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IPC Section 170: किसी लोकसेवक का रूप धारण किया तो इस धारा के तहत मिलेगी सजा

आईपीसी की धारा 170 (IPC Section 170) में उस शख्स के बारे में बताया गया है, जो किसी लोक सेवक का रूप धारण करता है. चलिए जानते हैं कि आईपीसी (IPC) की धारा 170 इस संबंध में क्या प्रावधान करती है?

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 लोक सेवक का प्रतिरूप धारण करने से जुड़ी है ये धारा
लोक सेवक का प्रतिरूप धारण करने से जुड़ी है ये धारा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • लोक सेवक का प्रतिरूप धारण करने से जुड़ी है ये धारा
  • अंग्रेजी शासनकाल में लागू हुई थी आईपीसी
  • जुर्म और सजा का प्रावधान बताती है IPC

Indian Penal Code: भारतीय दंड संहिता में लोक सेवकों से संबंधित कई तरह अपराधों को लेकर प्रावधान (Provision) मिलते हैं और उनकी सजा भी परिभाषित की गई है. इसी प्रकार आईपीसी की धारा 170 (IPC Section 170) में उस शख्स के बारे में बताया गया है, जो किसी लोक सेवक का रूप धारण करता है. चलिए जानते हैं कि आईपीसी (IPC) की धारा 170 इस संबंध में क्या प्रावधान करती है?

आईपीसी की धारा 170 (Indian Penal Code Section 170) 
भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 170 (Section 170) में लोक सेवक का प्रतिरूपण (Impersonation of public servant) करने वाले के संबंध में कानूनी प्रावधान (Legal provision) किया गया है. IPC की धारा 170 के अनुसार, जो कोई किसी विशिष्ट पद (Specific post) को लोक सेवक (Public servant) के नाते धारण करने का अपदेश (Disclaimer) यह जानते हुए करेगा कि वह ऐसा पद (Post) धारण नहीं करता है या ऐसा पद धारण करने वाले किसी अन्य व्यक्ति का छदम प्रतिरूपण (Pseudo impersonation of another person) करेगा और ऐसे बनावटी रूप (Fake appearance) में ऐसे पदाभास से कोई कार्य करेगा या करने का प्रयत्न करेगा तो वह अपराधी (Offender) के तौर पर सजा का हकदार (Deserving of punishment) होगा.

आसान शब्दों में कहें तो अगर कोई भी व्यक्ति किसी भी लोक सेवक अधिकारी का रूप धारण कर कोई गलत काम करने की कोशिश करता है या गलत काम करता है, तो ऐसे व्यक्ति पर धारा 170 लागू होती है और इस धारा के अंतर्गत उसे दंडित किया जाता है.

सजा का प्रावधान (Punishment provision)
ऐसे करने वाले आरोपी को दोषी पाए जाने पर किसी भांति के कारावास से दंडित (Punished with imprisonment) किया जाएगा. जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी. या उस पर जुर्माना (Fine) किया जाएगा. या फिर उसे दोनों ही प्रकार से दंडित (Punished) किया जाएगा. यह एक ग़ैर- जमानती (Non bailable) और संज्ञेय अपराध (Cognizable offence) है. जिसकी सुनवाई किसी भी मजिस्ट्रेट (Magistrate) द्वारा की जा सकती है. यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं (Not negotiable) है.

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क्या होती है आईपीसी (IPC)
भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) IPC भारत में यहां के किसी भी नागरिक (Citizen) द्वारा किये गये कुछ अपराधों (certain offenses) की परिभाषा (Definition) और दंड (Punishment) का प्रावधान (Provision) करती है. आपको बता दें कि यह भारत की सेना (Indian Army) पर लागू नहीं होती है. पहले आईपीसी (IPC) जम्मू एवं कश्मीर में भी लागू नहीं होती थी. लेकिन धारा 370 हटने के बाद वहां भी आईपीसी लागू हो गई. इससे पहले वहां रणबीर दंड संहिता (RPC) लागू होती थी.

अंग्रेजों ने लागू की थी IPC
ब्रिटिश कालीन भारत (British India) के पहले कानून आयोग (law commission) की सिफारिश (Recommendation) पर आईपीसी (IPC) 1860 में अस्तित्व में आई. और इसके बाद इसे भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) के तौर पर 1862 में लागू किया गया था. मौजूदा दंड संहिता को हम सभी भारतीय दंड संहिता 1860 के नाम से जानते हैं. इसका खाका लॉर्ड मेकाले (Lord Macaulay) ने तैयार किया था. बाद में समय-समय पर इसमें कई तरह के बदलाव किए जाते रहे हैं.
 

 

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