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योगी सरकार के 4 साल: शासन ने नकारे NCRB के आंकड़े, अपराध कम होने का दावा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कई मौकों पर बताया कि इस प्रदेश में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है और सरकार ने भी तमाम कोशिशें कीं ताकि अपराध पर अंकुश लग सके. ताबड़तोड़ एनकाउंटर में बड़े-बड़े अपराधियों को मार गिराया गया.

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योगी सरकार ने इस NCRB के आंकड़ो को ही नकार दिया है योगी सरकार ने इस NCRB के आंकड़ो को ही नकार दिया है

19 मार्च 2021 को उत्तर प्रदेश सरकार के 4 साल पूरे होने होने को हैं. योगी सरकार अपने 4 साल पूरे होने का जश्न शुरू करने जा रही है. राज्य में पिछले 4 सालों में क्या कुछ बदला इस मौके पर ये भी जान लेना बेहद जरूरी है. उत्तर प्रदेश जैसे राज्य के लिए दशकों से अपराध एक बड़ी समस्या रही है. यही वजह थी कि योगी सरकार ने सरकार बनते ही दावा किया कि अपराध में कमी लाना उनकी प्राथमिकता रहेगी.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कई मौकों पर बताया कि इस प्रदेश में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है और सरकार ने भी तमाम कोशिशें कीं ताकि अपराध पर अंकुश लग सके. ताबड़तोड़ एनकाउंटर में बड़े-बड़े अपराधियों को मार गिराया गया. सालों से अपनी दबंगई के चलते राजनीति तक में पैठ बना चुके मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद जैसे अपराधियों को यूपी सरकार ने पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया. लेकिन इन बड़े अपराधियों और बड़े नेटवर्क के अलावा क्या वाकई में प्रदेश में अपराध को लेकर बदलाव आया है या फिर सबकुछ जस का तस है.

एनसीआरबी यानी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो, जोकि पूरे देश भर के हर राज्य में अपराधों पर पूरा लेखा-जोखा तैयार करता है, के मुताबिक साल 2020 तक उत्तर प्रदेश की स्थिति अपराध के मामले में बहुत बेहतर नहीं हुई है. अगर हम साल 2017 जब यूपी में समाजवादी पार्टी सरकार जाने के बाद बीजेपी की सरकार आई थी उन दोनों सरकारों के बीच के अपराध के ग्राफ की बात करें तो साल 2017 तक प्रदेश में अपराध की जो स्थिति थी उसमें कई मायनों में सुधार हुआ है तो कई लिहाज से स्थिति और बदतर भी हुई है.

कुछ मामलों में अपराध घटे तो कुछ में बढ़े
साल 2020 के एनसीआरबी के डाटा के मुताबिक उत्तर प्रदेश में हर 2 घंटे में एक रेप का मामला रिपोर्ट किया जाता है. जबकि बच्चों के खिलाफ रेप का मामला हर 90 मिनट में रिपोर्ट हुआ है. एनसीआरबी के मुताबिक साल 2018 में उत्तर प्रदेश में रेप पर कुल 4322 मामले दर्ज हुए थे. इसका सीधा मतलब है कि हर रोज करीब 12 रेप के मामले हो रहे थे.

महिलाओं के खिलाफ 2018 में 59445 मामले दर्ज किए गए. जिसका अर्थ है कि हर रोज महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराध के मामले 162 रिपोर्ट किए गए. जो कि साल 2017 के मुकाबले 7 परसेंट ज्यादा है. साल 2017 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 56011 मामले दर्ज किए गए थे. यानी उस वक्त यह आंकड़ा हर दिन के हिसाब से 153 केस था. साल 2018 में नाबालिग बच्चियों के साथ रेप के कुल 144 मामले दर्ज किए गए. जबकि साल 2017 में यह आंकड़ा 139 था. 

साल 2017 अप्रैल में बीजेपी की सरकार आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बहुत से ऐसे कार्यक्रम शुरू किए जिससे कि महिलाओं के खिलाफ अपराध के आंकड़े कम हो सकें. एंटी रोमियो स्क्वॉड, मिशन शक्ति जैसे कार्यक्रम इसीलिये शुरू किए गए.

सोनभद्र नरसंहार के बाद हजारों हेक्टेयर जमीन कराई गई कब्जा मुक्त
सोनभद्र जिले के नरसंहार के बाद, जिसमें 11 लोग मारे गए थे, योगी सरकार ने सुनियोजित तरीके से संगठित जमीन कब्जा करने वाले नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए राजस्व विभाग और जिला प्रशासन की एक कमेटी भी गठित की. जिसमें पूरे प्रदेश में हजारों हेक्टेयर जमीन कब्जा मुक्त कराई गई. अपराध को कम करने के लिए रासुका के तहत अपराधियों के खिलाफ मुकदमे किए गए जिससे कि संगठित अपराध करने वाले जल्दी जेल से बाहर ना आ सकें.

मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद जैसे बड़े अपराधियों ने अपना तबादला दूसरे राज्यों की जेलों में करा लिया. लेकिन अगर आंकड़ों की बात करें तो NCRB के डेटा के मुताबिक यूपी में साल 2016 में जहां कुल अपराध के 4,94,025 मामले दर्ज किए गए वहीं साल 2018 में 5,85,157 मामले दर्ज किए गए यानि की अपराधों में करीब 11 प्रतिशत का उछाल दर्ज हुआ.

यूपी सरकार नहीं मानती एनसीआरबी के आंकड़े
यूपी सरकार एनसीआरबी के इन आंकड़ों को नकारती है. सरकार के मुताबिक यूपी में अपराध पर नियंत्रण हुआ है और अगर आंकड़ों की बात की जाए तो ये प्रदेश की जनसंख्या के लिहाज से पूरे देश की तुलना में कम है. यूपी सरकार हाल के दिनों में अपराध पर नियंत्रण के लिए ताबड़तोड़ एनकाउंटर और रासुका जैसे कड़े कानून का इस्तेमाल अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए कर रही है. सरकार अपनी इसी कोशिश के हवाले से प्रदेश में अपराध पर नियंत्रण का दावा भी कर रही है.

गौरतलब है कि यूपी सरकार हमेशा से ही NCRB द्वारा दिए गए आंकड़ों से इनकार करती रही है. यूपी सरकार अन्य राज्य की तुलना में जनसंख्या के आधार पर इसकी गणना करते हैं और NCRB पंजीकृत एफआईआर के आधार पर नंबर देता है. इसी वजह से दोनों के आंकड़ों में काफी अंतर नजर आता है.

यूपी सरकार ने बताए अपने खुद के आंकड़े
यूपी सरकार का कहना है कि वह राज्य में एक सुरक्षित वातावरण स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है. राज्य के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने बताया कि यूपी में पिछले 4 सालों में अपराध काफी कम हुए हैं. उनका कहना है कि अपराधों और अपराधियों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपराध पर अंकुश लगाने में कारगर साबित हुई है. यही वजह है कि डकैती के मामलों में साल 2016 से 2020 तक 67.69% की कमी, लूट के मामलों में 66%, हत्याओं में 25.70%, दंगों और झगड़ों में 29.75% और रोड-अप मामलों में 100% की कमी आई है, जबरन वसूली और अपहरण के मामलों में 41.51% और दहेज हत्याओं के मामले में 9.18% और बलात्कार के मामलों में 32.24% फीसदी की कमी दर्ज हुई है.

यूपी सरकार का दावा है कि इस दौरान मुठभेड़ में 129 अपराधी मारे गए, 2782 अपराधी घायल हुए, 13 पुलिस कर्मी शहीद हुए और 1031 पुलिसकर्मी घायल हुए. 36,990 आरोपी गैंगस्टर एक्ट के तहत गिरफ्तार हुए और 523 आरोपी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिए गए.  10,021 मोस्ट वांटेड अपराधियों की गिरफ्तारी हुई.

महिला सुरक्षा को लेकर कई काम
महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षित शहर परियोजना का विस्तार किया गया. महिलाओं और लड़कियों से छेड़छाड़ की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए एंटी रोमियो स्क्वॉड का गठन किया गया. दस्ते ने 98,55,867 व्यक्तियों की जांच करते हुए 9,948 अभियोग पंजीकृत किए और 14, 958 व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई, जबकि इसने 41,21,745 व्यक्तियों को चेतावनी दी. राज्य भर के सभी 1535 पुलिस स्टेशनों में महिला सहायता डेस्क स्थापित किए गए. महिलाओं को त्वरित न्याय देने के लिए 81 मजिस्ट्रेट स्तर की अदालतें और 81 अतिरिक्त सत्र न्यायालय चालू हैं.

इसके अलावा  POCSO एक्ट के तहत त्वरित न्याय प्रदान करने के लिए 218 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए गए. सभी जिला एसपी कार्यालयों में एफआईआर काउंटर भी स्थापित किए गए. महिलाओं की सुरक्षा के लिए वुमेन पावर लाइन 1090 का विस्तार 4 जिलों से सभी 75 जिलों तक किया गया. यूपी- 112 नंबर पर रिस्पांस टाइम 10 से 40 मिनट हो गया है. यूपी- 112 के जरिए 6 लाख 46 हजार से अधिक लोगों को मदद मिली है.
 

 

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