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NCRB 2020: लॉकडाउन के दौरान क्राइम ग्राफ में गिरावट, कोरोना नियमों के उल्लंघन में वृद्धि

फेक करेंसी के मामलों पर अगर नजर डाली जाए तो साल 2020 के दौरान नकली भारतीय मुद्रा नोटों (FICN) के तहत 92,17,80,480 मूल्य के कुल 8,34,947 नोट जब्त किए गए, जबकि वर्ष 2019 में ₹ 25,39,09,130 ​​मूल्य के 2,87,404 नोट जब्त किए गए थे.

लॉकडाउन के दौरान देश में क्राइम ग्राफ नीचे आ गया था लॉकडाउन के दौरान देश में क्राइम ग्राफ नीचे आ गया था
स्टोरी हाइलाइट्स
  • साल 2020 में 92,17,80,480 मूल्य के कुल 8,34,947 नोट जब्त
  • महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वाले अधिकांश जानकार
  • गुजरात में ज्यादा है चार्जशीट फाइल करने की दर

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने बुधवार को साल 2020 के आपराधिक आंकड़ों के साथ अपनी प्रमुख वार्षिक रिपोर्ट "क्राइम इन इंडिया" जारी कर दी. कोविड-19 महामारी की पहली लहर के कारण देश में 25 मार्च 2020 और 31 मई 2020 से पूर्ण तालाबंदी रही थी. इस दौरान सार्वजनिक स्थानों पर आवाजाही बहुत सीमित थी. नतीजा ये हुआ कि भारत में कई तरह के आपराधिक मामलों में गिरावट दर्ज की गई. 
 
एनसीआरबी के अनुसार महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ होने वाले अपराध, चोरी, सेंधमारी, लूट और डकैती के मामलों में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि कोविड से संबंधित नियमों और आदेशों के उल्लंघन के तहत दर्ज मामलों में वृद्धि हुई है. ये तब भी हुआ, जब मार्च 2020 में कोविड-19 के मद्देनजर घोषित लॉकडाउन के बावजूद देश लाखों संकट के दौर से गुजरा.

देश में दंगों की जांच की बात की जाए तो एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2020 में दंगों से जुड़े 81,846 मामले जांच के लिए आए और 43,063 मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए गए. जबकि कुल 4,613 ऐसे मामले थे, जिनमें दोष सिद्ध हुए. जिनकी दर 29.8 थी.

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विस्फोट बरामदगी की बात करें तो 2019 में बरामद 7,62,319 किलोग्राम विस्फोटक की तुलना में, साल 2020 के दौरान कुल 68,312 किलोग्राम विस्फोटक जब्त किए गए. जिनमें आरडीएक्स, टीएनटी, प्लास्टिक विस्फोटक, गन पाउडर, आतिशबाज़ी आदि शामिल हैं. इसमें राष्ट्र-विरोधी मामलों से जुड़ी बरामदगी भी शामिल हैं. तस्करों सहित अन्य अपराधियों से 67,685 किग्रा बरामदगी की गई. 

तेलंगाना में विस्फोटक जब्ती के मामलों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. साल 2019 में 7,46,886 की तुलना में 2020 के दौरान कुल 8,01,046 विस्फोटक उपकरण आदि बरामद किए गए हैं. जिनमें डेटोनेटर, जिलेटिन स्टिक, ग्रेनेड, लैंडमाइन और आईईडी आदि शामिल हैं. 

फेक करेंसी के मामलों पर अगर नजर डाली जाए तो साल 2020 के दौरान नकली भारतीय मुद्रा नोटों (FICN) के तहत 92,17,80,480 मूल्य के कुल 8,34,947 नोट जब्त किए गए, जबकि वर्ष 2019 में ₹ 25,39,09,130 ​​मूल्य के 2,87,404 नोट जब्त किए गए थे. साल 2020 में वर्ष 2019 की तुलना में 190.5% की वृद्धि देखी गई.

साल 2020 में अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के खिलाफ होने वाले अपराध के कुल 8,272 मामले दर्ज किए गए, जो 2019 की तुलना में 9.3% (7,570 मामले) अधिक हैं. ऐसे मामलों में दर्ज की गई अपराध दर 2019 में 7.3 की तुलना में बढ़कर 2020 में 7.9 हो गई. 

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क्राइम हेड-वाइज मामलों से पता चला कि साल 2020 में अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के खिलाफ अपराधों और अत्याचारों के सबसे अधिक मामले सामने आए. जिनकी दर 27.2% थी. जिसमें साधारण चोट के 2,247 मामले, अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के साथ बलात्कार के 1137 मामले सामने आए जो पिछले साल की तुलना में 13.7% अधिक हैं. जबकि महिलाओं का शील भंग करने के इरादे से किए गए हमलों की संख्या 885 रही. 

आईपीसी के तहत दर्ज अपराधों में चार्जशीट फाइल करने की दर करने वाले राज्यों में गुजरात सबसे आगे है. उसकी दर 97.1% है. जबकि केरल 94.9% और तमिलनाडु 91.7% पर हैं. देश के 19 महानगरों की बात करें तो आईपीसी अपराधों के तहत उच्चतम चार्ज-शीटिंग दर वाले शहर सूरत 96.7%, कोयंबटूर 96.6% और अहमदाबाद 96.3% हैं.

आईपीसी के तहत महिलाओं के खिलाफ अपराध के 30.0% मामले पति या उनके रिश्तेदारों द्वारा अंजाम दिए गए. इसके बाद 'महिलाओं पर हमला कर उनका शील भंग करने के इरादे से 23.0% मामले, महिलाओं के अपहरण 16.8% और बलात्कार 7.5% मामले प्रति लाख महिलाओं की जनसंख्या के अनुसार साल 2020 में दर्ज किए गए. 2019 में 62.3 की तुलना में 2020 में प्रति लाख महिला आबादी पर दर्ज अपराध दर 56.5 है. यह संख्या घटी है.  

देश में अनुसूचित जातियों (SC) के खिलाफ अपराध करने के लिए कुल 50,291 मामले दर्ज किए गए, जो साल 2019 के 45,961 मामलों की तुलना में 9.4% ज्यादा हैं. 2019 में दर्ज की गई अपराध दर 22.8 से बढ़कर 2020 में 25.0 हो गई है. 2020 के दौरान एससी / एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत 4,273 मामले और आपराधिक धमकी के तहत 3,788 मामले दर्ज किए गए.

 

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