतिहासिक इलाके एक साथ दिखते हैं. यह शहर यहूदियों, मुसलमानों और ईसाइयों तीनों के लिए पवित्र है.

लेकिन आध्यात्मिक सुंदरता के नीचे चिंता साफ झलकती है. स्थानीय लोग धीरे-धीरे मिसाइल अलर्ट, क्षेत्रीय तनाव और आगे युद्ध फैलने की आशंका की बात करते हैं. एक युवा निवासी ने कहा कि यरुशलम ने हमेशा संघर्ष झेला है, लेकिन लोग अब थक चुके हैं. चाहे वे यहूदी हों, मुसलमान हों या ईसाई - सबको स्थिरता चाहिए.
होली सेपुलच्रे चर्च: युद्ध के निशान और अटूट आस्था
ईसाइयों के लिए बेहद पवित्र चर्च ऑफ द होली सेपुलच्रे में युद्ध के निशान अभी भी मौजूद हैं. चर्च अधिकारियों ने बताया कि ईरानी मिसाइल हमले के दौरान यहां शार्पनेल से कुछ जगहों को नुकसान पहुंचा था, भले ही ईरान ने धार्मिक स्थलों को निशाना न बनाने का दावा किया था.
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फिर भी प्रार्थनाएं बिना रुके जारी हैं. तीर्थयात्री मोमबत्तियां जला रहे हैं और पुजारी सेवाएं चला रहे हैं. यूरोप से आए एक तीर्थयात्री ने भावुक होकर कहा कि यहां नुकसान देखकर बहुत दुख होता है. यह जगह दुनिया के लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है. लेकिन लोग फिर भी आ रहे हैं क्योंकि आस्था डर से ज्यादा मजबूत है.

वेस्टर्न वॉल: प्रार्थना और विश्वास का केंद्र
दिन के अंत में मैं वेस्टर्न वॉल (कोटेल) पहुंची, जो यहूदियों का सबसे पवित्र प्रार्थना स्थल है. यहां युद्ध के बीच भी आस्था और देशभक्ति साथ दिखती है. लोग शांति, सुरक्षा और सीमा पर तैनात सैनिकों के लिए प्रार्थना कर रहे थे.
कई स्कूली लड़कियां इजरायली झंडे लेकर आई थीं. एक लड़की ने कहा कि हमें युद्ध नहीं चाहिए, लेकिन हम अपने सैनिकों पर भरोसा करते हैं. दूसरी ने कहा कि लोग यहां अनिश्चितता के साथ जीने के आदी हैं, लेकिन हमें विश्वास है कि जीवन फिर से सामान्य हो जाएगा.
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युद्धविराम के बीच अनिश्चितता
अमेरिका का कहना है कि ईरान के साथ शांति वार्ता अच्छी चल रही है, लेकिन इजरायल सतर्क है. वह लेबनान से आने वाले खतरे, खासकर हिजबुल्लाह के ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार अपने पास रखता है.

यरुशलम की सुनसान बाजार गलियां, कड़ी सुरक्षा, क्षतिग्रस्त इमारतें और लोगों की थकी हुई लेकिन मजबूत आवाजें बताती हैं कि यहां युद्ध सिर्फ समाचार नहीं, बल्कि रोजमर्रा की हकीकत है.
यरुशलम में आज भी आस्था मजबूत है, लेकिन लोग थक चुके हैं. युद्धविराम है, फिर भी शांति दूर दिखती है. बाजारों में सन्नाटा, प्रार्थना स्थलों पर निशान और लोगों की आंखों में उम्मीद और चिंता का मिश्रण - यह सब मिलकर बताता है कि इजरायल फिलहाल युद्धविराम और अनिश्चितता के बीच झूल रहा है.