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अफगानिस्‍तान से छिड़ी जंग... अब आटे के लिए भी तरसेगा पाकिस्‍तान, US रिपोर्ट की गंभीर चेतावनी

अफगानिस्‍तान और पाकिस्‍तान के बीच युद्ध छिड़ चुकी है. इस बीच, अमेरिका की एक रिपोर्ट ने पाकिस्‍तान की नींद उड़ा दी है. रिपोर्ट का दावा है कि पाकिस्‍तान के गेहूं पैदावार में भारी गिरावट आने वाली है.

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आटे के लिए तरसेगा पाकिस्‍तान.  (Photo: File/ITG)
आटे के लिए तरसेगा पाकिस्‍तान. (Photo: File/ITG)

पाकिस्‍तान में इस बार गेहूं के उत्‍पादन में कटौती होने का अनुमान है. अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की रिपोर्ट बताती है कि पिछले साल की तुलना में इस बार पाकिस्तान में 20-22 लाख टन कम गेहूं पैदा होगा. इस अनुमान ने पाकिस्तानी हुक्मरानों में चिंता पैदा कर दी है. समस्‍या बहुत बड़ी है, क्योंकि इस देश की अधिकांश आबादी गेहूं के आटे और उससे बने प्रोडक्ट पर निर्भर है. रोटी, डबल रोटी, खमीरी रोटी और नान जैसे प्रोडक्ट्स चाव से खाए जाते हैं. यहां चावल और मक्का बहुतायत में होता है, लेकिन उसका ज्‍यादातर हिस्‍सा निर्यात कर दिया जाता है. इस बार समस्या गंभीर जान पड़ रही है क्योंकि 22 लाख टन गेहूं की गिरावट भुखमरी को और भी दर्दनाक बना सकती है. 

गेहूं में गिरावट का दंश पाकिस्तान को इसलिए भी दर्द देगा, क्योंकि पड़ोसी देश अफगानिस्तान से उसकी दुश्मनी है और अब दोनों देश जंग के मैदान में हैं. अफगानिस्तान के इस हमले को बलोच लड़ाके भी समर्थन दे रहे हैं. बलोच लड़ाकों का इलाका वही है, जहां गेहूं की खेती बड़े पैमाने पर होती है. 

खैबर से लेकर पख्तूनख्वा तक गेहूं का बहुत बड़ा बेल्ट है. बलोचों का यह पूरा क्षेत्र आजकल अशांत है क्योंकि पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध जैसी स्थिति है. इस तरह पाकिस्तान दो मोर्चों पर एकसाथ लड़ रहा है. एक तरफ गेहूं की कमी तो दूसरी ओर अफगानिस्तान और बलोचों से जंग.  

अफगानिस्तान, बलोच ने बढ़ाई टेंशन 
गेहूं में गिरावट की यह समस्या कितनी गंभीर हो सकती है, इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि पाकिस्तान और गेहूं का रिश्ता वैसा ही है, जैसा मांस और मज्जा का. दोनों एक दूसरे के बिना अस्तित्वहीन हैं. पाकिस्तान का कृषि क्षेत्र गेहूं के बिना अधूरा है और जीडीपी भी बिना किसी मोल के. एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के कुल जीडीपी में गेहूं की हिस्सेदारी 2-3 फीसद तक है. यही वजह है कि खाने वालों से लेकर कमाने वालों तक, सभी गेहूं की गिरावट से परेशान हैं.

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गेहूं पैदावार में गिरावट क्यों
सवाल है कि पाकिस्तान के गेहूं उत्पादन में ऐसी गिरावट क्यों है? वजह कई हैं जिनमें कुछ तो बहुत महत्वपूर्ण हैं. लंबे समय तक सूखा, खासकर बारिश पर निर्भर इलाकों में, पैदावार में इस कमी की मुख्य वजह है. सूखे की मार से पाकिस्तान में गेहूं की खेती का एरिया 2025-26 में 10.37 मिलियन हेक्टेयर से घटकर 9.1 मिलियन हेक्टेयर रह गया. 

पाकिस्तान मौसम विभाग की रिपोर्ट है कि 2025 की शुरुआत में बारिश औसत से 39 फीसद कम रही, जिससे दक्षिणी और बारिश पर निर्भर इलाकों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा. सिंचाई के लिए पानी के बिना, किसानों को अपनी गेहूं की फसल को हेल्दी रखने में मुश्किल होती है, जिसका कुल पैदावार और इनकम पर असर पड़ता है.

इतना ही नहीं, सरकार ने 2025-26 के लिए गेहूं के सपोर्ट प्राइस (जैसे भारत में MSP पर खरीद होती है) का ऐलान करने में देरी की. सही कीमत और खरीद की आशंका की वजह से कई किसान गेहूं बोने को लेकर कन्फ्यूज रहे, जिससे बुवाई, सप्लाई में और पैदावार में कमी आ गई. 

