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वाराणसीः 141 दिन बाद खुला काल भैरव का मंदिर, भक्तों ने किए दर्शन

कालभैरव मंदिर में प्रवेश के पहले भक्तों की थर्मल स्क्रीनिंग हो रही है. सैनिटाइजर के प्रयोग के बाद श्रद्धालुओं को मंदिर में एंट्री मिल रही है. बिना मास्क के मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं है.

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श्रद्धालुओं के लिए खुला काल भैरव मंदिर (फोटो-रोशन जायसवाल)
श्रद्धालुओं के लिए खुला काल भैरव मंदिर (फोटो-रोशन जायसवाल)

  • कोरोना संकट के चलते अभी तक बंद था मंदिर
  • मंदिर के गर्भगृह में भक्तों के प्रवेश पर अभी रोक

काशी के कोतवाल कहे जाने वाले बाबा कालभैरव का मंदिर कोरोना वायरस के चलते 141 दिनों बाद शुक्रवार को खुल गया. मंदिर को कोविड-19 के दिशानिर्देशों के तहत खोला गया है. लेकिन अभी भी मंदिर के गर्भगृह में भक्तों के प्रवेश पर रोक है. मंदिर अब से रोज मंगला आरती से रात 10 बजे तक खुला रहेगा.

लगभग एक महीने पहले मंदिरों को खोलने का निर्णय लिया गया था. तमाम मंदिर कोरोना के दिशानिर्देशों के मुताबिक खुलना शुरू हो गए हैं. इसमें द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा काशी विश्वनाथ का भी मंदिर आम भक्तों के लिए खोल दिया गया है. लेकिन इसके बावजूद वाराणसी के दो अन्य बड़े मंदिर बंद ही रहे. इसमें काल भैरव और संकटमोचन मंदिर शामिल था.

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अब लॉकडाउन और कोरोना की वजह से 22 मार्च के बाद 141 दिन बीतने पर काशी के कोतवाल कहे जाने वाले बाबा कालभैरव का मंदिर आम भक्तों के लिए खोल दिया गया. हालांकि मंदिर में कोरोना दिशानिर्देशों के तहत ही भक्तों का प्रवेश कराया जा रहा है.

mandir2_080720030722.jpgकोरोना दिशानिर्देशों के मुताबिक मिल रही एंट्री

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मंदिर में प्रवेश के पहले भक्तों की थर्मल स्क्रीनिंग हो रही है. सैनिटाइजर के प्रयोग के बाद श्रद्धालुओं को मंदिर में एंट्री मिल रही है. साथ ही बिना मास्क के भी मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं है. इसके अलावा मंदिर की साफ-सफाई भी 4-5 बार कराई जा रही है. मंदिर के गर्भगृह में श्रद्धालुओं का प्रवेश नहीं है. मंदिर के इतने लंबे समय बाद खुलने के सवाल पर पुजारी सुनील दुबे ने बताया कि कोरोना काल में सावन की भारी भीड़ से बचने के लिए एहतियात के तौर पर मंदिर बंद रखा गया था.

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