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लखनऊ शूटआउट: पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से खुलासा- विवेक को ऊंची जगह से मारी गई गोली

यूपी की राजधानी लखनऊ में विवेक की हत्‍या मामले में पोस्‍टमॉर्टम रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी गई है. इस रिपोर्ट में कई अहम खुलासे हुए हैं.

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मृतक विवेक तिवारी की तस्‍वीर
मृतक विवेक तिवारी की तस्‍वीर

यूपी की राजधानी लखनऊ में एप्पल के सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की हत्या मामले में पुलिस-प्रशासन की भूमिका सवालों के घेरे में है. इस बीच विवेक की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी गई है. इस रिपोर्ट में जो खुलासे हुए हैं वो बेहद चौकाने वाले हैं.

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बताया गया है कि विवेक को चेहरे के बाईं तरफ प्वॉइंट - ब्लैंक रेंज से गोली मारी गई. रिपोर्ट के मुताबिक विवेक के शरीर में गोली ऊपर से नीचे की तरफ गई थी. इसका मतलब है कि किसी ऊंची जगह से या संभवतः गाड़ी के बोनट पर चढ़कर विवेक को गोली मारी गई थी.

रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि विवेक को काफी नजदीक से गोली मारी गई है. इसके अलावा विवेक की खोपड़ी के अंदर बुलेट पाई गई है,  यानी विवेक की मौत एक्‍सीडेंट की वजह से नहीं बल्कि गोली लगने की वजह से हुई है.

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बता दें कि पुलिस ने घटना के वक्त विवेक के साथ कार में मौजूद उनकी सहकर्मी सना के नाम से एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें बहुत की होशियारी के साथ ये साबित करने की कोशिश की गई थी कि पुलिस ने विवेक पर गोली ही नहीं चलाई. दोनों पुलिसवालों को बर्खास्त भी कर दिया गया है. वहीं पुलिस ने कल्पना की शिकायत के आधार पर एक और एफआईआर दर्ज की.

लखनऊ के गोमतीनगर थाने में दर्ज की गई एफआईआर में कल्‍पना ने कहा है, 'मेरे पति एप्पल कंपनी में कार्यरत थे, जिनकी हत्या प्रशांत चौधरी द्वारा की गई है और जिसकी जानकारी मेरे पति के साथ सहकर्मी सना द्वारा बताई गई है, जो कि निम्नलिखित है.

'आज रात में हम और हमारे सहकर्मी ASM साहब रात में लगभग डेढ़ बजे जब घर वापस आ रहे थे, तो अचानक प्रशांत चौधरी व संदीप कुमार, कार के सामने आ गए. ASM साबह डर की वजह से और महिला साथ होने के कारण गाड़ी आगे बढ़ाकर चलने की कोशिश करने लगे, उसी समय मोटर साइकिल से एक सिपाही उतरा, जो पीछे बैठा हुआ था और उसके पास एक डंडा था तथा आगे बैठे हुए प्रशांत चौधरी ने शीशे से अपनी पिस्टल सटाकर जाने से मारने के उद्देश्य से फायर किया, जिससे उनकी हत्या हो गई.'

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विवेक की पत्नी ने सना के बयान के आधार पर अपनी एफआईआर में आगे लिखवाया है, 'ठुड्डी में गोली लगी और आधा किलोमीटर बाद गाड़ी खंभे से जाकर टकरा गई. इस बीच वहां जो पुलिसवाले आए, उन्होंने न मुझे किसी को फोन करने दिया और न ही किसी का फोन उठाने दिया और जबरदस्ती सादे कागज पर मुझसे दस्तखत करवा लिए और बाद में मीडिया तथा पुलिस के उच्चाधिकारियों के दबाव में मुझसे जबरदस्ती बोल-बोलकर उसी पन्ने पर लिखवाया भी गया. चूंकि मैं उस वक्त डरी हुई थी, इसलिए लिखती गई.'

फिलहाल, इस मामले में के आदेश दे दिए गए हैं. मुख्यमंत्री योगी ने दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन भी दिया है. ऐसे में अब देखना होगा कि इस घटना से जुड़े अनसुलझे सवालों का जवाब कब तक मिल पाता है.

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