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सस्ते पेट्रोल-डीजल का रास्ता हो सकता तैयार, OPEC देशों की आज बैठक

ऑर्गनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्ट‍िंग कंट्रीज अथवा ओपेक देश के मंत्र‍ियों की आज ऑस्ट्र‍िया के वियन में बैठन होने जा रही है. 14 देशों के इस समूह की बैठक में जो भी फैसला होगा, वो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती और बढ़ोतरी का रास्ता तैयार करेगा.

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ओपेक देश (Reuters File photo)
ओपेक देश (Reuters File photo)

ऑर्गनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्ट‍िंग कंट्रीज अथवा ओपेक देशों के मंत्र‍ियों की आज ऑस्ट्र‍िया के वियना में बैठक है. 14 देशों के इस समूह की बैठक में जो भी फैसला होगा, वो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती और बढ़ोतरी का रास्ता तैयार करेगा. शुक्रवार को हो रही इस बैठक में एक अहम प्रस्ताव पर चर्चा होनी है, जो अगर पास हो गया तो आपको सस्ते पेट्रोल और डीजल का तोहफा आगे भी मिलता रहेगा.

ओपेक देशों की बैठक में कच्चे तेल का प्रोडक्शन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. भारत भी अपनी तरफ से ओपेक देशों से अपील कर चुका है कि वह कच्चे तेल की आपूर्ति को बेहतर बनाए रखने पर जोर दें. इस खातिर बैठक में एक प्रस्ताव भी लाया जा रहा है. इस प्रस्ताव में कच्चे तेल का प्रोडक्शन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.

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अगर यह प्रस्ताव बैठक में पास हो जाता है, तो सभी ओपेक देश कच्चे तेल का प्रोडक्शन बढ़ा देंगे. इससे कच्चे तेल की बेहतर आपूर्ति हो सकेगी. अच्छी सप्लाई होने का फायदा यह होगा कि कच्चे तेल की कीमतों में कटौती की संभावना बढ़ जाएगी. इसका सीधा फायदा घरेलू स्तर पर सस्ते पेट्रोल और डीजल के तौर पर मिलेगा.

सऊदी अरब ने कहा है कि वह कच्चे तेल का प्रोडक्शन बढ़ाने के इस प्रस्ताव को पास करने के लिए जो हो सकेगा, वो करेगा. लेक‍िन दूसरी तरफ, ईरान ने इस प्रस्ताव का विरोध शुरू कर दिया है. उसका कहना है कि वह इस प्रस्ताव का कतई समर्थन नहीं करेगा. ऐसी आशंका जताई जा रही है कि कई और सदस्य देश भी ईरान का इसमें साथ दे सकते हैं.

अगर बैठक में ईरान के मन की होती है और प्रोडक्शन बढ़ाने का प्रस्ताव पास नहीं हो पाता है, तो कच्चे तेल की सप्लाई पर इसका असर पड़ना तय है. इससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं. ऐसा होने पर पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों से राहत मिलने की उम्मीद कम हो जाएगी.

ऐसे में देखना होगा कि आज ऑयल प्रोड्यूसर इन 14 देशों की बैठक में क्या फैसला लिया जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक बेनतीजा साबित हो सकती है. क्योंकि एक तरफ सऊदी अपने रुख पर अड़ा हुआ है. वहीं, ईरान भी प्रोडक्शन न बढ़ाने को लेकर अपना पक्ष मजबूत कर रहा है.

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