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प्यार में फर्क, 48 घंटे की साजिश और तीन कत्ल... CCTV से मिले सुराग ने खोला कातिल बेटे का राज

अक्सर आप लोगों के जेहन में एक ख्याल हमेशा सवाल बन कर आता है कि कातिल कैसा होता है? कत्ल के बाद उसका बर्ताव कैसा होता है और पकड़े जाने के बाद वो कैसा हो जाता है? इस वारदात के तीन मंजर या यूं कहें कि तीन तस्वीरें कत्ल के इस मामले की एक तरह से केस स्टडी है.

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अपने परिवार का खात्मा करने वाला अर्जुन CCTV की वजह से पकड़ा गया
अपने परिवार का खात्मा करने वाला अर्जुन CCTV की वजह से पकड़ा गया

Delhi Triple Murder Conspiracy Disclosure: उस लड़के की उम्र महज 20 साल है. उसका नाम अर्जुन है. उस वक्त उस पर पहाड़ टूट पड़ा, जब किसी अनजान कातिल ने उसके मां-बाप और बहन तीनों की हत्या कर दी. वो अपने परिवार में इकलौता जिंदा बचा. गम इतना बड़ा था कि आंसू थम नहीं रहे थे. आस पड़ोस के लोग लगातार उसे तसल्ली दे रहे थे. पर वो चुप नहीं हो पा रहा था. लगातार रो रहा था. उसकी तस्वीरें देखने वाले भी ग़मज़दा हो गए.

ग़मज़दा माहौल
मगर वक्त का पहिया कुछ घंटे आगे बढ़ता है. तस्वीर फिर बदल जाती है. ट्रिपल मर्डर की इस वारदात के कुछ घंटे बाद मीडिया के लोग भी मौका-ए-वारदात पर पहुंचते हैं. वे लोग अर्जुन से कुछ सवाल पूछना चाहते थे. लेकिन अर्जुन का मन उस वक्त जवाब देने का नहीं था. वहां भी ग़मज़दा अर्जुन उदास दिखाई देता है. 

दो तस्वीरें, एक ही टी-शर्ट
इसके बाद फिर एक तस्वीर सामने आती है. जिसमें पुलिस वाले दिख रहे हैं और बीच में एक नकाबपोश खड़ा है. पर सवाल था कि तब अर्जुन कहां है? तो ध्यान देने पर पता चलता है कि अर्जुन ने पहली तस्वीरों में जो टी शर्ट पहनी थी, वही टी शर्ट उस नकाबपोश ने भी पहन रखी थी. जी हां, वो नकाबपोश कोई और नहीं बल्कि वही अर्जुन था. जिसे थोड़ी देर पहले सबने रोते हुए और फिर सवालों को टालते हुए देखा था.

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ऐसा होता है कातिल!
अक्सर आप लोगों के जेहन में एक ख्याल हमेशा सवाल बन कर आता है कि कातिल कैसा होता है? कत्ल के बाद उसका बर्ताव कैसा होता है और पकड़े जाने के बाद वो कैसा हो जाता है? इस वारदात के तीन मंजर या यूं कहें कि तीन तस्वीरें कत्ल के इस मामले की एक तरह से केस स्टडी है. उन तीन तस्वीरों के जरिए आप कातिल की बॉडी लैंग्वेज को आसानी से परख और पकड़ सकते हैं.

दो दिनों तक बनाता रहा प्लान
जी हां, पहले कैमरे पर रोने वाला. फिर मन का हवाला देकर सवालों को टालने वाला और उसके बाद दिल्ली पुलिस के बीचों-बीच नकाब पहने खड़ा. वही अर्जुन था, जिसने अपने हाथों से अपनी मां, बाप और बहन का एक साथ क़त्ल किया. ये वो बेटा और भाई है, जो अपने ही घर में बैठ कर पूरे दो दिनों तक ये प्लान बनाता रहा कि वो कैसे अपने मां-बाप और बहन को मारेगा.

48 घंटे की साजिश
कमाल देखिए कि उन्हीं मां-बाप और बहन के साथ ये उसी घर में पूरे दो दिन रहा. उनके साथ बातें की, मां के हाथ का खाना खाया. बहन से मज़ाक किया. पिता से डांट खाई. पर किसी को ये भनक लगने नहीं दी कि इस घर में एक बेटे और भाई के हाथों ही 48 घंटे बाद तीन कत्ल होने वाले हैं. चलिए आपको सिलसिलेवार दिल्ली के इस ट्रिपल मर्डर की पूरी कहानी बताते हैं. 

