चंडीगढ़ में शहर के विकास के लिए बनाए गए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के फंड में करोड़ों रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है. आरोप है कि IDFC First बैंक के एक ब्रांच मैनेजर ने जालसाजों के साथ मिलकर नगर निगम के लिए जारी की गई फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदों (FDR) में गड़बड़ी कर दी. जांच में पता चला कि करीब 116.84 करोड़ रुपये की FDR पूरी तरह फर्जी थीं और बैंक के रिकॉर्ड में इस रकम का कोई उल्लेख नहीं था. मामले का खुलासा होते ही पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
स्मार्ट सिटी फंड में सेंध से मचा हड़कंप
चंडीगढ़ में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए रखे गए फंड में बड़ी वित्तीय गड़बड़ी सामने आने से प्रशासन में हड़कंप मच गया. यह फंड चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (CSCL) द्वारा शहर के विकास कार्यों के लिए रखा गया था. योजना के तहत इस रकम को आगे नगर निगम को ट्रांसफर किया जाना था. लेकिन इसी प्रक्रिया के दौरान बैंकिंग सिस्टम में बड़ी धांधली का मामला सामने आ गया. शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस घोटाले में बैंक के अंदर से मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है.
IDFC First बैंक में खोला गया था विशेष खाता
फंड ट्रांसफर की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए IDFC First बैंक में एक विशेष (Dedicated) खाता खोला गया था. इसी खाते के जरिए स्मार्ट सिटी लिमिटेड से नगर निगम को पैसा ट्रांसफर होना था. लेकिन आरोप है कि बैंक मैनेजर ने रकम जमा करने के बजाय नगर निगम को फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें जारी कर दीं. पहली नजर में ये रसीदें पूरी तरह असली लग रही थीं, इसलिए लंबे समय तक किसी को गड़बड़ी का शक नहीं हुआ.
वेरिफिकेशन में सामने आया फर्जीवाड़ा
मामले का खुलासा तब हुआ जब नगर निगम ने बैंक से मिली FDR रसीदों का वेरिफिकेशन कराया. जांच में पता चला कि करीब 116.84 करोड़ रुपये की सभी FDR पूरी तरह फर्जी हैं. बैंक के आधिकारिक रिकॉर्ड में इस रकम का कोई हिसाब नहीं मिला. इससे साफ हो गया कि बैंकिंग दस्तावेजों के जरिए बड़ा वित्तीय धोखा किया गया है.
फंड ट्रांसफर प्रक्रिया में खुलासा
नगर निगम द्वारा फंड ट्रांसफर की प्रक्रिया के दौरान बैंक की रसीदों की जांच की जा रही थी. इसी दौरान अधिकारियों को दस्तावेजों में गड़बड़ी का संदेह हुआ. जब बैंक के रिकॉर्ड से मिलान किया गया तो पता चला कि जिन FDR का हवाला दिया जा रहा है, वे असल में बैंक सिस्टम में दर्ज ही नहीं हैं. इसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू हुई और मामला सामने आया.
बैंक ने रकम ब्याज सहित लौटाई
घोटाले का मामला सामने आने के बाद बैंक ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी. जानकारी के मुताबिक बैंक ने 116.84 करोड़ रुपये की मूल राशि के साथ ब्याज जोड़कर करीब 121 करोड़ रुपये नगर निगम को वापस कर दिए हैं. बताया जा रहा है कि यह गड़बड़ी करीब दो महीने पहले हुई थी. हालांकि नगर निगम प्रशासन ने हाल ही में इस मामले में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई.
पुलिस ने दर्ज की FIR
नगर निगम चंडीगढ़ की शिकायत मिलने के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की. पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस का कहना है कि इतने बड़े वित्तीय घोटाले को गंभीरता से लिया जा रहा है और इसमें शामिल हर व्यक्ति की भूमिका की जांच की जाएगी. जांच एजेंसियां बैंक और नगर निगम दोनों के रिकॉर्ड खंगाल रही हैं.
EOW ने कई धाराओं में दर्ज किया केस
चंडीगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) इस मामले की जांच कर रही है. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. इनमें धारा 318(4) (धोखाधड़ी), 338, 336(3), 340(2), 61(2) और 316(5) शामिल हैं. इन धाराओं के तहत आरोपियों पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप लग सकते हैं.
अंदरूनी मिलीभगत की आशंका
पुलिस को शक है कि इतने बड़े घोटाले को अकेला कोई व्यक्ति अंजाम नहीं दे सकता. इसलिए जांच में बैंक के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और नगर निगम चंडीगढ़ के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है. शुरुआती जांच में पता चला है कि बैंक के संबंधित ब्रांच मैनेजर ने जाली दस्तावेज तैयार किए और उन पर बैंक की मुहर लगाकर अधिकारियों को गुमराह किया. अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल थे.