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ऐसे काम करता है ISI और हाफिज सईद का आतंकी कॉल सेंटर

खुफिया सूत्रों के हवाले से ख़बर है कि जमात-उद-दावा के सरगना हाफिज़ सईद ने सरहद के उस पार बॉर्डर के बेहद करीब एक कॉल सेंटर बना रखा है. ये आतंकियों का कॉल सेंटर है, जिसके ज़रिए राजस्थान में बड़े पैमाने पर फोन करके लोगों को जासूस बनाने की साज़िश चल रही है.

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इंटरनेट पर बना टेरर प्लान
इंटरनेट पर बना टेरर प्लान

आईएसआई और लश्कर चीफ हाफिज सईद ने मिलकर ऐसा कॉल सेंटर बनाया है, जो जमीन के बजाय इंटरनेट पर टेरर प्लान को आगे बढ़ाएगा. हाफिज और आईएसआई अब हाईटेक होकर आतंकी हमले से पहले पूरी प्लानिंग करने का मंसूबा बना रहे हैं. जम्मू-कश्मीर में भारतीय सीमा पर तैनात देश के जांबाज़ों ने सर्दियों के दौरान घुसपैठ को लगभग पूरी तरह नाकाम कर रखा है. ऐसे में आतंकियों ने घुसपैठ के बजाय जासूसी के हथियार से हमला करने की साजिश रची है. इसके लिए ऐसी जगह को चुना है, जहां आसानी से किसी को शक नहीं हो सकता.

खुफिया सूत्रों के हवाले से ख़बर है कि जमात-उद-दावा के सरगना हाफिज़ सईद ने सरहद के उस पार बॉर्डर के बेहद करीब एक कॉल सेंटर बना रखा है. ये आतंकियों का कॉल सेंटर है, जिसके ज़रिए राजस्थान में बड़े पैमाने पर फोन करके लोगों को जासूस बनाने की साज़िश चल रही है. राजस्थान के जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर जैसे तमाम शहरों में सीमा से सटे इलाकों में लोगों से संपर्क किया जा रहा है. आतंकी कॉल सेंटर के जरिए लोगों से फोन पर बात करके खुफिया जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती है.

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लश्कर जैसे आतंकी संगठन के सरगना हाफिज़ सईद ने बाकायद साइबर सेल बना ली है. इसमें काम करने वाले लोग राजस्थान में बॉर्डर के करीब रहने वालों को फोन करते हैं. भारत में रहने वालों से एक दिन में कई-कई बार बातचीत करते हैं. सेना और पुलिस के बारे में खुफिया जानकारी मांगते हैं. यह आतंकी साइबर सेल 24 घंटे का करता है. इसको आतंकी हमलों और उसके प्रचार के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. 26 और 27 दिसंबर को लाहौर में आतंकी साइबर सेल की मीटिंग भी रखी गई थी. लश्कर-ए-तैयबा ने मोबाइल ऐप भी बनाया है.


सीमापार से भारत के सीमावर्ती जिले जैसलमेर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर, बीकानेर और हनुमानगढ़ में रोजाना 4 से 5 हजार फोन कॉल आते हैं. ये सभी फोन कॉल जासूसी के लिए किए जाते हैं. सरहद पार से फोन करने वाले लोग भारतीय आर्मी, एयरफोर्स, बीएसएफ, राजस्थान सरकार के बारे में जानकारी मांगते हैं. कई बार सेना, एयरफोर्स और बीएसएफ के ठिकानों पर भी फोन किया जाता है. जवानों को कई तरह का लालच दिया जाता है. सुबह से रात तक लगातार अलग-अलग नंबर्स पर कॉल किया जाता है. अक्सर कर्नल या ब्रिगेडियर बनकर बातचीत की जाती है.


टेलिकॉम से जुड़े अफसरों का मानना है कि पाकिस्तान से आने वाली 99 फीसदी कॉल्स में में उन्हें नाकामी ही मिलती है. लेकिन अगर एक शख्स भी उनके झांसे में आ गया तो वो उसे अपना एजेंट बना लेते हैं. सरहद के पार भारतीय सीमा के बेहद करीब पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के कॉल सेंटर से फोन करने वाले लोग भारतीय फौजों को धोखा देने की कोशिश करते हैं. वो फोन पर खुद को भारतीय सेना का अफसर बताकर रौब जमाते हैं और फिर खुफिया जानकारी हासिल करने की साजिश बनाते हैं. कभी-कभी दोस्ती और लॉटरी के नाम पर भी अपना जाल बिछाते हैं.

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