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J-K: पुलिस जवानों पर अटैक ने पुलवामा के जख्म किए ताजा, एक ही पैटर्न का हमला

पुलिस जवानों की बस पर फायरिंग करके चकमा देकर भागने का तरीका बताता है कि आतंकियों को जवानों के पल-पल के मूवमेंट की जानकारी रही होगी. इस आतंकी वारदात से 14 फरवरी 2019 में हुए पुलवामा अटैक के जख्म ताजा हो गए हैं.

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संसद पर हुए हमले की 20वीं बरसी पर इस अटैक को अंजाम दिया गया. संसद पर हुए हमले की 20वीं बरसी पर इस अटैक को अंजाम दिया गया.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 2019 में हुआ था पुलवामा अटैक
  • सशस्त्र पुलिस बल की 9वीं वाहिनी पर हमला
  • 2001 में हुआ था संसद भवन पर हमला

श्रीनगर के जेवन के पास आतंकियों ने सशस्त्र पुलिस बल के जवानों से भरी बस पर हमला बोल दिया. सोमवार को फायरिंग की इस वारदात में जम्मू-कश्मीर पुलिस के तीन लोग शहीद हो गए हैं. जबकि 11 घायल हैं. 

गौर करने लायक बात यह है कि भारत की संसद पर हुए हमले की 20वीं बरसी पर इस अटैक को अंजाम दिया गया. बस पर तीनों तरफ से फायरिंग करके चकमा देकर भागने का तरीका बताता है कि आतंकियों को जवानों के पल-पल के मूवमेंट की जानकारी रही होगी. इस आतंकी वारदात से 14 फरवरी 2019 में हुए पुलवामा अटैक के जख्म ताजा हो गए हैं. जानिए, आतंकियों ने पुलवामा में जवानों से भरी बस पर कैसे किया था हमला...

तारीख- 14 फरवरी (गुरुवार) 2019. समय- सुबह 3:30 बजे

स्थान- सीआरपीएफ ट्रांजिट कैंप, जम्मू

सीआरपीएफ के जवानों को जम्मू ट्रांजिट कैंप से श्रीनगर ले जाया जाना था. CRPF की 180वीं बटालियन के असिस्टेंट कमांडेंट मनोज कुमार की अगुवाई में 78 गाड़ियों का काफिला ट्रांजिट कैंप से तड़के साढ़े तीन बजे रवाना हुआ था. आमतौर छुट्टियों से लौटने वाले या ट्रांसफर और पोस्टिंग वाले करीब 500 से 800 जवानों का जम्मू और श्रीनगर के बीच हर दिन आना-जाना होता है. मगर पिछले 4 दिनों से भारी बर्फबारी के चलते जम्मू नेशनल हाइवे बंद था, लिहाजा ट्रांसफर पोस्टिंग और छुट्टियों से लौटे जवानों की तदाद बढ़ती गई और वो जम्मू में ही फंसे रह गए. यही वजह है कि रास्ता खुलते ही एक साथ 2547 जवानों को 78 गाड़ियों के काफिले में श्रीनगर के लिए रवाना किया गया.

दोपहर- 2:15 मिनट

स्थान- ट्रांजिट कैंप, काजीकुंड

लगभग 11 घंटे का सफर करने के बाद सीआरपीएफ के जवानों का काफिला काजीकुंड ट्रांजिट कैंप पहुंचता हैं, यहां से श्रीनगर 73 किमी दूर है. करीब 14 गाड़ियां काजीकंड में ही रुक गईं और अन्य दो वाहनों में तकनीकी खराबी के कारण उसमें बैठे जवानों को दूसरी गाड़ियों में शिफ्ट कर दिया गया. जबकि 23 जवान काजीकुंड ट्रांजिट कैंप में ही रुक गए, क्योंकि उनकी ड्यूटी वहीं थी. वहीं, काजीकुंड से काफिले में 16 और गाड़ियां शामिल हो गईं. 

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दोपहर- 2:38 मिनट

अब सीआरपीएफ जवानों की गाड़ियों का काफिला अपनी आखिरी मंजिल श्रीनगर के लिए निकल पड़ता है. जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाइवे पर कई सर्विस रोड भी हैं जो छोटे-मोटे जिलों और इलाकों को नेशनल हाइवे से जोड़ती हैं. 

दोपहर- 3:33 मिनट

काफिले में शामिल गाड़ियां अब पुलवामा के गोरीपुरा इलाके से गुजर रही थीं. कतार में चल रही गाड़ियों में पांचवें नंबर की बस जैसे ही हाइवे के माइलस्टोन-272 पर पहुंचती है, अचानक सर्विस लेन में खड़ी एक टाटा सूमो गाड़ी बेहद तेजी से हाइवे पर आ जाती है और इसी बस से टकरा जाती है. टक्कर होते ही एक जबरदस्त धमाका होता है. आसपास की गाड़ियों में बैठे जवान कुछ समझ पाते कि इससे पहले ही घात लगाकर बैठे आतंकी उन पर फायरिंग शुरू कर देते हैं. लेकिन जवाबी हमले के बाद कायर दहशतगर्द भाग निकलते हैं. उधर, 350 किलो विस्फोटक से भरी टाटा सूमो जिस बस से भिड़ी, उसमें बैठे 42 जवान मौके पर ही शहीद हो गए. जबकि इस बस के ठीक पीछे वाली गाड़ी में सवार ज्यादातर जवान जख्मी हो गए, जिनमें से बाद में दो को नहीं बचाया जा सका.  

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अवंतिपुरा के करीब सर्विस लेन पर यह टाटा सूमो गाड़ी बीती रात से खड़ी थी. इसी गाड़ी में जैश-ए-मोहम्मद का आतंकी आदिल अहमद डार सवार था. आतंकी को सीआरपीएफ के इस काफिले के गुजरने की शायद पहले से ही पुख्ता जानकारी थी. पिछले साल एक वीडियो जारी कर 20 साल के आतंकी आदिल ने हमले की बात कबूल की थी और बताया कि वह साल 2018 में ही जैश में शामिल हुआ था ताकि पुलवामा हमले को अंजाम दे सके. बता दें कि हमले में आतंकी आदिल का सहयोग करने वाले कामरान उर्फ गाजी राशिद को हमले के चार दिन बाद ही सुरक्षाबलों ने मार गिराया था.

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मोदी सरकार ने इस हमले के 12 दिनों के भीतर पाकिस्तान के बालाकोट में एयरस्ट्राइक कर जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को तबाह कर दिया था. सुरक्षा एजेंसियों की तय प्लानिंग के मुताबिक, 26 फरवरी 2019 की रात लड़ाकू विमानों ने देश के अलग-अलग हिस्सों से उड़ान भरके तड़के पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश के अड्डों को नेस्तनाबूद कर दिया था.

 

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