कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) के दफ्तर से रिटायर एक अधिकारी को डिजिटल अरेस्ट कर करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है. पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को पुणे से गिरफ्तार किया है. आरोपियों ने पीड़ित को डराकर डिजिटल अरेस्ट किया और उनसे 2 करोड़ 13 लाख रुपये की ठगी को अंजाम दिया. फरीदाबाद पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 256 सिम कार्ड भी बरामद किए हैं.
पुलिस की गिरफ्त में आए तीनों आरोपी वही हैं, जिन्होंने CAG से रिटायर अधिकारी इंद्र कुमार को अपने जाल में फंसाया था. आरोपियों ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर उन्हें डराया और भारी रकम ट्रांसफर करवा ली. इस घटना के बाद पीड़ित ने साइबर क्राइम थाना बल्लभगढ़ में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की.
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शिकायत के बाद पुलिस की त्वरित कार्रवाई
पुलिस के अनुसार, 30 जनवरी को पीड़ित इंद्र कुमार ने साइबर क्राइम थाना बल्लभगढ़ में शिकायत दी थी. शिकायत मिलते ही पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बैंक खातों में ट्रांसफर हुई रकम में से 1 करोड़ 25 लाख रुपये फ्रीज करा दिए. इसके बाद पुलिस टीम ने तकनीकी जांच और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू की.
जांच के दौरान पुलिस को गिरोह के ठिकाने की जानकारी मिली, जिसके बाद पुणे में दबिश देकर तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस ने आरोपियों के पास से ठगी में इस्तेमाल होने वाले कई उपकरण भी बरामद किए हैं.
कॉल कनवर्टर और सिम बॉक्स से देते थे वारदात को अंजाम
साइबर क्राइम इंचार्ज (बल्लभगढ़) जसवंत सिंह ने बताया कि आरोपी अंतरराष्ट्रीय कॉल को कॉल कनवर्टर की मदद से लोकल कॉल में बदल देते थे. इसके जरिए वे पीड़ितों को भरोसे में लेकर ठगी करते थे. पुलिस ने इनके पास से कॉल कनवर्टर, सिम बॉक्स, कॉलिंग डिवाइस और करीब 256 सिम कार्ड बरामद किए हैं.
उन्होंने बताया कि आरोपियों से पूछताछ जारी है और इससे गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी के अन्य मामलों का खुलासा होने की संभावना है. अदालत ने इस मामले में दो आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि एक आरोपी को पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया है.