आज मार्च महीने का आखिरी दिन है और कल से अप्रैल का महीना शुरू होने जा रहा, जो कई बड़े फाइनेंशियल बदलावों (Rule Change From 1st April) के साथ शुरुआत करेगा. लेकिन, इससे पहले आपको बता दें कि 31 मार्च का ये आखिरी दिन कई जरूरी कामों को करने के लिए आखिरी मौका और ये डेडलाइन मिस हुई, तो आपको जुर्माना देना पड़ सकता है या फिर आपको मिलने वाले रिफंड में भी देरी हो सकती है.
पहला काम: Tax सेविंग के लिए निवेश
ओल्ड टैक्स रिजीम चुनने वालों के लिए इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक टैक्स छूट का दावा करने के लिए निवेश का आखिरी मौका है. तमाम सरकारी योजनाओं जैसे सुकन्या समृद्धि योजना (Sukanya Samriddhi Yojana), पीपीएफ (PPF), इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम्स (ELSS) या नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC) समेत अन्य सरकारी योजनाओं में निवेश आज पूरा होना जरूरी है, जिससे इस फाइनेंशियल ईयर में लाभ मिल सके. अगर 31 मार्च की डेडलाइन खत्म होने के बाद ये करते हैं, तो फायदा अगले साल ही मिल पाएगा.
दूसरा काम: नियोक्ता को दें निवेश के प्रमाण
जिन कर्मचारियों ने Tax Saving की घोषणा की है, तो उन्हें अपने नियोक्ता के सामने इन्वेस्टमेंट और खर्चों का प्रूफ देना जरूरी है, जिससे कि सही टीडीएस कटौती हो सके. इनमें HRA दावों के लिए किराए की रसीदें, बीमा प्रीमियम की रसीद, ELSS-PPF इन्वेस्टमेंट प्रूफ और Home Loan इंटरेस्ट पेमेंट का प्रमाण शामिल है. ऐसा न किए जाने की स्थिति में मार्च महीने के वेतन से अधिक टीडीएस कटौती हो सकती है.
तीसरा काम: अपडेटेड आईटीआर दाखिल करें
असेसमेंट ईयर 2021-22 (FY2020-21) के लिए सेक्शन 139(8A) के तहत अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) दाखिल करने के लिए लास्ट डेट आज यानी 31 मार्च है. इसके बाद आप इस साल का कोई भी संशोधित या पुराना रिटर्न फाइल नहीं कर पाएंगे. इसमें एक्स्ट्रा टैक्स या पेनल्टी लग सकती है, लेकिन आगे बड़े एक्शन से बचा जा सकता है.
चौथा काम: एडवांस टैक्स पेमेंट
अगर आपकी कुल टैक्स देनदारी 10,000 रुपये या इससे ज्यादा है, तो फिर ये जरूरी है कि आपने अपना एडवांस टैक्स जमा कर दिया हो. इस काम को करने के लिए डेडलाइन भी 31 मार्च ही है और ये Advance Tax Payment न करने की स्थिति में बकाया राशि पर आपको 1% मंथली ब्याज देना पड़ सकता है.
पांचवां काम: टैक्स रिजीम सेलेक्शन और AIS वेरिफिकेशन
अगला जरूरी काम है अपने लिए सही टैक्स रिजीम का चयन करना. ओल्ड टैक्स रिजीम में कई कटौतियों शामिल थीं, जबकि न्यू टैक्स रिजीम टैक्स रेट कम होने के साथ छूट सीमित है. इसके अलावा AIS और Form-26AS का वेरिफिकेशन भी जरूरी है, जो फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन का एक कंसोलिडेटेड रिकॉर्ड पेश करते हैं, जिसमें ब्याज से इनकम, डिविडेंड समेत अन्य हाई वैल्यू ट्रांजैक्शन शामिल होते हैं. इनकी जांच जरूरी है, गलती होने पर टैक्स नोटिस जारी हो सकता है या फिर रिफंड में देरी का सामना करना पड़ सकता है.