केरल के सबरीमाला मंदिर में सोने के नुकसान से जुड़े मामले में मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी ने कानूनी राहत की मांग की है. उन्होंने कोल्लम की विजिलेंस कोर्ट में अपने खिलाफ दर्ज दूसरे मामले में जमानत के लिए याचिका दायर की है. उनको इससे पहले द्वारपालक मूर्तियों की प्लेटों से सोने के नुकसान के मामले में कानूनी जमानत मिल चुकी है.
उन्नीकृष्णन पोट्टी ने श्रीकोविल यानी गर्भगृह के दरवाजों के फ्रेम से सोने के नुकसान से जुड़े मामले में भी इसी तरह की राहत मांगी है. यह याचिका शनिवार को दायर की गई. इसकी वजह यह बताई गई है कि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने गिरफ्तारी के 90 दिन पूरे होने के बावजूद अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं की है.
कोर्ट ने इस याचिका पर सोमवार को सुनवाई करने का फैसला किया है. सूत्रों के मुताबिक, यदि कोर्ट से जमानत मिल जाती है तो उन्नीकृष्णन पोट्टी को जेल से रिहा कर दिया जाएगा. पुलिस का कहना है कि साल 2019 में सोने की परत चढ़ी द्वारपालक मूर्तियों और श्रीकोविल के दरवाजों के फ्रेम पर इलेक्ट्रोप्लेटिंग कराने की पहल पोट्टी ने ही की थी.
इलेक्ट्रोप्लेटिंग का काम चेन्नई की एक फर्म में कराया गया था. जांच एजेंसी को आशंका है कि सोने का नुकसान इसी प्रक्रिया के दौरान हुआ. इसी कड़ी में मामले की विस्तृत जांच की गई है. इससे पहले त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के दो प्रशासनिक अधिकारियों को कोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल से रिहा किया जा चुका है.
उन्नीकृष्णन पोट्टी के अलावा, कोर्ट पूर्व TDB कार्यकारी अधिकारी डी सुधीश कुमार की जमानत याचिका पर भी विचार करेगा. उन्होंने भी दोनों मामलों में 90 दिन की न्यायिक हिरासत पूरी कर ली है. द्वारपालक सोने के नुकसान के मामले में कुल 16 आरोपी हैं, जबकि श्रीकोविल दरवाजे के फ्रेम से जुड़े मामले में 13 आरोपी शामिल हैं.
एसआईटी का कहना है कि चार्जशीट दाखिल करने में देरी लंबित वैज्ञानिक परीक्षण रिपोर्ट के कारण हुई है. हालांकि जांच एजेंसी इस महीने के भीतर चार्जशीट दाखिल करने का लक्ष्य बना रही है. पिछले हफ्ते केरल हाई कोर्ट ने एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान चार्जशीट में देरी को लेकर पुलिस की कड़ी आलोचना भी की थी.