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खुलासाः कोडिंग करने में महारत हासिल कर चुका है पाकिस्तान का ये आतंकी, पूछताछ जारी

सूत्रों के मुताबिक, साल 2011 में हाईकोर्ट के बाहर जो ब्लास्ट हुए थे उस दौरान इसने ही हाईकोर्ट की रेकी की थी. संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकी अशरफ को ब्लास्ट में शामिल एक संदिग्ध की फोटो दिखाई गई तो अशरफ ने बताया कि उसने ही हाईकोर्ट की रेकी की थी

स्पेशल सेल समेत कई एजेंसियां आरोपी अशरफ से पूछताछ कर रही हैं स्पेशल सेल समेत कई एजेंसियां आरोपी अशरफ से पूछताछ कर रही हैं
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 5 साल में तैयार किए थे अपने दस्तावेज
  • हाई कोर्ट धमाके से पहले की थी रेकी
  • बंगाल और बिहार में भी बनाए लोगों से संबंध

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के हत्थे चढ़े संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद अशरफ ने पूछताछ में कई खुलासे किए हैं.  सूत्रों के मुताबिक अशरफ ने कोडिंग करने में महारत हासिल कर ली है. यही वजह है कि वो आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए कोड वर्ड का इस्तेमाल करता था. जम्मू कश्मीर पुलिस और मिलिट्री इंटेलीजेंसी के साथ-साथ आईबी की टीम उससे लगातार पूछताछ कर रही है.

पाकिस्तानी एजेंट अशरफ से पूछताछ में पता चला कि साल 2004-2005 में भारत आने के बाद पहले 5 साल उसने केवल अपनी पहचान बनाने और पहचान वाले डाक्यूमेंट्स तैयार करने में लगाए. वो 2 साल अजमेर में एक हिन्दू परिवार के घर में किराए पर रहा. वहां वो रेहड़ी पर काम करने लगा. इसके बाद वो बंगाल और बिहार की तरफ गया और वहां लोगों से संबंध बनाने में जुट गया था. 

जानकारी के मुताबिक साल 2009 से अशरफ जम्मू कश्मीर में एक्टिव हो गया था. वहां वो लगातार सेना के मूवमेंट पर नजर रख रहा था. अपने हैंडलर्स को जानकारी भेजने के लिए वो ड्राफ्ट में मेल सेव कर देता था. वहां वो सारी जानकारी कोडिंग में देता था. 

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वो खुद को दिहाड़ी मजदूर बता कर वहां टिका रहता था और सेना की गाड़ियों के नम्बर की सूचना अपने हैंडलर्स को देता था. मजदूर होने की वजह से कोई उस पर शक भी नहीं करता था. उसने शादी भी केवल इसीलिए की थी कि किसी घर मे आसानी से एंट्री ले सके. जानकारी के अनुसार 3 महीने के बाद उसने अपनी पत्नी को छोड़ दिया था.

सूत्रों के मुताबिक, साल 2011 में हाईकोर्ट के बाहर जो ब्लास्ट हुए थे उस दौरान इसने ही हाईकोर्ट की रेकी की थी. संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकी अशरफ को ब्लास्ट में शामिल एक संदिग्ध की फोटो दिखाई गई तो अशरफ ने बताया कि उसने ही हाईकोर्ट की रेकी की थी. हालांकि ये उस ब्लास्ट में शामिल था या नहीं ये अभी पूछताछ में साफ होगा. 

आरोपी अशरफ ने साल 2011 के आसपास आईटीओ स्थित पुलिस हेडक्वाटर (पुराना पुलिस हेडक्वाटर) की रेकी भी की थी. उसने पूछताछ में बताया कि उसने कई बार रेकी की लेकिन ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई क्योंकि पुलिस हेडक्वाटर के बाहर लोगों को रुकने की इजाजत नहीं थी. उसने आईएसबीटी की भी रेकी कर जानकरियां पाकिस्तान के हैंडलर्स को भेजी थी.

आतंकी ने पूछताछ में बताया कि साल 2009 में जम्मू में बस स्टैंड पर एक ब्लास्ट हुआ था, जिसमें 3-4 लोगों की मौत हो गई थी. उसने यहा धमाका आईएसआई के अफ़सर नासिर के कहने पर किया था. जम्मू कश्मीर में 5 आर्मी के जवानों की बेरहमी से हत्या की बात भी आरोपी ने कुबूल की है, जिसको वेरिफ़ाई किया जा रहा.

 

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