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4 दिसंबर 2024, सुबह पौने 7 बजे, नेब सराय - दिल्ली
सेना से रिटायर हुए अफसर राजेश कुमार का घर नेब सराय इलाके में मौजूद है. राजेश कुमार कुछ वक्त के लिए एनएसजी में कमांडो भी रहे थे. 2017 में वो सेना से रिटायर हो गए. घर में उनकी पत्नी कोमल, 23 साल की बेटी कविता और 20 साल का बेटा अर्जुन रहा करते थे. कविता और अर्जुन दोनों ही अभी पढ़ाई कर रहे थे. कविता में पढ़ाई में बेहद तेज़ थी, जबकि अर्जुन पढ़ता तो दिल्ली यूनिवर्सिटी में था, लेकिन शौक बॉक्सिंग का था. स्पोर्ट्स कोटे से ही उसको कॉलेज में दाखिला भी मिला था. लेकिन पिता राजेश कुमार चाहते थे कि बेटा पढ़ लिख कर कोई अच्छी नौकरी करे. इसी बात को लेकर अक्सर वो अर्जुन को डांटते भी थे. 

मॉर्निंग वॉक पर गया था अर्जुन
चार दिसंबर की सुबह साढ़े 5 बजे रोजाना की तरह अर्जुन मॉर्निंग वॉक पर जिम बैग के साथ घर से निकला. सवा घंटे बाद लगभग पौने 7 बजे जब वो घर लौटा, तो उसकी चीखें निकल गईं. घर के अंदर ग्राउंड फ्लोर पर बहन और मां जबकि फर्स्ट फ्लोर पर पिता की लाश पड़ी थी. बेड और फर्श पर हर तरफ खून ही खून था. वो चीखता हुआ घर से बाहर आया. चीख सुन कर पड़ोसी भी पहुंचे. अर्जुन रो-रो कर उन्हें घर के अंदर के मंजर बता रहा था.

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एक घर और तीन कत्ल
बाद में किसी पड़ोसी ने पुलिस को फोन किया. पुलिस मौके पर आई. घर के अंदर गई. मंजर डरावना था. राजेश कुमार उनकी पत्नी कोमल और बेटी कविता का गला किसी तेजधार हथियार से काटा गया था. शुरुआत में पुलिस को यही लगा कि चूंकि अर्जुन वारदात के वक्त मॉर्निंग वॉक पर निकल गया था, इसलिए उसकी जान बच गई. चूंकि दिल्ली के एक घर के अंदर एक साथ तीन-तीन कत्ल हुए, लिहाजा पुलिस फौरन हरकत में आती है. तफ्तीश शुरू हो जाती है. जांच की शुरुआत घर के अंदर से होती है.

ना चोरी, ना लूटपाट
लेकिन घर की तलाशी लेने पर पता चलता है कि ऐसा कोई भी कीमती सामान नहीं, जो घर से गायब हो. यानी मामला लूटपाट का तो कतई नहीं था. तो फिर कत्ल की वजह क्या थी? अब पुलिस तफ्तीश के सबसे कारगर हथियार सीसीटीवी कैमरे की तरफ अपनी जांच की दिशा घुमाती है. नसीब अच्छा था कई ऐसे कैमरे थे, जो राजेश कुमार के घर की निगरानी कर रहे थे. पुलिस ने तीन दिसंबर की रात से लेकर चार दिसंबर की सुबह तक के सारे सीसीटीवी कैमरे खंगाल डाले. जब उन कैमरों का नतीजा सामने आया, तो पुलिस को उनका कातिल मिल चुका था. 

