भारतीय सेना ने स्वदेशी रूप से बनी 'एडवांस्ड 28-फीट हैवी ड्रॉप सिस्टम - 20T (टाइप V)' का सफलतापूर्वक सत्यापन परीक्षण पूरा कर लिया है. ये तकनीक भारतीय सेना को युद्ध के मैदान में उन इलाकों और ऊंचे पहाड़ों पर भारी युद्धक उपकरण तैनात करने की ताकत देगी, जहां पहुंचने के लिए सड़कें नहीं हैं.
राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में 'सेना एयरबोर्न ट्रेनिंग स्कूल' ने इस विशेष प्रणाली का सफल परीक्षण किया. ये परीक्षण इसलिए खास है क्योंकि ये 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत सेना की परिचालन क्षमताओं को युद्ध स्थितियों के करीब ले जाता है.
इस सिस्टम को JCBL ग्रुप की डिफेंस कंपनी (ADSL) और भारत की सरकारी लैब (ADRDE) ने मिलकर बनाया है. ये पूरी तरह से भारतीय तकनीक है. इसे सेना की विशेष जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है.
कम समय में दूरदराज इलाकों तक पहुंच
अक्सर सेना को ऊंचे पहाड़ों और दूरदराज के इलाकों में अचानक हथियारों की जरूरत पड़ती है. ये तकनीक उन संवेदनशील जगहों पर बहुत कम समय में अपनी मौजूदगी दर्ज करा पाएगी. तकनीकी रूप से देखें तो ये प्रणाली 20 टन तक के भारी पेलोड को नियंत्रित तरीके से हवाई मार्ग से सीधे जमीन पर उतारने की क्षमता रखती है.
यह भी पढ़ें: भारत को मिलेगी आयरन डोम की तकनीक! PM मोदी के इजरायल दौरे पर डिफेंस डील संभव
इसमें बीएमपी जैसे बख्तरबंद वाहनों और मैकेनाइज्ड कॉम्बैट प्लेटफॉर्म शामिल हैं. हालिया परीक्षण के दौरान, सेना ने 15 टन वजनी बीएमपी बख्तरबंद कार्मिक वाहक का एयर-ड्रॉप करके अपनी ताकत का प्रदर्शन किया.
इस पूरी प्रक्रिया में एक उन्नत 28-फीट प्लेटफॉर्म और दोहरे एक्सट्रैक्टर पैराशूट का इस्तेमाल किया गया, जो भारत में अपनी तरह की पहली क्षमता है. ये दोहरी प्रणाली भारी वजन को खींचने और हवा में स्थिरता बनाए रखने में बेहद कारगर साबित हुई है.
एडवांस्ड 28-फीट हैवी ड्रॉप सिस्टम की खूबियां
इस सिस्टम की सबसे बड़ी खूबी इसकी अनुकूलता है. ये भारतीय सेना के रणनीतिक परिवहन बेड़े, जैसे कि C-17 ग्लोबमास्टर III और C-130J विमानों के साथ पूरी तरह तालमेल बिठाता है. इसका मतलब ये है कि किसी भी इमरजेंसी या संघर्ष के दौरान, सेना अपने सबसे घातक हथियारों को बिना किसी देरी के एक जगह से दूसरी जगह भेज सकती है.
भारत के नाम नई सफलता
ये सफलता रक्षा के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को दिखाती है. ये पूरी दुनिया को संदेश देता है कि भारत अब जटिल सैन्य तकनीक बनाने में पूरी तरह सक्षम है. इस सफल परीक्षण के बाद भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास इतनी भारी मशीनरी को आसमान से उतारने की ताकत है.
यह भी पढ़ें: फ्रांस से भारत की ऐतिहासिक डिफेंस डील से उड़ेगी दुश्मनों की नींद, देखें 10 तक
ये नई तकनीक भारतीय सेना के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. विशेष रूप से चीन और पाकिस्तान जैसी चुनौतीपूर्ण सीमाओं पर यह सिस्टम सेना को अपने दुश्मनों के मुकाबले बहुत मजबूत बनाएगा.