ईरान में आंतरिक अशांति, विरोध प्रदर्शन और अमेरिका-इजरायल के साथ तनाव बढ़ने के बीच वैश्विक प्रेडिक्शन मार्केट्स (भविष्यवाणी बाजार) में ईरान से जुड़े दांव बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं. लोग स्टॉक या कमोडिटी पर नहीं, बल्कि युद्ध, रेजीम चेंज और लीडरशिप बदलाव पर लाखों-करोड़ों रुपये लगा रहे हैं.
भविष्यवाणी वाले ये बाजार जैसे Polymarket, Kalshi और Manifold हां-नहीं वाले कॉन्ट्रैक्ट्स पर काम करते हैं, जहां ट्रेडर्स भविष्य की घटनाओं पर दांव लगाते हैं. कीमतें मतलब किसी भी घटना के होने की संभावना दिखाती हैं.
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Polymarket पर सबसे ज्यादा चर्चा वाले दांव
अमेरिका ईरान पर जनवरी में हमला करेगा?
जनवरी 31 तक के बाजार में ट्रेडिंग वॉल्यूम 20 मिलियन डॉलर से ज्यादा पहुंच गया है. जनवरी अंत तक हमले की संभावना 65-70% तक दिख रही है (कुछ रिपोर्ट्स में 83% तक), जबकि जनवरी 31 तक इजरायल के हमले की संभावना 50% के आसपास है. जनवरी 18 या 23 जैसे छोटे डेटलाइन पर भी 40 मिलियन डॉलर से ज्यादा वॉल्यूम आया है.

अयातुल्लाह अली खामेनेई जनवरी 31 तक सुप्रीम लीडर नहीं रहेंगे?
इस पर 26 मिलियन डॉलर से ज्यादा ट्रेडिंग हुई है. संभावना 21-22% दिख रही है (कुछ बाजारों में 2026 अंत तक 65% तक पहुंच गई है). खामेनेई के बाहर होने की संभावना विरोध प्रदर्शनों और आर्थिक संकट से बढ़ रही है.
ये बाजार ईरान के विरोध प्रदर्शनों, आर्थिक संकट (रियाल की कीमत गिरावट) और ट्रंप प्रशासन की मैक्सिमम प्रेशर नीति से प्रभावित हैं. ट्रेडर्स न्यूज, सोशल मीडिया और अफवाहों के आधार पर दांव लगाते हैं. जैसे- अमेरिकी कैरियर ग्रुप की तैनाती या ईरान के एयरस्पेस बंद होने जैसी खबरों से संभावनाएं बदलती हैं.
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ये बाजार कैसे काम करते हैं?
ट्रेडर्स Yes या No शेयर खरीदते-बेचते हैं. अगर घटना होती है तो Yes शेयर 1 डॉलर देते हैं, नहीं तो 0. कीमत घटना की संभावना दिखाती है (जैसे 66¢ मतलब 66% चांस). ये विस्डम ऑफ द क्राउड पर आधारित हैं, यानी सामूहिक राय से सही अनुमान निकलता है.

आलोचना भी है
विशेषज्ञ कहते हैं कि ये बाजार अफवाहों, बड़े ट्रेडर्स (व्हेल) के मैनिपुलेशन और सोशल मीडिया प्रोपेगेंडा से प्रभावित हो सकते हैं. कभी-कभी ये सही भविष्यवाणी करते हैं (जैसे चुनाव), लेकिन कभी गलत भी होते हैं. अमेरिका में Kalshi रेगुलेटेड है, लेकिन Polymarket क्रिप्टो-बेस्ड होने से ग्रे एरिया में है.
ईरान संकट अब सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि ऑनलाइन जुआ का बड़ा विषय बन गया है. ट्रेडर्स संकट से पैसे कमा रहे हैं, जबकि दुनिया युद्ध के खतरे से चिंतित है. अगर हमला हुआ तो ग्लोबल ऑयल प्राइसेज आसमान छू सकती हैं.