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सीसीटीवी ने खोला कातिल का राज
दरअसल, कैमरे का सच ये था कि तीन दिसंबर की रात से लेकर 4 दिसंबर की सुबह तक इस घर के अंदर सिर्फ और सिर्फ 4 ही लोग थे. रात से लेकर सुबह तक इन चारों के अलावा ना कोई पांचवां शख्स के अंदर आया, न बाहर गया. सुबह साढ़े पांच बजे घर से इकलौता शख्स जो बाहर निकला, वो इसी परिवार का बेटा अर्जुन था. सीसीटीवी कैमरे को लेकर अब पुलिस को यकीन हो चला था कि कातिल कोई और नहीं बल्कि घर का बेटा अर्जुन ही है. लेकिन इसके बावजूद पुलिस को इस बात यकीन ही नहीं हो रहा था कि सिर्फ 20 साल का अर्जुन अपने मां-बाप और बहन को एक साथ क्यों और केसे मार सकता है? 

पुलिस को मिल गया कातिल का मोटिव
इस सवाल का जवाब जानने के लिए अब पुलिस रिश्तेदारों और पड़ोसियों से पूछताछ करती है. जवाब और वजह दोनों मिल जाते हैं. अब उसी यकीन के साथ पुलिस अर्जुन को गिरफ्तार कर लेती है. अर्जुन अब पुलिस के कब्जे में था. जरा सा वक्त बीता और अर्जुन ने न सिर्फ अपने ही हाथों अपने मां-बाप और बहन के कत्ल की बात कबूल कर ली, बल्कि फिर पूरी कहानी सुनाई. एक ऐसी कहानी जिसे सुन कर किसी भी मां-बाप या बहन का कलेजा थर्रा जाए.

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अर्जुन के साथ सख्ती करते थे उसके पिता
असल में इस कहानी की शुरुआत होती है, भाई और बहन के बीच के प्यार में मां बाप के फर्क को लेकर. अर्जुन को बचपन से ही लगता था कि उससे तीन साल बड़ी बहन कविता से उसके मां बाप उसकी बनिस्बत ज्यादा प्यार करते हैं. फिर बीच में पढ़ाई आ गई. कविता बचपन से ही पढ़ने लिखने में बेहद तेज थी. जबकि अर्जुन बचपन से ही एक बॉक्सर बनना चाहता था. यानी पढ़ाई के मुकाबले उसका ध्यान खेल कूद पर ज्यादा था. पिता चूंकि आर्मी में थे, लिहाजा बच्चों की परवरिश को लेकर थोड़े सख्त थे. वो चाहते थे कि पढ़ लिख कर कोई अच्छी जॉब करे और बस इसी वजह से वो ना अक्सर अर्जुन को डांटते, बल्कि उसकी पिटाई भी कर देते थे. 

अर्जुन को नागवार गुजरता था फर्क
इसी माहौल में अर्जुन और उसकी बहन धीरे-धीरे बड़े होते हैं. लेकिन प्यार का ये फर्क अर्जुन की निगाह में अब भी कायम था. कई बार गुस्से में उसके पिता उससे ये भी कहते कि उनके पास जो भी जमा पूंजी है, वो सब कविता को दे देंगे. ये बात भी अर्जुन को नागवार गुजरती थी. अब धीरे धीरे उसके मन में अपने पिता के लिए गुस्सा ऊबल रहा था. तभी 2 दिसंबर को कविता का 23वां जन्म दिन आता है. घर वाले कविता का बर्थ डे मनाते हैं. अर्जुन एक बार फिर कविता को लेकर उमड़ रहे अपने मां बाप का प्यार देखता है और खुद को दरकिनार समझता है. 

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ऐसे रची खूनी साजिश
बदनसीबी से ये वही तारीख थी, यानी 2 दिसंबर यानी बहन के जन्म का दिन, जब अर्जुन एक खौफनाक फैसला लेता है. फैसला... पिता को मार डालने का. पर फिर सोचता है कि पिता के साथ-साथ मां को भी मार दे. अब तक उसके जेहन में मां और बाप के ही कत्ल की बात थी. भाई बहन के बीच प्यार के बंटवारे के बावजूद वो अपनी बहन कविता को नहीं मारना चाहता था. लिहाजा, अब 2 दिसंबर से वो अपने मां-बाप के कत्ल की साजिश बुनने लगा. उसने तय किया कि वो कत्ल रात को तब करेगा जब मां बाप और बहन सो रहे हों. 

