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रोहिंग्या मुसलमानों को भासन चार द्वीप भेजना जारी, आज रवाना होगा 1776 शरणार्थियों का दूसरा जत्था

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी बयान के मुताबिक सरकार वहां 700 रोहिंग्याओं को ही भेजना चाहती थी, लेकिन लगभग 1500 लोग स्वेच्छा से वहां जाने को तैयार है. ये लोग सरकार की निगरानी में कॉक्स बाजार छोड़कर चटगांव पहुंचने की तैयारी कर चुके हैं.  

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इंडोनेशिया में समुद्र के किनारे रोहंग्यिा शरणार्थियों का एक समहू (फोटो- पीटीआई) इंडोनेशिया में समुद्र के किनारे रोहंग्यिा शरणार्थियों का एक समहू (फोटो- पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • चटगांव से भासन चार द्वीप भेजे जाएंगे रोहिंग्या शरणार्थी
  • पहली खेप में 1642 रोहिंग्या भेजे गए भासन चार द्वी
  • बांग्लादेश का दावा स्वेच्छा से जा रहे हैं काफी लोग

बांग्लादेश की सरकार कॉक्स बाजार में मौजूद लाखों रोहिंग्या मुसलमानों को धीरे धीरे भासन चार द्वीप भेजने की कोशिश कर रही है. इसी सिलसिले में रोहिंग्या शरणार्थियों की दूसरी खेप भासन चार द्वीप रवाना हो रही है. आज 1776 रोहंग्यिाओं का एक समूह इस द्वीप के लिए बांग्लादेश नेवी के एक जहाज से रवाना होगा. 

इससे पहले 4 दिसबंर को 1642 रोहिंग्याओं के एक समूह को इसी द्वीप पर भेजा गया था. आज बांग्लादेश के चटगांव से नेवी के एक जहाज से ये समूह भासन चार द्वीप रवाना होगा. बांग्लादेश की सरकार का दावा है कि जिन रोहिंग्याओं ने स्वेच्छा से वहां जाने पर सहमति जताई है उन्हें ही वहां भेजा जा रहा है. 
 
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी बयान के मुताबिक सरकार वहां 700 रोहिंग्याओं को ही भेजना चाहती थी, लेकिन लगभग 1500 लोग स्वेच्छा से वहां जाने को तैयार है. ये लोग सरकार की निगरानी में कॉक्स बाजार छोड़कर चटगांव पहुंचने की तैयारी कर चुके हैं.  

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रिफ्यूजी कल्याण विभाग के एक अधिकारी ने मीडिया को बताया कि 43 बसों में ये रोहिंग्या रिफ्यूजी शनिवार को कॉक्स बाजार से रवाना हुए. चटगांव में इन्हें BAF शाहीन कॉलेज में रखा जाएगा, यहां से उन्हें भासन चार द्वीप ले जाया जाएगा. 

बता दें कि बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में करीब 8 लाख से ज्यादा रोहिंग्या शरणार्थी गुजर बसर कर रहे हैं. बांग्लादेश सरकार इनमें से करीब 1 लाख शरणार्थियों को यहां से दूर 'भासन चार' आईलैंड पर भेजी रही है.  

बता दें कि 'भासन चार' आईलैंड बंगाल की खाड़ी पर बसा है. ये आइलैंड हिमालय की गाद से बना था. इस द्वीप को 20 साल पहले समुद्र में खोजा गया था. यहां अक्सर बाढ़ आती रहती है. मानसून के दौरान यहां का अधिकांश हिस्सा जलमग्न रहता है. यहां की कठिन जलवायु और बुनियादी सुविधाओं के अभाव की वजह से कई मानवाधिकार संगठनों ने रोहिंग्या शरणार्थियों को यहां भेजने पर चिंता जताई है.  

 

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