पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के कर्मचारियों के साथ मिलकर 11 हजार करोड़ से भी ज्यादा का घोटाला करने वाला नीरव मोदी लगातार अपने कारोबार को बढ़ाने में जुटा हुआ है.
जनवरी में पीएनबी को इस घोटाले का पता लगने और सीबीआई के जांच शुरू करने से पहले नीरव अपनी कंपनी का आईपीओ लाने की तैयारी में था. अगर नीरव दिसंबर में आईपीओ ला दिया होता, तो शेयर बाजार पर भी इसका काफी ज्यादा असर दिखना लाजमी था. इसकी वजह से निवेशकों को हजारों करोड़ का नुकसान उठाना पड़ सकता था.
फिलहाल पीएनबी के शेयरों में लगातार गिरावट जारी है. नीरव की कंपनी का आईपीओ आने से कंपनी के निवेशकों को काफी भारी नुकसान झेलना पड़ता. इस वजह से शेयर बाजार में भी भूचाल आ सकता था.
नीरव की फ्लैगशिप एंटरप्राइज ने पिछले साल दिसंबर में इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लाने को लेकर शेयरहोल्डर्स की मंजूरी हासिल करने का प्रस्ताव रखा था. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक 8 दिसंबर, 2017 को हुई कंपनी की एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) में कंपनी का आईपीओ लाने के लिए शेयरहोल्डर्स की मंजूरी मांगी गई.
इस मीटिंग में कंपनी का नाम फायरस्टार इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड से बदलकर फायरस्टार इंटरनेशनल लिमिटेड करने के लिए मंजूरी मांगी गई थी. इसमें कंपनी के मेमोरेंडम और को बदलने की बात पर भी शेयरहोल्डर की सहमति मांगी गई थी.
शेयर होल्डर की खातिर जारी बयान में कंपनी ने लिखा था कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स कंपनी को पब्लिक लिमिटेड कंपनी बनाना चाहते हैं. बताया गया कि इसके जरिये कंपनी बाजार से फंड जुटाना चाहती है. इस फंड का इस्तेमाल कंपनी का कारोबार बढ़ाने के लिए किया जाएगा.
कंपनी के के मुताबिक आईपीओ लाने से पहले ही कंपनी 495 करोड़ रुपये जुटा चुकी थी. यह रकम विदेशी निवेशकों के जरिये जुटाई गई थी. इसके लिए कंपनी के 97.01 लाख इक्विटी शेयर को प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिये दिया था.
31 मार्च, 2017 को खत्म हुए वित्तीय वर्ष में फायरस्टार इंटरनेशनल ने 582.08 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट हासिल किया. इसकी बिक्री और अन्य आय 14,706.04 करोड़ रुपये थी. नीरव मोदी की इस कंपनी की वैल्यू 6,413.89 करोड़ आंकी गई है.
की कंपनी भारत, अमेरिका समेत लंदन, हॉन्गकॉन्ग और दुनिया के कई देशों में कारोबार करती है. नीरव मोदी ब्रांड ज्वैलरी की कीमतों की शुरुआत करोड़ों रुपये से होती है.