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रूस को भी ब्रह्मोस देने की पेशकश, कंपनी बोली- मिसाइल सप्लाई को तैयार हैं

ब्रह्मोस भारत और रूस का ज्वाइंट प्रोडक्शन है. ब्रह्मोस एयरोस्पेस के मैनेजिंग डायरेक्टर अलेक्जेंडर मक्सिचेव ने कहा है कि अगर रूस की तरफ से कोई मांग आती है, तो कंपनी ऑर्डर पूरा करने के लिए तैयार हैं. ब्रह्मोस विश्व की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक है.

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ब्रह्मोस का प्रोडक्शन भारत और रूस मिलकर करते हैं. (Photo: Reuters)
ब्रह्मोस का प्रोडक्शन भारत और रूस मिलकर करते हैं. (Photo: Reuters)

भारत और रूस की रक्षा साझेदारी नए युग में प्रवेश करने वाली है. जिस ब्रह्मोस मिसाइल को भारत ने रूस के सहयोग से विकसित किया था उस ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल को अब रूस को निर्यात किया जाएगा. 

ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने कहा है कि वह रूसी नौसेना या थल सेना से सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल के ऑर्डर लेने के लिए तैयार है. अगर मॉस्को इसे खरीदता है तो भारत में आंशिक रूप से बनी यह मिसाइल प्रणाली उसके मूल टेक्नोलॉजी पार्टनर को ही वापस सप्लाई की जाएगी. अगर ऐसी कोई डील होती है तो यह एडवांस्ड डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में भारत की बढ़ती भूमिका को दिखाएगा. 

ब्रह्मोस एयरोस्पेस भारत और रूस का संयुक्त उद्यम है, इसकी स्थापना 1995 में DRDO और रूस की NPO Mashinostroyenia के बीच सहयोग से हुई थी. यह कंपनी विश्व की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस (मैक 2.8, 800 किमी रेंज) का डिजाइन, विकास, उत्पादन और मार्केटिंग करती है. इस कंपनी हेडक्वार्टर नई दिल्ली में है और ये कंपनी भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. 

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ब्रह्मोस मिसाइल जमीन, हवा और समुद्र से लॉन्च किए जाने वाले वर्जन में आती है और भारत ने इसे पहले ही अपनी जमीनी, हवाई और नौसेना में शामिल कर लिया है.   

रूस का ऐसा ऑर्डर 'मेक-इन-इंडिया' पहल के तहत देश में ही रक्षा उपकरण बनाने की भारत की कोशिशों को भी बढ़ावा देगा. 

ब्रह्मपुत्र और मोस्कवा नदियों के नाम पर बनी ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों में से एक है. पिछले साल पाकिस्तान के साथ हुई सैन्य झड़प ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने इसका इस्तेमाल बहुत असरदार तरीके से किया था. 

ब्रह्मोस के मैनेजिंग डायरेक्टर अलेक्जेंडर मक्सिचेव ने 'फ्लीट-2026' इंटरनेशनल नेवल सैलून के दौरान रूस की न्यूज एजेंसी तास को बताया, "अगर रूस की तरफ से कोई मांग आती है, तो हम ऑर्डर पूरा करने के लिए तैयार हैं. ये मिसाइलें या तो नेवी के लिए होंगी या फिर थल सेना के लिए."

मक्सिचेव ने कहा, "हमारे पास काफी क्षमता है और हम समझते हैं कि रूस क्या चाहता है."

शुरू में इस मिसाइल की रेंज 180 मील थी, लेकिन बाद में इसे ज़्यादा दूरी तक मार करने के लिए अपग्रेड किया गया.

फिलीपींस इन मिसाइलों का पहला विदेशी ग्राहक था, जिसने 2022 में 375 मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था. ब्रह्मोस मिसाइलों का पहला बैच अप्रैल 2024 में और दूसरा अप्रैल 2025 में सौंपा गया.

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मनीला को 180 मील की रेंज वाले सिस्टम की तीन बैटरी मिलेंगी. इस समझौते में लॉजिस्टिक्स सपोर्ट और ऑपरेटर्स के लिए ट्रेनिंग की व्यवस्था भी शामिल है.

इस महीने की शुरुआत में भारत ने पुष्टि की थी कि उसने वियतनाम को मिसाइलें सप्लाई करने के लिए एक डील की है. सिंगापुर में शांगरी-ला डायलॉग में भारत के एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी ने कहा कि इंडोनेशिया के साथ भी बातचीत अंतिम चरण में है. 

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