मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के बीच अमेरिकी नौसेना का एक शक्तिशाली जहाज USS Delbert D. Black (DDG-119) इजरायल के रेड सी बंदरगाह ईलात (Eilat) पर डॉक कर गया है. इजरायली सेना ने पुष्टि की कि यह पहले से प्लान किया गया दौरा है. IDF तथा अमेरिकी सेना के बीच चल रही सहयोग का हिस्सा है. हालांकि, यह घटना ईरान के साथ बढ़ते टकराव के संदर्भ में बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
USS Delbert D. Black क्या है?
यह Arleigh Burke-class गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर है. इसमें एजिस सिस्टम है, जो एयर डिफेंस, मिसाइल डिफेंस और क्रूज मिसाइल (टोमाहॉक) लॉन्च करने की क्षमता रखता है. यह जहाज हवाई हमलों, मिसाइलों और जहाजों से लड़ने के लिए डिजाइन किया गया है. जनवरी 2026 की शुरुआत में यह अमेरिका से डिप्लॉयमेंट पर निकला था. पहले यूरोप (मेडिटरेनियन) से गुजरा. फिर रेड सी में पहुंचा.
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ईलात बंदरगाह पर क्यों पहुंचा?
ईलात इजरायल का दक्षिणी रेड सी बंदरगाह है, जो गल्फ ऑफ अकाबा में स्थित है. अमेरिकी युद्धपोत अक्सर रेड सी क्षेत्र में गश्त करते हैं, लेकिन ईलात बंदरगाह पर डॉकिंग बहुत कम होती है. इजरायली मीडिया (जैसे JFeed और KAN) के अनुसार, यह अमेरिका-इजरायल के बीच समन्वय का हिस्सा है. यह दौरा ईरान के संकट के बीच हुआ, जहां अमेरिका अपनी मिलिट्री ताकत बढ़ा रहा है.

अमेरिका क्यों मिलिट्री एसेट्स बढ़ा रहा है?
जनवरी 2026 में ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हैं, जिसमें सैकड़ों मौतें हुई हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों की हत्या जारी रही या न्यूक्लियर प्रोग्राम बढ़ाया गया तो मैसिव अटैक होगा. ट्रंप ने कहा कि एक अर्माडा ईरान की ओर जा रहा है.
अमेरिका की हाल की तैनाती
USS Abraham Lincoln एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप (कई डेस्ट्रॉयर्स के साथ) मिडिल ईस्ट पहुंच चुका है. USS Delbert D. Black अब रेड सी में है, कुल 6 डेस्ट्रॉयर्स, 1 कैरियर और अन्य जहाज. F-15E फाइटर जेट्स जॉर्डन में तैनात. एयर डिफेंस बैटरी और टैंकर एयरक्राफ्ट बढ़ाए गए. कुल 35000+ अमेरिकी सैनिक मिडिल ईस्ट में.
यह बिल्डअप ईरान पर हमले की संभावना बढ़ाता है, खासकर न्यूक्लियर साइट्स या IRGC कमांडर्स पर. ईरान ने जवाबी हमले की धमकी दी है, जैसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शिपिंग रोकना या अमेरिकी बेस पर अटैक.
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रणनीतिक महत्व क्या है?
अभी हमला नहीं हुआ लेकिन स्थिति बहुत संवेदनशील है. अमेरिका कहता है कि यह डिफेंसिव और कोऑपरेटिव है लेकिन ईरान इसे धमकी मान रहा है.