ग्रेटर नोएडा में एक और ‘मौत के गड्ढा’ फिर सामने आया है. जहां सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत की यादें अभी ताजा ही थीं कि रविवार तड़के एक और खौफनाक हादसा हो गया. जहां इस बार गनीमत रही कि कोई जान नहीं गई.
मामला ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी क्षेत्र का है, जहां कासना थाना इलाके के भाटी गोलचक्कर के पास एक कार सीधे नाले में जा गिरी. हादसा सुबह करीब 3 से 4 बजे के बीच हुआ, जब पूरा इलाका घने कोहरे की चादर में लिपटा हुआ था. इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
कोहरे का कहर
जानकारी के मुताबिक, हादसे के वक्त विजिबिलिटी बेहद कम थी. वाहन चालकों को आगे का रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था. जैसे ही उनकी कार 90 डिग्री के खतरनाक मोड़ पर पहुंची, ड्राइवर दिशा भटक गया और कार सीधे खुले नाले में जा गिरी. सड़क पर न तो चेतावनी बोर्ड थे, न रिफ्लेक्टर और न ही कोई मजबूत बैरिकेडिंग. यही लापरवाही इस हादसे की बड़ी वजह मानी जा रही है. अगर कोहरा थोड़ा और घना होता या रफ्तार तेज होती, तो यह हादसा जानलेवा भी हो सकता था.
ऐसे बची दो जिंदगी
इस हादसे में कार में सवार दो युवक बाल-बाल बच गए. राहत की बात यह रही कि नाले में उस वक्त पानी का स्तर ज्यादा नहीं था. कार गिरते ही दोनों युवकों ने सूझबूझ दिखाई और किसी तरह बाहर निकलने में कामयाब रहे. उन्हें मामूली चोटें जरूर आईं, लेकिन बड़ा हादसा टल गया. हालांकि, हादसे के बाद दोनों युवक काफी डरे हुए थे. उनका कहना था कि अगर नाले में पानी भरा होता, तो शायद बाहर निकलना नामुमकिन हो जाता.
90 डिग्री मोड़ का बना हादसे की वजह
जिस जगह यह दुर्घटना हुई, वह पहले से ही बेहद संवेदनशील मानी जाती है. 90 डिग्री का तीखा मोड़ होने के बावजूद वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं. न कोई स्ट्रीट लाइट, न रिफ्लेक्टिव मार्किंग और न ही मजबूत रेलिंग. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मोड़ पर पहले भी कई वाहन फिसल चुके हैं. युवराज मेहता की मौत के बाद भी अगर ठोस कदम उठाए गए होते, तो शायद यह हादसा रोका जा सकता था.
हादसे के बाद लकड़ी से ढका नाला
घटना की सूचना मिलते ही ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी हरकत में आई. मौके पर पहुंची टीम ने नाले को अस्थायी रूप से लकड़ी के फट्टों से ढक दिया. लेकिन यह इंतजाम लोगों को नाकाफी और दिखावटी लगा. सवाल उठ रहे हैं कि क्या नागरिकों की सुरक्षा इतनी सस्ती है कि जानलेवा स्पॉट को लकड़ी से ढककर जिम्मेदारी खत्म कर ली जाए? स्थानीय निवासियों ने स्थायी समाधान, मजबूत बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेत लगाने की मांग की है.

ऐसे गई थी इंजीनियर युवराज की जान
आपको बता दें कि इससे पहले नोएडा के इंजीनियर युवराज मेहता की मौत का मामला भी सरकारी तंत्र और बिल्डरों की गंभीर लापरवाही का प्रतीक बन गया था. हैरान की बात ये है कि इतना बड़ा हादसा हो जाने के बाद भी नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कोई खास सुरक्षा इंतजाम नहीं दिख रहे हैं. आइए आपको बताते हैं, इजीनियर युवराज की मौत की कहानी.
16-17 जनवरी 2026 की रात, 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता गुरुग्राम से अपने घर नोएडा लौट रहे थे. घने कोहरे के कारण सेक्टर-150 में उनकी कार सड़क किनारे एक 20-30 फीट गहरे और पानी से भरे गड्ढे में गिर गई. यह गड्ढा एक बिल्डर द्वारा सालों पहले मॉल के बेसमेंट के लिए खोदा गया था, लेकिन वहां न तो कोई बैरिकेडिंग थी और न ही कोई चेतावनी बोर्ड.
कार डूबने के बाद युवराज किसी तरह उसकी छत पर चढ़ गए और लगभग 90-120 मिनट तक मदद के लिए गुहार लगाते रहे. उन्होंने अपने पिता को फोन कर कहा, 'पापा मुझे बचा लो'. और अपने फोन की टॉर्च जलाकर रेस्क्यू टीम को संकेत भी दिए. मौके पर पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौजूद थीं, लेकिन कथित तौर पर उचित संसाधनों और जज्बे की कमी के कारण वे उन्हें समय पर बाहर नहीं निकाल सके.
सिस्टम की नाकामी
इस घटना के बाद जनता में भारी आक्रोश फैल गया, क्योंकि ठीक 10 दिन पहले उसी जगह एक ट्रक भी गिरा था, फिर भी अधिकारियों ने कोई सुरक्षा कदम नहीं उठाए थे. चश्मदीद डिलीवरी बॉय मोनिंदर ने आरोप लगाया कि रेस्क्यू टीमें ठंड और अंधेरे के डर से पानी में उतरने में हिचकिचा रही थीं. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पुष्टि हुई कि युवराज की मौत दम घुटने (asphyxiation) और हृदय गति रुकने के कारण हुई थी.
कार्रवाई और जांच
मामले की गंभीरता देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया. इसके परिणामस्वरूप नोएडा अथॉरिटी के सीईओ को हटाया गया, जूनियर इंजीनियर को बर्खास्त किया गया और दोषी बिल्डर को गिरफ्तार कर लिया गया. एसआईटी ने अपनी 600 पन्नों की रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें सिस्टम की खामियों और भविष्य के लिए 'डेथ पॉइंट्स' को सुरक्षित करने के सुझाव दिए गए हैं.