सपनों के शहर मुंबई में घर खरीदना अब पहले से कहीं ज्यादा महंगा होता जा रहा है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मुंबई में प्रॉपर्टी खरीदने वालों की संख्या में तो कमी आई है, लेकिन लग्जरी और प्रीमियम फ्लैट्स की बढ़ती मांग ने सरकार की तिजोरी भर दी है.
आलम यह है कि घर कम बिकने के बावजूद स्टांप ड्यूटी से होने वाली कमाई ने पिछले 14 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. तो चलिए जानते हैं कि मुंबई के प्रॉपर्टी मार्केट में यह बड़ा उलटफेर कैसे हुआ.
लग्जरी घरों की मांग ने बनाया रिकॉर्ड
नाइट फ्रैंक इंडिया की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 में मुंबई के रियल एस्टेट बाजार में 11,219 संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन हुआ, जो पिछले साल के मुकाबले 8% कम है. आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 में संपत्ति पंजीकरण में महीने-दर-महीने 22% की गिरावट और स्टांप शुल्क संग्रह में 19% की कमी दर्ज की गई. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि महाराष्ट्र सरकार को मिलने वाले राजस्व (स्टांप ड्यूटी) में 2% की बढ़ोतरी हुई और यह 1,012 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
जानकारों का मानना है कि यह उछाल इसलिए आया क्योंकि लोग अब सस्ते घरों के बजाय 5 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत वाले प्रीमियम और आलीशान घर ज्यादा खरीद रहे हैं. वहीं, 1 करोड़ रुपये से कम वाले घरों की डिमांड में गिरावट देखी गई है, क्योंकि आम आदमी के लिए बढ़ती कीमतें अब चुनौती बन रही हैं.
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छोटे और मध्यम घरों का अब भी दबदबा
भले ही अमीरों ने महंगे घर खरीदे हों, लेकिन मुंबईकर की पहली पसंद अब भी 1,000 वर्ग फुट तक के फ्लैट ही हैं. कुल रजिस्ट्रेशन में 83% हिस्सेदारी इन्हीं छोटे और मध्यम वर्ग के घरों की रही है. खरीदार सबसे ज्यादा 500 से 1,000 वर्ग फुट वाले उन घरों को पसंद कर रहे हैं, जो बजट में होने के साथ-साथ परिवार की जरूरतों के लिए पर्याप्त जगह भी देते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, 1,000 से 2,000 वर्ग फुट वाले थोड़े बड़े घरों की बिक्री में 1% की मामूली गिरावट आई है, जबकि बहुत बड़े यानी 2,000 वर्ग फुट से ज्यादा वाले अपार्टमेंट्स की मांग स्थिर बनी हुई है.
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पश्चिमी उपनगरों में घर खरीदने की होड़
इलाकों की बात करें तो मुंबई के पश्चिमी और मध्य उपनगर अब भी हॉटस्पॉट बने हुए हैं. जनवरी में हुए कुल रजिस्ट्रेशन में से 87% हिस्सा इन्हीं इलाकों का रहा. इसमें भी पश्चिमी उपनगर 57% हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे रहे. इसके उलट, दक्षिण मुंबई और मध्य मुंबई जैसे प्राइम इलाकों में प्रॉपर्टी की हलचल थोड़ी कम देखी गई. जानकारों का मानना है कि शहर में चल रहे नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और स्टेबल इकोनॉमी के चलते लोगों का भरोसा रियल एस्टेट पर बना हुआ है, बस खरीदारी का पैटर्न अब बजट से प्रीमियम की ओर शिफ्ट हो रहा है.