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मेट्रो सिटीज छोड़कर क्यों छोटे शहरों में घर खरीद रहे हैं Gen Z

रियल एस्टेट मार्केट में एक ऐसी लहर आई है जिसने सालों पुराने ट्रेंड को पलट कर रख दिया है. अब घर खरीदने का फैसला उम्र के आखिरी पड़ाव पर नहीं, बल्कि करियर की शुरुआत में ही लिया जा रहा है और इस क्रांति के असली बॉस बने हैं जेन जेड (Gen Z) और मिलेनियल्स.

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टियर-2 और टियर-3 शहर बने घर खरीदारों की पहली पसंद (Photo: PTI)
टियर-2 और टियर-3 शहर बने घर खरीदारों की पहली पसंद (Photo: PTI)

वो जमाना गया जब लोग रिटायरमेंट के करीब पहुंचकर घर खरीदने का सपना देखते थे. आज की पीढ़ी यानी Gen Z (जेनरेशन जेड) और मिलेनियल्स ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है. अब घर खरीदना सिर्फ एक जरूरत नहीं, बल्कि कामयाबी का नया स्टेटस सिंबल और निवेश का सबसे बड़ा जरिया बन गया है.

चौंकाने वाली बात यह है कि यह बदलाव दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब भारत के छोटे शहर यानी टियर-2 और टियर-3 शहर रियल एस्टेट मार्केट के नए हॉटस्पॉट बनकर उभरे हैं. बाजार में आए इस बड़े बदलाव से साफ है कि अब घर खरीदने के मामले में युवा पीढ़ी ही सबसे आगे खड़ी है और वही असली फैसले ले रही है.

बेसिक होम लोन की हालिया 'कंज्यूमर इनसाइट्स रिपोर्ट' के मुताबिक, आज भारत में घर खरीदने वालों में 90 से 95 फीसदी युवा हैं. ये वो लोग हैं जो अपनी लाइफस्टाइल, बचत और भविष्य को लेकर काफी सजग हैं. अब सवाल उठता है कि ये युवा आखिर महानगरों को छोड़कर छोटे शहरों की ओर क्यों रुख कर रहे हैं? इसकी बड़ी वजह है कम कीमत में बेहतर सुविधाएं और सुकून भरी जिंदगी. टियर-2 और टियर-3 शहरों में अब न केवल अच्छे हॉस्पिटल और स्कूल मौजूद हैं, बल्कि वहां की डिजिटल कनेक्टिविटी भी कमाल की है.

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क्यों बढ़ा छोटे शहरों का क्रेज?

इन छोटे शहरों के उदय के पीछे कई बड़े कारण हैं. आज इंटरनेट की पहुंच गांव-गांव तक हो गई है, जिससे वर्क फ्रॉम होम और डिजिटल बिजनेस के मौके बढ़े हैं. इसके अलावा, सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) पर दिए जा रहे जोर ने इन शहरों की तस्वीर बदल दी है. इस पर नेशनल हाउसिंग बैंक के पूर्व एमडी राज विकास वर्मा का कहना है कि आवास अब केवल छत नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा और सम्मान का साधन बन गया है. छोटे शहरों में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ने से अब यहां निवेश करना ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है.

India housing market trends
सुरक्षित भविष्य के लिए युवाओं की नई पसंद (Photo Basic home loan)

ऑनलाइन होम लोन का बढ़ता जादू

आज के युवाओं को लंबी कतारों में खड़ा होना और बैंकों के चक्कर काटना बिल्कुल पसंद नहीं है. यही वजह है कि 40 साल से कम उम्र के लगभग 72 फीसदी खरीदार ऑनलाइन होम लोन के लिए आवेदन करना पसंद करते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, अब छोटे शहरों और अर्ध-शहरी इलाकों के लोग भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि वे अलग-अलग लोन ऑफर्स की तुलना कर सकें और घर बैठे दस्तावेज जमा कर सकें. बेसिक होम लोन के सीईओ अतुल मोंगा का मानना है कि 'इंडिया स्टैक' और डिजिटल लोन प्रक्रिया ने इस पूरे इकोसिस्टम को ही बदल दिया है.

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डिजिलॉकर ने बना दिया काम आसान

कागजी दस्तावेजों के झंझट को खत्म करने में डिजिलॉकर ने बड़ी भूमिका निभाई है. रिपोर्ट की मानें तो होम लोन प्रक्रिया में डिजिलॉकर का इस्तेमाल करने वाले 80 फीसदी लोग 35 साल से कम उम्र के हैं. यह साफ दर्शाता है कि युवा पीढ़ी पेपरलेस और फास्ट सर्विस को ज्यादा तवज्जो दे रही है. हालांकि सरकारी बैंक आज भी बाजार में मजबूत पकड़ रखते हैं, लेकिन प्राइवेट बैंक और एनबीएफसी (NBFC) भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, क्योंकि वे युवाओं की उम्मीदों पर खरा उतर रहे हैं.

आज के खरीदार सिर्फ ये नहीं देखते कि ब्याज दर कितनी है. उनके लिए लोन मिलने की रफ्तार, प्रक्रिया की पारदर्शिता और अच्छी कस्टमर सर्विस भी उतनी ही जरूरी है. कई युवा और स्वरोजगार करने वाले लोग तो ऐसे हैं जो जल्दी लोन मिलने की शर्त पर थोड़ा ज्यादा ब्याज देने के लिए भी तैयार हैं. उन्हें वो सिस्टम चाहिए जो उनके समय की कद्र करे और बिना किसी जटिलता के उनका घर का सपना पूरा कर सके.

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चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं

इतनी तरक्की के बावजूद कुछ दिक्कतें अभी भी बनी हुई हैं. एजेंटों द्वारा गलत जानकारी देना, दस्तावेजों की अधिकता और प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी कुछ ऐसी समस्याएं हैं जिनका सामना खरीदारों को करना पड़ता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन छोटी-छोटी बाधाओं को दूर कर लिया जाए, तो आने वाले समय में टियर-2 और टियर-3 शहर भारत की अर्थव्यवस्था और रियल एस्टेट सेक्टर की रीढ़ बन जाएंगे.
 

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