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IPC Section 169: गैर-कानूनी तरीके से संपत्ति खरीदने वाले अफसर पर लागू होती है ये धारा

आईपीसी की धारा 169 (IPC Section 169) में उस लोक सेवक के बारे में सजा का प्रावधान किया गया है, जो अवैध तरीके से किसी संपत्ति को खरीदता है या उसके लिए बोली लगाता है. चलिए जानते हैं कि आईपीसी (IPC) की धारा 169 इस संबंध में क्या प्रावधान करती है?

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लोक सेवक के अवैध रूप से संपत्ति खरीदने से जुड़ी है ये धारा
लोक सेवक के अवैध रूप से संपत्ति खरीदने से जुड़ी है ये धारा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अवैध रूप से लोक सेवक के संपत्ति खरीदने से जुड़ी है ये धारा
  • ब्रिटिश शासनकाल में लागू हुई थी आईपीसी
  • जुर्म और सजा का प्रावधान बताती है IPC

Indian Penal Code: भारतीय दंड संहिता में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों (Officers and employees) से संबंधित कई तरह प्रावधान (Provision) किए गए हैं और उनकी सजा भी बताई गई है. ऐसे ही आईपीसी की धारा 169 (IPC Section 169) में उस लोक सेवक के बारे में सजा का प्रावधान किया गया है, जो अवैध तरीके से किसी संपत्ति को खरीदता है या उसके लिए बोली लगाता है. चलिए जानते हैं कि आईपीसी (IPC) की धारा 169 इस संबंध में क्या प्रावधान करती है?

आईपीसी की धारा 169 (Indian Penal Code Section 169) 
भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 169 (Section 169) में किसी सरकारी अफसर या कर्मचारी का अवैध रूप से संपत्ति खरीदना या उसके लिए बोली लगाना परिभाषित किया गया है. साथ ही इस धारा में ऐसे लोक सेवक के लिए सजा का प्रावधान भी किया गया है. आईपीसी की धारा 169 के मुताबिक, जो कोई लोक सेवक (Public servant) होते हुए और ऐसे लोक सेवक के नाते इस बात के लिए वैध रूप से आबद्ध (Legally bound) होते हुए कि वह अमुक सम्पत्ति (Certain property) को न तो क्रय (Purchase) करे और न उसके लिए बोली (Bid) लगाए, या तो अपने निज के नाम में या किसी दूसरे के नाम में, अथवा दूसरों के साथ संयुक्त रूप से, या अंशों में, उस सम्पत्ति को क्रय करेगा, या उसके लिये बोली लगायेगा, तो वह अपराधी (Offender) माना जाएगा. ऐसे में उसके द्वारा खरीदी गई संपत्ति (Property purchased) जब्त की जाएगी (will be confiscated) और उसे सजा (Punishment) मिलेगी.

सजा का प्रावधान (Punishment provision)
ऐसा करने वाला लोक सेवक या सरकारी अफसर दोषी पाए जाने पर दो वर्ष के लिए कारावास से दंडित (Punished with imprisonment) होगा. या उस पर जुर्माना (Fine) किया जाएगा. या फिर उसे दोनों ही प्रकार से दंडित (Punished) किया जाएगा. यह एक जमानती (Bailable) और गैर-संज्ञेय अपराध (Non-cognizable offenses) है. जिसकी सुनवाई प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट (First Class Magistrate)  की जाती है. यह अपराध समझौता योग्य नहीं (Not negotiable) है.

इसे भी पढ़ें--- IPC Section 168: गैरकानूनी तरीके से कारोबार करने वाले अधिकारी पर लागू होती है ये धारा 

क्या होती है आईपीसी (IPC)
भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) IPC भारत में यहां के किसी भी नागरिक (Citizen) द्वारा किये गये कुछ अपराधों (certain offenses) की परिभाषा (Definition) और दंड (Punishment) का प्रावधान (Provision) करती है. आपको बता दें कि यह भारत की सेना (Indian Army) पर लागू नहीं होती है. पहले आईपीसी (IPC) जम्मू एवं कश्मीर में भी लागू नहीं होती थी. लेकिन धारा 370 हटने के बाद वहां भी आईपीसी लागू हो गई. इससे पहले वहां रणबीर दंड संहिता (RPC) लागू होती थी.

अंग्रेजों ने लागू की थी IPC
ब्रिटिश कालीन भारत (British India) के पहले कानून आयोग (law commission) की सिफारिश (Recommendation) पर आईपीसी (IPC) 1860 में अस्तित्व में आई. और इसके बाद इसे भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) के तौर पर 1862 में लागू किया गया था. मौजूदा दंड संहिता को हम सभी भारतीय दंड संहिता 1860 के नाम से जानते हैं. इसका खाका लॉर्ड मेकाले (Lord Macaulay) ने तैयार किया था. बाद में समय-समय पर इसमें कई तरह के बदलाव किए जाते रहे हैं.

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