कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं... यह बात एक बार फिर से सूरत पुलिस ने साबित की है. सूरत शहर के वराछा पुलिस थाना इलाके में 21 साल पहले हथियार के साथ हमला कर फरार हुए 2 आरोपियों को एसओजी टीम ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी रिश्ते में सगे भाई हैं.
इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए सूरत पुलिस की एसओजी टीम के हेड कांस्टेबल लालभाई खुद 'चाय वाले' बने थे, जबकि कांस्टेबल रामजीभाई ने चाय के ठेले पर निगरानी रखते थे. वहीं, तीसरे साथी हेड कांस्टेबल राकेशभाई चाय के स्टाल पर ग्राहक बनकर घंटों तक बैठे रहे थे.
2005 में जब वराछा पुलिस स्टेशन में हथियार और मारपीट का मामला दर्ज हुआ, तब ये दोनों आरोपी विनोबा नगर झुग्गी-झोपड़ी में रहते थे. अपराध करने के बाद वे रिक्शा और पिस्टल छोड़कर अपने घर भाग गए थे. समय के साथ नगर निगम ने इनकी झुग्गी-झोपड़ी को तोड़ दिया था.
इस कार्रवाई के कारण पुलिस के पास आरोपियों के मूल पते पर या उनके रिश्तेदारों के बारे में जानकारी हासिल करने का कोई रास्ता नहीं बचा था, जिसके कारण यह केस 21 साल तक अनसुलझा रहा. झुग्गी-झोपड़ी तोड़े जाने के बाद वहां के निवासी कहां गए, इसकी जांच करते समय SOG को पता चला कि अधिकांश लोग सरकारी आवासों में रहने चले गए हैं.
हेड कांस्टेबल रामजीभाई और उनकी टीम ने पिछले 1 साल के दौरान इन आवासों में रहने वाले 200 से अधिक पुराने पड़ोसियों से संपर्क किया. वर्षों पुरानी यादें ताजा करवाकर पुलिस ने पूछताछ जारी रखी और अंत में एक व्यक्ति से पुलिस को सुराग मिला कि ये दोनों भाई मूल रूप से यूपी के जौनपुर जिले के निवासी हैं.
सूचना मिलते ही SOG की एक टीम उत्तर प्रदेश के जौनपुर रवाना हुई थी. हालांकि, वहां जांच करने पर पता चला कि आरोपी वर्षों पहले ठिकाना बदलकर प्रयागराज शहर चले गए हैं.
पुलिस के लिए यह 'चोर-पुलिस' के खेल जैसा था, लेकिन टेक्निकल सर्विलांस की मदद से उनका सटीक लोकेशन प्रयागराज के अतरसुइया चौराहे के पास होने का पता चला था. आरोपियों को पकड़ने के लिए SOG की टीम ने अनोखा भेष धारण किया था.
हेड कांस्टेबल लालभाई खुद 'चाय वाले' बन गए और कांस्टेबल रामजीभाई ने ठेले पर नजर रखी. हेड कांस्टेबल राकेशभाई चाय के स्टाल पर ग्राहक बनकर घंटों बैठे रहे, ताकि आरोपियों की पहचान पक्की की जा सके. अतरसुइया चौराहे जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में आरोपी पुलिस की नजर में आ गए और मौका मिलते ही उन्हें दबोच लिया गया.
जांच में सामने आया कि पकड़ा गया आरोपी संतोष यादव प्रयागराज में अंडे और चाय का ठेला चलाकर सामान्य आदमी की तरह जीवन जी रहा था. जबकि दूसरा आरोपी शियु यादव गैरेज चलाता था. 21 साल के लंबे अंतराल में उन्होंने अपनी आपराधिक अतीत की पहचान पूरी तरह मिटा दी थी और उन्हें विश्वास था कि अब पुलिस उन तक कभी नहीं पहुंच पाएगी.
आरोपियों की पूछताछ में पता चला कि 20 साल पहले अश्विनी कुमार गौशाला सर्कल के पास नवीन रावलिया नाम के व्यक्ति के साथ उनका उग्र झगड़ा हुआ था. इस दौरान उन्होंने तलवार से हमला किया था और पिस्टल भी अपने पास रखी थी. हालांकि, लोगों की भीड़ देखकर वे पिस्टल और अपना रिक्शा घटनास्थल पर ही छोड़कर भाग निकले थे और पुलिस से बचने के लिए अलग-अलग शहरों में छिपकर रह रहे थे.
दोनों आरोपी विनोबा झुग्गी-झोपड़ी में रहते थे, जिसका भी वर्षों पहले डिमोलिशन हो जाने के कारण आरोपियों के निवास का अस्तित्व ही मिट गया था, जिससे पुलिस के पास उनका कोई सुराग नहीं था.
हालांकि, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने शून्य से कड़ियां जोड़ीं, पहले झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले 200 से अधिक लोगों से पूछताछ की और अंततः प्रयागराज से संतोष राजबहादुर यादव और उसके भाई संतोष उर्फ शियु यादव को दबोच लिया है.
सूरत पुलिस SOG के डीसीपी राजदीप सिंह नकुम ने बताया कि आरोपी वराछा पुलिस स्टेशन के गंभीर अपराध में 21 साल से वॉन्टेड थे. टेक्निकल सर्विलांस और भेष बदलकर की गई कार्रवाई के कारण पुलिस को यह बड़ी सफलता मिली है. आरोपियों को अब अदालत में पेश कर आगे की कार्रवाई की जा रही है.