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यूएई में घर खरीदना अब ऑनलाइन शॉपिंग जितना आसान और सुरक्षित!

दुबई और पूरे यूएई में अब घर खरीदना पहले जैसा थकाऊ काम नहीं रहा. डिजिटल क्रांति ने रियल एस्टेट की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है, जहां अब 90% से ज्यादा सौदे ऑनलाइन हो रहे हैं. जानिए कैसे एआई (AI) और प्रॉपटेक की मदद से निवेशक घर बैठे सटीक कीमत जान रहे हैं और धोखाधड़ी से बच रहे हैं.

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अब एक क्लिक पर खरीदें दुबई में अपनी मनपसंद प्रॉपर्टी (Photo: Pixabay)
अब एक क्लिक पर खरीदें दुबई में अपनी मनपसंद प्रॉपर्टी (Photo: Pixabay)

यूएई (UAE) का प्रॉपर्टी बाजार हमेशा से अपनी रफ्तार और चमक-धमक के लिए पूरी दुनिया के निवेशकों को पसंद आता रहा है. लेकिन हाल के दिनों में यहां ईंट-पत्थरों से ज्यादा 'डिजिटल तकनीक' का बोलबाला बढ़ा है. अब वो जमाना चला गया जब आपको प्रॉपर्टी देखने के लिए चक्कर काटने पड़ते थे या सिर्फ ब्रोकर की बातों पर भरोसा करना पड़ता था. अब डेटा और इंटरनेट ने घर खरीदने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है. चलिए जानते हैं कि कैसे इस डिजिटल क्रांति ने निवेशकों का काम आसान कर दिया है.

दरअसल, यूएई में अब प्रॉपर्टी से जुड़े काम मैनुअल के बजाय पूरी तरह डिजिटल हो चुके हैं. सरकार ने ऐसे प्लेटफॉर्म तैयार किए हैं जहां आप घर बैठे यह देख सकते हैं कि प्रॉपर्टी का असली मालिक कौन है और वहीं से अपना सौदा भी रजिस्टर कर सकते हैं. दुबई की बात करें तो यहां 90% से ज्यादा प्रॉपर्टी डील्स अब डिजिटल तरीके से ही पूरी की जाती हैं. इससे न सिर्फ समय की बचत होती है, बल्कि किसी भी तरह की धोखाधड़ी की गुंजाइश भी खत्म हो गई है.

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डेटा बन गया है नई ताकत

आजकल के निवेशक सिर्फ ब्रोकर के कहने पर पैसा नहीं लगाते. वे अब 'डिजिटल डैशबोर्ड' का इस्तेमाल करते हैं, जहां उन्हें हर इलाके की पूरी जानकारी मिल जाती है. यहां किराए से होने वाली औसत कमाई 5% से 8% के बीच है, जो इसे दुनिया के सबसे बेहतरीन बाजारों में से एक बनाती है. जिसके चलते निवेशक अब घर बैठे यह जान सकते हैं कि किस मोहल्ले में मांग ज्यादा है और कहां आने वाले समय में फायदा होगा. यही वजह है कि अब फैसला लेने का आधार पुरानी जानकारी नहीं, बल्कि 'रीयल टाइम डेटा' है.

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प्रॉपटेक और एआई बदल रहे खेल

आजकल रियल एस्टेट की दुनिया में प्रॉपटेक (प्रॉपर्टी टेक्नोलॉजी) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का जबरदस्त जादू चल रहा है. अब वो दिन गए जब आपको प्रॉपर्टी की सही कीमत जानने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता था. अब एआई आधारित स्मार्ट टूल्स हजारों तरह के डेटा और मार्केट के उतार-चढ़ाव का बारीकी से विश्लेषण करते हैं और पलक झपकते ही प्रॉपर्टी की बिल्कुल सटीक कीमत बता देते हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि खरीदारों के लिए गलत दाम पर घर खरीदने या ठगे जाने का रिस्क लगभग खत्म हो गया है.

यही नहीं, ये आधुनिक टूल्स निवेशकों की पसंद, उनकी जरूरत और बजट को ध्यान में रखकर उनके लिए एकदम परफेक्ट प्रॉपर्टी ढूंढने में भी मदद करते हैं. तकनीक के इस दौर में अब उन प्रोजेक्ट्स की मांग सबसे ज्यादा है और वे तेजी से बिक रहे हैं, जिन्हें लोग घर बैठे ऑनलाइन आसानी से देख और समझ सकते हैं.

होम लोन और छोटे निवेश का मौका

आज के दौर में बैंकों और फाइनेंशियल संस्थानों ने भी खुद को पूरी तरह हाई-टेक कर लिया है, जिससे आम आदमी का काम काफी आसान हो गया है. अब होम लोन या मॉर्टगेज की मंजूरी के लिए आपको हफ्तों तक बैंक के चक्कर काटने और इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ती. डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की मदद से कागजी कार्रवाई इतनी तेज हो गई है कि यह काम अब कुछ ही दिनों में चुटकियों में पूरा हो जाता है.  

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इतना ही नहीं, अब निवेश के तरीके भी बदल रहे हैं. बाजार में 'आंशिक स्वामित्व' यानी फ्रैक्शनल ओनरशिप का मॉडल काफी पॉपुलर हो रहा है. इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि अब जरूरी नहीं कि आपके पास करोड़ों रुपये हों तभी आप प्रॉपर्टी में निवेश करें. इसके जरिए छोटे निवेशक और युवा भी किसी बड़ी और महंगी प्रॉपर्टी में एक छोटा सा हिस्सा खरीद कर अपने निवेश की शुरुआत कर सकते हैं. यानी अब महंगी प्रॉपर्टी का मालिक बनना हर किसी के बजट में मुमकिन हो गया है.

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निवेशकों को क्या मिला?

इस पूरे डिजिटल बदलाव ने निवेशकों की राह बहुत आसान कर दी है और इसके तीन सबसे बड़े फायदे साफ नजर आते हैं. सबसे पहली बात है पारदर्शिता, यानी अब सब कुछ इतना साफ-सुथरा है कि धोखाधड़ी का डर खत्म हो गया है और निवेश का रिस्क भी काफी कम हो गया है. दूसरा बड़ा फायदा है इसकी रफ्तार, क्योंकि अब हफ्तों का काम चंद दिनों में हो जाता है, जिससे सौदे बहुत तेजी से पूरे हो रहे हैं.

तीसरी और सबसे अहम बात है पहुंच, जिसने मार्केट के दरवाजे हर किसी के लिए खोल दिए हैं. अब जरूरी नहीं कि आपके पास करोड़ों रुपये हों, इस तकनीक की वजह से अब छोटा निवेशक भी इस बड़े और आलीशान बाजार का हिस्सा बन सकता है. इन सब बातों से एक बात तो साफ है कि यूएई का रियल एस्टेट बाजार अब सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारतों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह अब पूरी तरह से डेटा और डिजिटल भरोसे की एक नई और मजबूत बुनियाद पर खड़ा है.
 

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