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मौत के सामने जिंदगी की आखिरी जद्दोजहद

मंगलवार दोपहर दिल्ली के चिड़ियाघर में 22 साल का एक नौजवान अचानक सफेद बाघ के बाड़े में जा गिरता है. छह साल के उस बाघ का नाम विजय था. अब बाड़े के अंदर मकसूद और विजय दोनों आमने-सामन थे. जान बचने की कोई सूरत नजर नहीं आ रही थी. ऐसे में मकसूद बस पहली और आखिरी कोशिश करता है.

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मंगलवार दोपहर दिल्ली के चिड़ियाघर में 22 साल का एक नौजवान अचानक सफेद बाघ के बाड़े में जा गिरता है. छह साल के उस बाघ का नाम विजय था. अब बाड़े के अंदर मकसूद और विजय दोनों आमने-सामन थे. जान बचने की कोई सूरत नजर नहीं आ रही थी. ऐसे में मकसूद बस पहली और आखिरी कोशिश करता है. वो बाघ के सामने दोनों हाथ जोड़ देता है और फिर पूरे पांच मिनट तक दम साधे ऐसे ही हाथ जोड़े रहता है.

खौफ में लिपटी बेबसी का आलम देखिए. ठीक मौत के मुंह के सामने बैठ कर भी जिंदगी के लिए आखिरी जद्दोजहद. पता है कि बाघ इंसानी जुबान नहीं समझता, लेकिन क्या पता हाथ जोड़ने का मतलब समझ जाए. फासला कुछ इंच का ही था. लिहाजा जान बचाने का बस यही आखिरी तरीका उसे सूझा और उसने बाघ के आगे दोनों हाथ जोड़ दिए. लेकिन पांच मिनट बाद तस्वीर बदल गई. बाघ नहीं माना. उसने अपना जानवरपन दिखा ही दिया. पांच मिनट बाद बाघ उसपर झपटता है. उसकी गर्दन दबोचता है और उसे दौड़ाते हुए लेजाकर एक जगह फेंक देता है.

बैलेंस बिगड़ा या जानबूझकर कूदा मकसूद
रोज की तरह दिल्ली के चड़ियाघर में सैकड़ों लोग मौजूद थे और उन्हीं के बीच मौजूद ता दिल्ली के आनंद पर्वत इलाके का रहने वाला 22 साल का मकसूद. 12वीं का छात्र मकसूद उस वक्त सफेद बाघ के बाड़े के पास था. चश्मदीदों की मानें तो बाड़े के करीब कुछ देर तक तो मकसूद ठीकठाक खड़ा था. फिर अचानक पता नहीं उसे क्या हुआ कि वो बाड़े के ऊपर चढ़ गया. बाड़े के ऊपर चढ़ने के बाद शायद उसका बैलेंस बिगड़ गया या फिर चप्पल फिसल गई, जिसकी वजह से अपना संतुलन खो बैठा और सीधे दूसरी तरफ बाघ के बाड़े में जा गिरा. हालांकि चिड़ियाघर के एक कर्मचारी के मुताबिक मकसूद जानबूझ कर बाड़े के अंदर कूदा था.

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वजह जो भी हो. बाड़े के अंदर उस वक्त बाघ टहल रहा था. मकसूद अंदर गिरा, बाघ की नजर उसपर पड़ी और वह फौरन मकसूद के करीब आ गया. ये मंजर देखकर वहां मौजूद लोगों की चीखें निकल पड़ीं. बाड़े के अंदर बाघ के सामने किसी के जाने की हिम्मत नहीं थी और मकसूद को बाघ से बचाने के लिए चिड़ियाघर का कोई कर्मचारी भी वहां नहीं था.

बाघ को अपने बेहद करीब देख मकसूद की जान अब हलक में अटक चुकी थी. लोग भी दम साधे ये मंजर देख रहे थे. कुछ फोटो भी खींच रहे थे. पांच मिनट तक मकसूद और बाघ दोनों आमने-सामने बैठे रहते हैं. लेकिन फिर चिड़ियाघर में हर तरफ चीख-पुकार मच जाती है. पांच मिनट तक बाघ मकसूद को बस घूरता रहता है. लेकिन पांच मिनट बाद अचानक एक पत्थर बाघ को लगता है और वो गुस्से में आ जाता है. ये पत्थर बाड़े के बाहर खड़ी भीड़ ने दरअसल बाघ को भगाने के लिए मारा था. लेकिन सवाल ये उठता है कि पंच मिनट तक चिड़िय़ाघर के कर्मचरियों के पास मकसूद को बचाने का मौका था, फिर वो क्यों नहीं बचा पाए?

दिमागी रूप से बीमार था मकसूद
खबर ये भी आ रही है कि मकसूद दिमागी रूप से बीमार था और उसका इलाज चल रहा था. चश्मदीदों की मानें तो पत्थर लगते ही बाघ को गुस्सा आ गया और उसने उसी वक्त मकसूद पर हमला कर दिया. बाघ ने सीधे मकसूद की गर्दन पर झपट्टा मारा और उसकी गर्दन मंह में दबा कर गुस्से में इधर-उधर भागने लगा. इस दौरान मकसूद ने बाघ के चंगुल से बचने की तमाम कोशिश की, लेकिन ये कोशिश मुश्किल से पांच सेकेंड की थी.

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मकसूद की मौत के बाद चिड़ियाघर के स्टाफ भागकर मौके पर आए और किसी तरह बाघ को उसके कमरे में पहुंचाया. मकसूद की लाश बाड़े से निकाली गई. जब मकसूद बाड़े के अंदर गिरा था तब वहां चिड़ियाघर का कोई भी सुरक्षा कर्मचारी मौजूद नहीं था. लोग खुद ही चीख-पुकार या पत्थर मारकर बाघ को मकसूद से अलग करने की कोशिश कर रहे थे.

हालांकि, चिड़ियाघर ने एक बयान जारी कहा है कि बाघ के बाड़े के पास सुरक्षा गार्ड मौजूद था. उसी ने मकसूद को बाड़े से दूर रखने की कोशिश भी की थी. लेकिन बाद में मकसूद दूसरी तरफ से बाड़े के ऊपर चढ़ गया. बयान में ये भी कहा गया है कि मकसूद के बाड़े में गिरते ही अलार्म भी बजाया गया था. फिलहाल मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा कि गलती किसकी थी. मकसूद की या फिर चिड़ियाघर की?

सवाल जिनके जवाब जरूरी हैं
मकसूद अब हमारे बीच नहीं है. लेकिन उसकी मौत कई सवाल छोड़ गई है-
जब नौजवान बाघ के बाड़े में हद से ज्यादा तांक-झांक कर रहा था, तो उसे वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने रोकने की कोशिश क्यों नहीं की?
जब नौजवान अंदर गिरा, तो सुरक्षाकर्मियों ने वहां मौजूद लोगों को हटा कर ज़ू प्रशासन के बड़े अधिकारियों को फौरन इसकी इत्तिला क्यों नहीं दी?
जू प्रशासन के अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर लड़के को बचाने की कोशिश क्यों नहीं की?
लोगों को शोर मचाने और बाघ को पत्थर मारने से क्यों नहीं रोका गया?
बाघ को ट्रांकुलाइजर देकर बेहोश कयों नहीं किया गया?

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रीवा से यहां लाए गए छह साल के सफेद बाघ के पंजे में आकर अब एक शख्स की जान चली जाने के बाद जू प्रशासन सारे कायदे कानून मानने की बात कह रहा है. हालांकि, चश्मदीद इससे इनकार कर रहे हैं.

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