चुरा लिया था फौजी पिता का सर्विस नाइफ
पर उसे अंदाजा था कि पिता आर्मी में रहे हैं. लड़ सकते हैं. इसीलिए उसने प्लान बनाया कि वो एक ऐसा वार करेगा कि एक ही बार में काम पूरा हो जाए और पिता को बचने का मौका ही न मिले. कत्ल के लिए अर्जुन को अब एक तेज धार हथियार चाहिए था, उसे याद आया कि उसके पिता के पास एक सर्विस नाइफ है. जो बेहद तेज है. सबसे पहले चुपके से उसने उस नाइफ को चुराया. अब बस उसे कत्ल की तारीख चुननी थी. और उसने तारीख भी चुन ली. चार दिसंबर. 

दो दिन किया इंतजार
इस परिवार के लिए ये तारीख भी बेहद खास थी. क्योंकि चार दिंसबर को अर्जुन और कविता के मां-बाप यानी राजेश कुमार और कोमल की मैरिज एनिवर्सरी थी. अर्जुन अब 2 दिसंबर से ही चार दिसंबर के आने का इंतजार कर रहा था. उसके पास पूरे दो दिन थे. पर अगले दो दिनों तक वो घर में ऐसा ही दिखाना चाहता था, जैसे सबकुछ नॉर्मल है. इन दो दिनों में वो अपने पिता से नॉर्मल बात करता रहा. मां पर प्यार बरसाता रहा और बहन से हंसी मजाक भी करता रहा. अगले दो दिनों तक मां और बहन के हाथों के बने खाना भी खाया और फिर आखिरकार तीन दिसंबर की रात आ गई.

3 दिसंबर 2024, नेब सराय - दिल्ली
रात के 11 बज चुके थे. घर के चार में से तीन सदस्य सो चुके थे. मगर चौथा सदस्य यानी अर्जुन जाग रहा था. अब भी उसके जेहन में यही था कि वो सिर्फ मां और बाप का कत्ल करेगा. लेकिन तीन दिसंबर की रात उसे अचानक एहसास हुआ कि अगर वो अपनी बहन को भी मार दे, तो फिर जो कुछ भी जायदाद है, उसका वो इकलौता वारिस होगा. फिर उसे ये भी खयाल आया कि कत्ल एक हो या एक से ज्यादा, कानून की नजर में सब बराबर है. लिहाजा ऐन वक्त पर उसने बहन कविता को भी मारने का फैसला कर लिया. 

एक के बाद एक तीन कत्ल
इसके बाद जब उसे यकीन हो चला कि तीनों गहरी नींद में हैं, तो सबसे पहले उसने अपनी उसी बहन कविता का अपने पिता की सर्विस नाइफ से गला रेत डाला. कोई आवाज नहीं आई. इसके बाद खून से सने उसी चाकू को लेकर वो पहली मंजिल पर पहुंचा. पिता तब कमरे में अकेले सो रहे थे. मां वॉशरूम में थी. नींद में सो रहे अपने बाप के गले पर उसने पूरी ताकत से वही चाकू घुमा दिया. आवाज इस बार भी नहीं आई. अब वो वही चाकू हाथ में लिए वॉश रूम में मां के बाहर आने का इंतजार करने लगा. वो मां ही थी, जो अब तक जगी थी. जैसे ही वो वॉशरूम से बाहर आई, बिना मौका दिए अर्जुन ने तीसरी बार चाकू गर्दन पर घुमाया और मां फर्श पर गिर पड़ी. आवाज इस बार भी नहीं आई थी.

तीनों लाशों को किया था चेक
तीन कत्ल करने के बाद बारी-बारी से वो हरेक लाश के करीब गया सिर्फ ये देखने के लिए कि किसी की सांसें तो नहीं चल रही. इसके बाद जब उसे यकीन हो गया कि सब मर चुके हैं, तो वो तसल्ली से घर के एक कोने में बैठ गया. अब अर्जुन को सुबह के होने का इंतजार था. सुबह साढ़े पांच बजे जिम बैग उठा कर अर्जुन घर से कुछ यूं निकला, जैसे कुछ हुआ ही ना हो. लेकिन कहते हैं ना सबके गुनाहों का हिसाब होता है. अब अर्जुन सलाखों के पीछे पहुंच चुका है और उसका हिसाब होना बाकी है. 

(दिल्ली से श्रेया चैटर्जी के साथ अमरदीप कुमार का इनपुट)

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