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यूपीः ADG ने किया मानव तस्करी का खुलासा, भारत में रह रहे 2 रोहिंग्या गिरफ्तार

लखनऊ की सिग्नेचर बिल्डिंग में स्थित पुलिस मुख्यालय में एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया कि जानकारी मिलने के बाद 28 फरवरी को फारुख उर्फ हसन अहमद को गिरफ्तार किया गया. हसन अहमद अलीगढ़ के कोतवाली नगर इलाके में रह रहा था.

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पुलिस ने दो रोहिंग्या भाईयों को मानव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया है पुलिस ने दो रोहिंग्या भाईयों को मानव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • यूपी एटीएस को मिली बड़ी सफलता
  • मानव तस्करी करते थे दोनों रोहिंग्या भाई
  • एक-एक कर एटीएस ने दोनों को पकड़ा

यूपी के एडीजी (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने बताया कि एटीएस ने भारत में अवैध तरीके से रह रहे दो रोहिंग्या युवकों को गिरफ्तार किया है. उन्होंने खुलासा करते हुए बताया कि म्यांमार निवासी रोहंगियों का एक गिरोह इन जैसे लोगों को बांग्लादेश बॉर्डर के जरिए अवैध तरीके से भारत लाता है. 

लखनऊ की सिग्नेचर बिल्डिंग में स्थित पुलिस मुख्यालय में एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया कि जानकारी मिलने के बाद 28 फरवरी को फारुख उर्फ हसन को गिरफ्तार किया गया. हसन अहमद अलीगढ़ के कोतवाली नगर इलाके में रह रहा था. 

हसन से पूछताछ करने के बाद इसके भाई शाहिद के बारे में जानकारी मिली. फिर उसकी निशानदेही पर शाहिद को भी उन्नाव के कासिम नगर से गिरफ्तार कर लिया गया. अब इन दोनों को रिमांड पर लेकर इनसे पूछताछ की जाएगी. इनसे ऐसे बाकी लोगों की जानकारी जुटाई जाएगी, जिन्हें बंगलादेश के रास्ते भारत लाया गया है. इनसे संबंधित तमाम अहम जानकारी पूछताछ में जुटाई जाएगी.

एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया कि ये लोग फर्जी तरीके से दस्तावेजों के जरिए आईडी बनाकर रोहंगियों को भारत लाते थे और यहां उन लोगों को तमाम फैक्टरियों और अन्य जगहों पर काम दिलाते थे. इसकी एवज में ये उनसे पैसे वसूल करते थे.

एडीजी के मुताबिक पकड़े गए आरोपी पिछले 5 से 6 सालों से भारत में रह रहे हैं. इनके पास से 5 लाख रुपये और तमाम भारतीय दस्तावेज बरामद किए गए हैं. हसन के भाई शाहिद को बड़ा चौक, नोएडा से गिरफ्तार किया गया है.

प्रशांत कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि ये गिरोह फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इन लोगों के भारतीय दस्तेवज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट आदि तैयार कराता था. इसी तरह से बांग्लादेसी और रोहिंग्या भारत लाए जाते थे. जिन्हें देश और प्रदेश के विभिन्न शहरों में यूएनएचसीआर में रजिस्टर्ड कराकर मीट फैक्टरियों में काम दिलाया जाता था.

एडीजी लॉ एंड ऑर्डर ने बताया कि इन लोगों को भारत लाने और काम दिलाने के बदले गिरफ्तार किए गए आरोपी और उनका गिरोह धन उगाही करता था. अब मामले की छानबीन की जा रही है.

 

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