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NEET परीक्षा 2026 रद्द: पेपर लीक में दोषियों को 10 साल तक जेल, ₹1 करोड़ तक जुर्माना

NEET परीक्षा 2026 रद्द होने के बाद देशभर में हड़कंप मचा है. जानिए पेपर लीक और परीक्षा धांधली के मामलों में नए कानून के तहत कितनी जेल, कितना जुर्माना और क्या हैं कड़े प्रावधान?

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इस मामले में आरोपियों की धरपकड़ शुरू हो चुकी है (फोटो-ITG)
इस मामले में आरोपियों की धरपकड़ शुरू हो चुकी है (फोटो-ITG)

भारत की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET 2026 के रद्द होने की खबर से छात्रों और अभिभावकों में भारी चिंता और नाराजगी का माहौल है. परीक्षा में पेपर लीक और धांधली के आरोपों के बाद यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बन गया है. इसी बीच केंद्र सरकार के नए कानून को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है, जिसमें पेपर लीक करने वालों के खिलाफ बेहद कड़े प्रावधान किए गए हैं.

भारत सरकार ने भर्ती परीक्षाओं और प्रतियोगी एग्जाम में होने वाली धांधली को रोकने के लिए 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024' लागू किया है. यह कानून फरवरी 2024 में संसद से पारित हुआ था और इसके प्रावधान जून 2024 से लागू कर दिए गए. इस कानून का उद्देश्य पेपर लीक, नकल माफिया और परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले संगठित गिरोहों पर सख्त कार्रवाई करना है.

नए कानून के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति परीक्षा का पेपर लीक करता है या आंसर शीट यानी उत्तर पुस्तिका से छेड़छाड़ करता है, तो उसे कम से कम 3 साल की जेल हो सकती है. अपराध की गंभीरता को देखते हुए अदालत इस सजा को 10 साल तक बढ़ा सकती है. इसके साथ ही दोषियों पर 10 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है. अदालत चाहे तो जेल और जुर्माना दोनों की सजा एक साथ दे सकती है.

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सरकार ने इस अपराध को गैर-जमानती श्रेणी में रखा है. यानी आरोपी को आसानी से जमानत नहीं मिल सकेगी. इतना ही नहीं, अगर किसी परीक्षा एजेंसी, संस्था या सर्विस प्रोवाइडर की भूमिका पेपर लीक में सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी. दोषी पाए जाने पर सर्विस प्रोवाइडर पर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और परीक्षा कराने का पूरा खर्च भी उससे वसूला जा सकता है.

कानून में संगठित गिरोहों के लिए और भी सख्त सजा का प्रावधान किया गया है. अगर जांच में यह साबित होता है कि पेपर लीक किसी गैंग या संगठित नेटवर्क ने किया है, तो आरोपियों को 5 से 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना भुगतना पड़ सकता है. इसके अलावा अपराध में शामिल लोगों की संपत्ति भी कुर्क यानी जब्त की जा सकती है.

यह नया कानून केवल NEET तक सीमित नहीं है, बल्कि UPSC, SSC, रेलवे भर्ती परीक्षा और अन्य सभी केंद्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं पर लागू होता है. सरकार का दावा है कि इस कानून के जरिए परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाई जाएगी और मेहनत करने वाले छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त शिकंजा कसा जाएगा. फिलहाल NEET 2026 रद्द होने के बाद लाखों छात्र आगे की प्रक्रिया और नई परीक्षा तारीख का इंतजार कर रहे हैं.
 

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