
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में करीब 1.5 करोड़ रुपये के LPG घोटाले का बड़ा खुलासा हुआ है. पुलिस जांच में जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव को इस पूरे रैकेट का कथित मास्टरमाइंड बताया गया है. मामले में अब तक तीन लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. पुलिस का कहना है कि जब्त किए गए LPG टैंकरों से बड़ी मात्रा में गैस निकालकर उसे अवैध तरीके से बेचा गया.
यह मामला उन छह LPG टैंकर कैप्सूल से जुड़ा है जिन्हें पहले जब्त किया गया था. बाद में सुरक्षा कारणों से उन्हें सुपुर्दगी प्रक्रिया के तहत सुरक्षित रखने के लिए सौंपा गया था. पुलिस के मुताबिक इसी दौरान गैस चोरी और डायवर्जन की साजिश रची गई. जांच में सामने आया कि सरकारी प्रक्रिया का फायदा उठाकर करोड़ों रुपये की LPG को गायब किया गया.
पुलिस जांच के अनुसार, 23 मार्च को जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव और गौरव गैस एजेंसी के संचालक पंकज चंद्राकर के बीच पहली बैठक हुई थी. इसी बैठक में कथित तौर पर टैंकरों में भरी LPG निकालने की योजना बनाई गई. बाद में रायपुर निवासी मनीष चौधरी को भी इस साजिश में शामिल किया गया. पुलिस का दावा है कि उसे उन एजेंसियों से संपर्क करने की जिम्मेदारी दी गई जो इस अवैध सौदे में शामिल हो सकती थीं.
जांच एजेंसियों के मुताबिक, 26 मार्च को अजय यादव और पंकज चंद्राकर सिंहोड़ा थाना पहुंचे थे. वहां उन्होंने छह टैंकरों में मौजूद गैस की मात्रा का आकलन किया. पुलिस का कहना है कि टैंकरों में 100 मीट्रिक टन से ज्यादा LPG होने का अनुमान लगाया गया था. इसके बाद करीब 1 करोड़ रुपये की डील करने की योजना बनाई गई और कई एजेंसियों से बातचीत के बाद ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के साथ 80 लाख रुपये में सौदा तय हुआ.
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के बीच पैसों का बंटवारा पहले से तय था. जांच में दावा किया गया है कि अजय यादव को 50 लाख रुपये मिलने थे. वहीं पंकज चंद्राकर के हिस्से में 20 लाख और मनीष चौधरी को 10 लाख रुपये दिए जाने थे. पुलिस का कहना है कि सुपुर्दगी प्रक्रिया पूरी होते ही अजय यादव को उसका हिस्सा दे दिया गया था, जबकि बाकी रकम नकद और अस्थायी बैंक ट्रांसफर के जरिए संभाली गई.

दरअसल, ये LPG टैंकर दिसंबर 2025 में आवश्यक वस्तु अधिनियम और अन्य धाराओं के तहत जब्त किए गए थे. गर्मियों के दौरान सिंहोड़ा थाने में इन्हें सुरक्षित रखना मुश्किल हो रहा था. इसी वजह से जिला प्रशासन ने खाद्य विभाग को सुरक्षित स्थान की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे. इसके बाद 30 मार्च को कोर्ट की अनुमति से छह टैंकरों को रायपुर के उरला स्थित ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स को सुपुर्द कर दिया गया.
लेकिन पुलिस का आरोप है कि टैंकरों की सुरक्षा करने के बजाय एक हफ्ते के भीतर उनमें से करीब 92 मीट्रिक टन LPG निकाल ली गई. जांच में यह भी सामने आया कि गैस चोरी छिपाने के लिए फर्जी वजन रिकॉर्ड और नकली पंचनामा तैयार किए गए. पुलिस के मुताबिक, वेटमेंट प्रक्रिया में हेरफेर किया गया और कई दस्तावेज वास्तविक वजन प्रक्रिया से पहले ही तैयार कर लिए गए थे.
जांच टीम ने गैस लीक होने की संभावना को भी खारिज कर दिया है. तकनीकी विशेषज्ञों ने सभी छह टैंकरों की जांच की और उन्हें पूरी तरह फिट बताया. अधिकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में LPG बिना धमाके या किसी बड़े हादसे के प्राकृतिक रूप से लीक नहीं हो सकती. इसी वजह से पुलिस इसे सुनियोजित गैस डायवर्जन और ब्लैक मार्केटिंग का मामला मान रही है.
इस पूरे मामले की जांच 40 सदस्यीय पुलिस टीम ने की. जांच के दौरान तकनीकी विश्लेषण, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, वैज्ञानिक पूछताछ और सरकारी दस्तावेजों की गहन जांच की गई. पुलिस ने अब तक जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव, गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर और रायपुर निवासी मनीष चौधरी को गिरफ्तार किया है. इनके पास से 6 लाख रुपये से ज्यादा का कैश, मोबाइल फोन और अन्य सामान भी बरामद किया गया है.
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और आवश्यक वस्तु अधिनियम की कई धाराओं में केस दर्ज किया है. इनमें आपराधिक साजिश, भरोसा तोड़ने, जालसाजी और सरकारी नियंत्रण वाली वस्तुओं की कालाबाजारी जैसे आरोप शामिल हैं. फिलहाल, मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले में शामिल अन्य लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है.