चीन दुनिया में आर्थिक तौर दूसरी सबसे बड़ी ताकत है. लेकिन एक संकट चीन को आर्थिक तरक्की की राह में लगातार पीछे धकेल रहा है. इस संकट से उबरने के लिए चीन संघर्ष भी कर रहा है. लेकिन कम होने के बजाय चीन के लिए चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं. दरअसल, पिछले करीब 5 साल से चीन की रियल एस्टेट मार्केट मंदी में है. इस मंदी की वजह से चीन के हाथ-पांव फूल रहे हैं.
मौजूदा समय में चीन का रियल एस्टेट सेक्टर अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है. प्रॉपर्टी की कीमतें गिर रही हैं, बिक्री कम हो रही है. डेवलपर्स के पास नकदी की समस्या है, क्योंकि पूरा सेक्टर कर्ज में डूबा है, अब तो स्थिति इतनी भयावह है कि कर्ज चुकाने के लिए भी कर्ज लेना पड़ रहा है.
घर खरीदने वाले गायब
साल 2025-26 के दौरान चीन में औसतन घरों की कीमतों में 5% से अधिक की गिरावट देखी गई. क्योंकि शहर-दर-शहर घर बनकर तैयार हैं, लेकिन खरीदार गायब हैं. सरकार समस्या को हल करने के लिए सक्रिय है, लेकिन संकट गहराता ही जा रहा है.
रियल एस्टेट कंपनी Evergrande, Country Garden के बाद अब China Vanke पर खतरा मंडराने लगा है. रियल एस्टेट (Real Estate) कंपनी China Vanke पर भी कर्ज का दबाव बढ़ता जा रहा है, और बॉन्ड भुगतान में मुश्किलें आ रही हैं. चीन की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी Evergrande एक तरह से पहले ही बर्बाद हो चुकी है, कंपनी को हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज से भी डीलिस्ट कर दिया गया है.
अब फिलहाल China Vanke गहरी वित्तीय समस्या से जूझ रहा है. मौजूदा दौर में ये सबसे मजबूत रियल एस्टेट कंपनी मानी जा रही थी. लेकिन कर्ज जाल में यह कंपनी भी फंस चुकी हैं. वांके को साल- 2025 में लगभग 82 अरब युआन (लगभग $11.8 बिलियन) का रिकॉर्ड घाटा हुआ है, जो पिछले साल की तुलना में करीब 65% अधिक है. बॉन्ड भुगतान के लिए समय बढ़ाने की नौबत आई. अब Vanke उस स्थिति में है, जहां वह डिफॉल्ट से बचने और अस्तित्व बनाए रखने की लड़ाई लड़ रही है.
कंपनी को बचाने में जुटी सरकार
कंपनी कर्ज पुनर्गठन पर भी बातचीत कर रही है, और बड़े बॉन्डों के भुगतान के लिए और अधिक समय मांग रही है. यानी कर्ज चुकाने के लिए कंपनी नया कर्ज ले रही है. लेकिन अब निवेशकों में चिंता इस बात को लेकर है कि वांके के बॉन्ड और शेयरों में गिरावट देखी जा रही है.
गौरतलब है कि चीन का रियल एस्टेट सेक्टर पिछले 5 साल से मंदी की चपेट में है. Vanke का संकट केवल उसकी कंपनी तक सीमित नहीं है. अगर यह डिफॉल्ट हो जाती है, तो बैंक, बॉन्ड होल्डर, रिटेल निवेशक और कंस्ट्रक्शन कंपनियां भी संकट में आएंगी.
China Vanke Co. Ltd. की स्थापना साल 1984 में चीन के शेन्जेन शहर में हुई थी. यह वह दौर था, जब चीन आर्थिक सुधारों की शुरुआत कर रहा था और निजी कंपनियों के लिए दरवाजे धीरे-धीरे खुल रहे थे. शुरुआत में Vanke एक ट्रेडिंग कंपनी थी, लेकिन जल्द ही इसने रियल एस्टेट में अवसर देखे और यही इसका भविष्य बन गया. 1990 के दशक से लेकर 2015 तक China Vanke चीन के रियल एस्टेट बूम की रीढ़ बन गई.
कंपनी ने मिडिल-क्लास हाउसिंग पर फोकस किया, समय पर प्रोजेक्ट डिलीवरी और कम कीमत इसकी पहचान बनी. 1991 में Vanke चीन की स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट होने वाली शुरुआती रियल एस्टेट कंपनियों में से एक बनी. यह लंबे समय तक चीन की सबसे भरोसेमंद प्रॉपर्टी कंपनी मानी जाती रही. 2016 के बाद Vanke ने तेजी से विस्तार किया. इसी दौरान Shenzhen Metro Group (सरकारी कंपनी) इसका बड़ा शेयरहोल्डर बना.
एक-एक कर रियल एस्टेट कंपनियां तबाह
बता दें, एक-एक करके चीन में रियल एस्टेट की बड़ी कंपनियां मुश्किलों में घिरती जा रही हैं. चीन में Country Garden निजी सेक्टर का सबसे बड़ा डेवलपर हुआ करता था, घरों की ताबड़तोड़ बिक्री होती थी. लेकिन बिक्री और प्रोजेक्ट डिलीवरी में गिरावट आई है. कंपनी में कर्ज का दबाव बढ़ गया.
चीन में रियल एस्टेट की बर्बादी की शुरुआत Evergrande कंपनी से हुई थी. अब यह कंपनी HKEX से डीलिस्ट हो चुकी है. Evergrande की असफलता ने चीन की रियल एस्टेट मंदी को सार्वजनिक कर दिया.
हालांकि मौजूदा समय सरकार Vanke को उबारने में जुटी है. लेकिन सरकार की ओर से सीधे बड़े पैमाने पर Vanke को सरकारी बेलआउट पैकेज नहीं दिया है. Vanke कुछ ऑनशोर बॉन्ड के भुगतान को बढ़ाने के लिए बॉन्ड होल्डरों से विस्तार की मंजूरी लेने की कोशिश कर रहा है, यह भी एक तरह की समर्थन प्रक्रिया है ताकि डिफॉल्ट टाला जा सके. चीनी शहरी प्रशासन ने मकान खरीद नियमों को सरल और ढील देने जैसे उपाय किए हैं, ताकि वास्तविक मांग को बढ़ावा मिल सके.
2021 में संकट की शुरुआत
साल 2021 में चीनी सरकार ने रियल एस्टेट सेक्टर पर 'Three Red Lines' नियम लागू किए, यानी आसानी से कर्ज नहीं. इसके बाद Evergrande जैसे बड़े डेवलपर्स गिरे और धीरे-धीरे दबाव Vanke तक भी पहुंच गया है. 2025 में Vanke ने दशकों का सबसे बड़ा घाटा दर्ज किया है. निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है. सीधे तौर पर इसका असर चीन की जीडीपी (China GDP) पर देखने को मिल रही है.