भारत के टियर-2 और टियर-3 शहर तेजी से रोजगार के प्रमुख केंद्र बनते जा रहे हैं. इंडस्ट्रियल कॉरिडोर्स, बुनियादी ढांचे में सुधार और निजी निवेश की मदद से ये छोटे शहरी केंद्र आर्थिक विकास के इंजन में तब्दील हो रहे हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव न केवल महानगरों से परे नए रोजगार पैदा कर रहा है, बल्कि स्थानीय व्यवसायों, परिवहन नेटवर्क और सप्लाई चेन्स पर भी इसका बेहद सकारात्मक और व्यापक असर देखने को मिल रहा है.
समरकूल होम अप्लायंसेज लिमिटेड (Summercool Home Appliances Ltd.) के सेल्स एंड मार्केटिंग डायरेक्टर, आशुतोष गुप्ता के अनुसार, सरकारी पहल और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में बढ़ते निवेश कंपनियों को बड़े शहरों से आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, जिससे उभरते क्षेत्रों में नए अवसर पैदा हो रहे हैं.
गुप्ता ने कहा, "बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर, बेहतर कनेक्टिविटी, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर्स और व्यापार करने में आसानी के मजबूत माहौल के साथ, इनमें से कई शहर अब विनिर्माण और औद्योगिक निवेश के लिए आकर्षक स्थान बनते जा रहे हैं." जैसे-जैसे उद्योग इन क्षेत्रों में काम शुरू कर रहे हैं, इसके लाभ केवल फैक्ट्रियों तक ही सीमित नहीं हैं. रोजगार के अवसर लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, परिवहन, रिटेल और स्किल डेवलपमेंट जैसे सहायक क्षेत्रों तक भी फैल रहे हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को कई गुना फायदा मिल रहा है.
यह भी पढ़ें: लखनऊ में घर बनाने का मौका, LDA की नई स्कीम, जानें कैसे करें अप्लाई
लोगों को मिल रहे हैं रोजगार
गुप्ता ने आगे कहा, "जब उद्योग उभरते क्षेत्रों में काम शुरू करते हैं, तो इसके फायदे सिर्फ सीधे तौर पर नौकरी मिलने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि इनका विस्तार स्थानीय सप्लाई चेन्स, रिटेल, परिवहन और कौशल विकास तक भी होता है."
उत्तर प्रदेश उन राज्यों में शामिल है जो इस बदलाव के गवाह बन रहे हैं. यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) कॉरिडोर जैसे औद्योगिक समूहों ने बढ़ते निवेश को आकर्षित किया है और उम्मीद है कि इनसे लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे.
गुप्ता के अनुसार, इस तरह के विकास दिखाते हैं कि कैसे औद्योगिक विस्तार विकास को केवल मुट्ठी भर महानगरों तक सीमित रखने के बजाय व्यापक आर्थिक गति के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में काम कर सकता है, उन्होंने कहा, "उत्तर प्रदेश में हाल ही में इस तरह का बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां YEIDA कॉरिडोर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ा है. इससे लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है, और यह वास्तव में दर्शाता है कि कैसे औद्योगिक विस्तार स्थानीय आर्थिक गति के लिए एक उत्प्रेरक की तरह काम कर सकता है."
यह भी पढ़ें: स्पेन में मिल रहा है मुफ्त में घर, जॉब का भी ऑफर, बस पूरी करनी होगी एक शर्त
एक्सपर्ट्स का मानना है कि रोजगार के अवसरों को लोगों के होमटाउन के करीब लाने से पलायन का दबाव धीरे-धीरे कम हो सकता है और छोटे शहरों में जीवन स्तर में सुधार हो सकता है.
विकास के नए केंद्र
यूनिवर्सल एआई यूनिवर्सिटी के संस्थापक और चांसलर तरुण आनंद ने कहा कि रोजगार केंद्रों के रूप में टियर-2 और टियर-3 शहरों का उभार देश के लिए अधिक संतुलित विकास मॉडल को बढ़ावा दे रहा है. इंदौर, जयपुर, कोयंबटूर, कोच्चि, लखनऊ, विशाखापत्तनम और अहमदाबाद जैसे शहर सूचना प्रौद्योगिकी (IT), बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं, मैन्युफैक्चरिंग, खुदरा व्यापार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्रों में प्रतिभा और इनोवेशन के केंद्रों के रूप में तेजी से उभर रहे हैं.
आनंद ने कहा, "भारत के जॉब मार्केट में बदलता परिदृश्य टियर-2 और टियर-3 शहरों का रोजगार केंद्रों के रूप में उभरना है, जो भारत के लिए अधिक न्यायसंगत और समान विकास मॉडल को बढ़ावा दे रहा है."
उन्होंने रेखांकित किया कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में रोजगार सृजन सालाना लगभग 21-23% की दर से बढ़ रहा है, जबकि महानगरों में यह दर 14-15% है, नॉन-मेट्रो क्षेत्रों में नौकरियों के अवसरों में 42% की वृद्धि हुई है, जो टियर-1 शहरों में देखी गई 19% की वृद्धि से काफी अधिक है. बेहतर होता डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, सहायक सरकारी नीतियां और पारंपरिक केंद्रों से बाहर व्यवसायों की बढ़ती मौजूदगी इस बदलाव को और तेज कर रही है.
रोजगार के अलावा, इसका आर्थिक प्रभाव कई अन्य क्षेत्रों में भी महसूस किया जा रहा है. रिवर्स माइग्रेशन और बढ़ती खर्च योग्य आय से निर्माण, स्वास्थ्य सेवा, रिटेल, हॉस्पिटैलिटी और शिक्षा के क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्थाएं मजबूत हो रही हैं. आशुतोष गुप्ता ने कहा, "जब घर के करीब अधिक अवसर लाए जाते हैं, तो टियर-2 और टियर-3 शहर पलायन के दबाव को कम करने, रोजमर्रा के जीवन को बेहतर बनाने और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को धीरे-धीरे मजबूत करने में मदद कर सकते हैं."
जैसे-जैसे भारत अपनी विनिर्माण क्षमताओं का विस्तार कर रहा है और आर्थिक गतिविधियां बड़े महानगरों से बाहर फैल रही हैं, विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे शहर समावेशी विकास और रोजगार सृजन को गति देने में आने वाले समय में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.