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ISIS के सफाए से पहले सुनाई दी तीसरे विश्वयुद्ध की आहट!

पेरिस को खून के आंसू रुलाने वाले आतंकवादी संगठन आईएसआईएस और उसके सरगना बगदादी से लड़ने वाले देश आपस में ही लड़ने लगे हैं. पहले तुर्की ने रूस का लड़ाकू विमान उड़ाया. फिर रूस ने भयंकर अंजाम की धमकी दी तो तुर्की की पीठ पर हाथ रखकर अमेरिका खड़ा हो गया. अब सवाल है कि क्या बगदादी से लड़ने वाले देश दुनिया के सामने तीसरे विश्वयुद्ध की आहट सुना रहे हैं.

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बगदादी से लड़ने वाले देश आपस में ही लड़ने लगे
बगदादी से लड़ने वाले देश आपस में ही लड़ने लगे

पेरिस को खून के आंसू रुलाने वाले आतंकवादी संगठन आईएसआईएस और उसके सरगना बगदादी से लड़ने वाले देश आपस में ही लड़ने लगे हैं. पहले तुर्की ने रूस का लड़ाकू विमान उड़ाया. फिर रूस ने भयंकर अंजाम की धमकी दी तो तुर्की की पीठ पर हाथ रखकर अमेरिका खड़ा हो गया. अब सवाल है कि क्या बगदादी से लड़ने वाले देश दुनिया के सामने तीसरे विश्वयुद्ध की आहट सुना रहे हैं.

जब यूरोप की तरफ बगदादी के खूनी पंजे बढ़े तो लगा कि दुनिया एकजुट होकर उसके आतंक का सफाया करेगी. सीरिया से इराक तक बगदादी के हर ठिकानों पर रूस से लेकर पेरिस और ब्रिटेन से लेकर अमेरिका तक के बम बरसने लगे. कहीं रक्का में फ्रांस के मिसाइल गोले बरसाने लगे. कहीं रूस के फाइटर विमान चुन-चुनकर आईएसआईएस के आतंकी ठिकानों को बर्बाद करने लगे. लगा अब बगदादी के दिन लद गए.

कुछ दिनों पहले जिस तुर्की में जी-20 के देशों ने एक साथ हाथ मिलाकर बगदादी के आतंक के सफाए की कसम खाई थी, वो कसम दस दिन में बिखर गई. अमेरिका और रूस एक दूसरे के खिलाफ तनकर खड़े हो गए. मंगलवार को सीरिया में रूस के एक वॉर प्लेन को तुर्की की मिलिट्री ने मार गिराया. आईएसआईएस के खिलाफ अपने मिशन में आई इस रुकावट से रूस बौखला गया. रूस के राष्ट्रपति ने इसे धोखा करार दिया.


पिछले दस दिनों से बगदादी जिंदगी के सबसे मुश्किल दिन देख रहा था, लेकिन दुनिया बंटी तो उससे बगदादी को राहत की सांस मिली होगी. इस हमले के बाद एक ओर रूस है, जिसके साथ सीरिया और इराक जैसे वो देश हैं, जो बगदादी के खिलाफ तो हैं, लेकिन अमेरिका के खिलाफ भी. दूसरी तरफ अमेरिका है, जिसके साथ तुर्की है, ब्रिटेन है और फ्रांस भी. अब सवाल ये है कि क्या अमेरिका और रूस में आतंक के खिलाफ लडाई से चूक जाएंगे.


याद दिलाते चलें कि तुर्की के ही अंताल्या शहर में जी-20 की बैठक में रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने एक बडा सनसनीखेज खुलासा किया था. पुतिन ने जी-20 के ही कई देशों पर बगदादी की मदद करने का आरोप लगाया था. अब बगदादी से लड़ाई करते वक्त जिस तरह अमेरिका के तेवर बदले हैं. तुर्की रूस के खिलाफ खड़ा है, उससे सवाल उठते हैं कि क्या दुनिया विश्व युद्ध की तरफ बढ़ रही है.


दरअसल अमेरिका सीरिया में ऐसी सरकार चाहता है जो उसके इशारे पर नाचती रहे. बगदादी के खिलाफ उसकी लड़ाई भी इसीलिए शक के घेरे में आ जाती है कि बगदादी को खड़ा करने में उसकी भूमिका मानी जाती है. जुलाई 2014 में ईरान के अखबार तेहरान टाइम्स को दिया गया एडवार्ड स्ननोडेन का इंटरव्यू इस लिहाज से अहम खुलासे करता है. स्नोडेन वही शख्स है जिसने 2013 में अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी के मकड़जाल का खुलासा किया था.


स्नोडेन के मुताबिक अमेरिका, ब्रिटेन और इजराइल ने मिलकर बगदादी के संगठन आईएस को मजबूत किया. इस प्लान को बीहाइव यानी मधुमक्खी का छत्ता कोड नेम दिया गया. इसका मकसद इजराइल के आस-पास वाले देशों में आतंकवाद की ऐसी ताकत खड़ी करना था, जिसमें इजराइल विरोधी देश उलझकर रह जाएं, और इजराइल सुरक्षित रहे. इजराइल ने खुद साल भर बगदादी को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी थी.


इस बीच बगदादी का ताजा कहर झेलने वाला फ्रांस अमेरिका और रूस के बीच झूल रहा है. वैसे तो फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद का अमेरिकी दौरा ये बताता है कि वो ओबामा के साथ मिलकर ही आतंक के खिलाफ लड़ाई लडना चाहते हैं. लेकिन ओलांद को भी ये गवारा नहीं कि वो जमीन पर उतरकर सीरिया में बगदादी के आतंकियों से लड़ें. इसीलिए रास्ता उनका भी वही होगा, जो रूस अपना रहा है.

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