रोटी-रोटी से जुड़ी है खेती
पाकिस्तान में कई किसानों के लिए, गेहूं की खेती गुजारे और रोजी-रोटी से जुड़ी है. घटती पैदावार, बढ़ती खेती की लागत और सरकार की तरफ से कोई मदद न मिलने की वजह से गेहूं की खेती मुश्किल में पड़ गई है, खासकर उन इलाकों में जो बारिश पर निर्भर हैं. इसमें पंजाब का इलाका सबसे खास है, जिसे पाकिस्तान में गेहूं का कटोरा भी कहते हैं. पंजाब ही ऐसा प्रांत है जो तय करता है कि पाकिस्तानी अवाम का पेट भरेगा या रोटी के लाले पड़ेंगे. इस बार पंजाब में सूखा रहा है, लिहाजा लाखों लोग रोटी के लिए तरस जाएंगे. साल-दो साल का आंकड़ा देखें तो पता चलेगा कि आटे का भाव कैसे आसमान छू रहा है क्योंकि गेहूं की पैदावार में बड़ी गिरावट है. जानकार बताते हैं कि गेहूं और आटे ने पाकिस्तान को और भी ज्यादा गरीबी में धकेल रखा है.

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पाकिस्तान में आटे का भाव
पाकिस्तान में आटा आम लोगों को कैसे गरीब बना रहा है, इसके लिए एक बार आटे का भाव जरूर जान लेना चाहिए. 

पाकिस्तान में आटे की कीमतें (फरवरी 2026 के आखिर तक) इलाके और क्वालिटी के हिसाब से अलग-अलग होती हैं. 10 किलो के बैग की कीमत आम तौर पर 890 से 1,500 रुपये से ज्यादा होती है. अधिक बिकने वाला 20 किलो के बैग की कीमत लगभग 1,780–1,810 रुपये होती है. प्रीमियम चक्की आटा की कीमत लगभग 160–200 रुपये प्रति किलो होती है.

इस्लामाबाद में 10 किलो के बैग लगभग 890-900 रुपये में मिलते हैं, और 20 किलो के बैग लगभग 1,780 रुपये में मिलते हैं. कराची या लाहौर में रिटेल प्राइस देखें तो 10 किलो के बैग (जैसे, मेट्रो शेफ) लगभग 905 रुपये के होते हैं, और 15-20 किलो के बैग 1,729 से 1,885 रुपये के बीच होते हैं. फोर्टिफाइड या प्रीमियम चक्की आटे के 5 किलो के पैकेट की कीमत 600 से 875 रुपये तक होती है. प्रीमियम देसी चक्की आटे के 5 किलो के पैक लगभग 880–1,090 रुपये में मिलते हैं.

सिंधु जल समझौता बड़ा कारण?
अब ये जान लेते हैं कि गेहूं का कटोरा पंजाब में सूखे की भयंकर हालत क्यों पैदा हुई? जानकारों का मानना है कि इसके लिए सिंधु जल समझौते में आई खटास भी एक कारण है. इस समझौते को पाकिस्तानी खेती की लाइफलाइन कहा जाता है, लेकिन साल 2025 में इस पर बड़ा संकट आ गया. पिछले साल कश्मीर के पहलगाम में एक आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौता (IWT) को सस्पेंड कर दिया, जिससे नदी के लेवल पर डेटा-शेयरिंग बंद हो गई. इससे पाकिस्तान की अपने डैम को मैनेज करने की क्षमता पर असर पड़ता है, खासकर तरबेला और मंगला रिजर्वॉयर में पानी की बहुत ज्यादा कमी के कारण.

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पंजाब, पाकिस्तानी खेती का गढ़ है, लेकिन डैम का प्रबंधन सही ढंग से नहीं होने के कारण खरीफ (गर्मी) फसल के मौसम में बहुत ज्यादा पानी की कमी का सामना कर रहा है. यहां की सिंचाई व्यवस्था एक तरह से चरमरा गई है. समझौते में आई खटास की वजह से सिंधु नदी सिस्टम से पानी के बहाव में लगभग 20 फीसद की कमी आई है. पाकिस्तान का पानी का कम स्टोरेज (लगभग 30 दिन) उसे कमजोर बनाता है, और डेटा की कमी से ज्यादा बहाव वाले मौसम में बाढ़ का अनुमान लगाने में रुकावट आती है. इस सभी समस्याओं ने पाकिस्तान के गेहूं को चौपट कर दिया और लाखों लोग भुखमरी के संकट में फंसे पड़े हैं.
 

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